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रवि किशन का भावुक खुलासा: संघर्ष के दिनों में मेकअप बॉक्स सूंघकर रोते थे, बोले- 43 साल बाद मिली पहचान

रवि किशन ने बताया कि संघर्ष के दिनों में उनके पास कोई काम नहीं था और वे अक्सर अपनी कार में रखे मेकअप बॉक्स को सूंघकर भावुक हो जाते थे। उन्होंने कहा कि वह दो-तीन महीने तक लगातार उस बॉक्स को देखकर रोते थे और भगवान से यही सवाल करते थे कि उन्हें दोबारा अभिनय करने का मौका कब मिलेगा।

रवि किशन का भावुक खुलासा: संघर्ष के दिनों में मेकअप बॉक्स सूंघकर रोते थे, बोले- 43 साल बाद मिली पहचान
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मुंबई: अभिनेता और सांसद रवि किशन ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए एक बेहद भावुक किस्सा साझा किया है। यह खुलासा उन्होंने लोकप्रिय शो इंडियन आइडल के 75वें एपिसोड के विशेष मौके पर किया। कार्यक्रम में पहुंचे रवि किशन ने बताया कि उनके जीवन में एक ऐसा समय भी था जब काम मिलना मुश्किल हो गया था और उन्हें गहरी आर्थिक व मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।

मेकअप बॉक्स से जुड़ी अनोखी याद

रवि किशन ने बताया कि संघर्ष के दिनों में उनके पास कोई काम नहीं था और वे अक्सर अपनी कार में रखे मेकअप बॉक्स को सूंघकर भावुक हो जाते थे। उन्होंने कहा कि वह दो-तीन महीने तक लगातार उस बॉक्स को देखकर रोते थे और भगवान से यही सवाल करते थे कि उन्हें दोबारा अभिनय करने का मौका कब मिलेगा। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनके भीतर अभिनय के प्रति इतनी गहरी दीवानगी थी कि उस समय वे पैसे, घर या गाड़ी जैसी चीजों के बारे में नहीं सोचते थे। उनके लिए सबसे बड़ी इच्छा सिर्फ अभिनय करना और कैमरे के सामने आना था।

43 साल का लंबा सफर

रवि किशन ने बताया कि उनके सपनों को साकार होने में 43 साल का लंबा समय लग गया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके अनुसार, यह संघर्ष ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना और उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया। उन्होंने युवा कलाकारों को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में कठिनाइयां आती हैं, लेकिन उनसे घबराना नहीं चाहिए। रवि किशन ने कहा, “एक दिन सफलता जरूर मिलती है, बस धैर्य और मेहनत जरूरी है।”

‘लापता लेडीज’ और अंतरराष्ट्रीय पहचान

रवि किशन ने अपनी हालिया सफलता का भी जिक्र किया और कहा कि फिल्म लापता लेडीज ने उनके करियर को एक नई दिशा दी। किरण राव के निर्देशन में बनी इस फिल्म को भारत की ओर से 97वें अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजा गया था। हालांकि यह फिल्म शीर्ष 15 में जगह नहीं बना सकी, लेकिन इसके बावजूद इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली।


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