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नौ करोड़ के चेक बाउंस में राजपाल यादव तिहाड़ में, मदद के लिए हस्तियों ने बढ़ाए हाथ

राजपाल यादव ने वर्ष 2010 में फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से पांच करोड़ रुपये का ऋण लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

नौ करोड़ के चेक बाउंस में राजपाल यादव तिहाड़ में, मदद के लिए हस्तियों ने बढ़ाए हाथ
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नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता और कॉमेडियन राजपाल यादव एक बार फिर कानूनी संकट में घिर गए हैं। नौ करोड़ रुपये के चेक बाउंस और लोन डिफॉल्ट मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद उन्हें तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करना पड़ा। चार फरवरी को हाई कोर्ट ने उन्हें धन व्यवस्था के लिए एक सप्ताह की और मोहलत देने की अंतिम याचिका खारिज कर दी थी और बिना किसी देरी के आत्मसमर्पण का निर्देश दिया था। पांच फरवरी को राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया।


भावुक बयान


आत्मसमर्पण से पहले अभिनेता ने भावुक बयान दिया था कि “मेरे पास पैसे नहीं हैं। कोई उपाय भी नहीं दिखता। मेरा कोई दोस्त नहीं है। मुझे इस संकट से खुद ही निपटना है।” उनके इस बयान ने फिल्म जगत और प्रशंसकों को झकझोर दिया। इसके बाद कई हस्तियों ने सार्वजनिक रूप से उनकी मदद की घोषणा की है।

क्या है पूरा मामला?

राजपाल यादव ने वर्ष 2010 में फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से पांच करोड़ रुपये का ऋण लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ। आरोप है कि ऋण चुकाने के लिए दिए गए सात चेक बाउंस हो गए। इसके बाद संबंधित कंपनी ने उनके खिलाफ चेक बाउंस और लोन डिफॉल्ट का मामला दर्ज कराया। कानूनी प्रक्रिया के दौरान मामला लंबा खिंचता रहा। वर्ष 2018 में निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन मामला समाप्त नहीं हुआ। समय के साथ ब्याज जुड़ने के कारण मूल पांच करोड़ रुपये की रकम बढ़कर लगभग नौ करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अब और राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने उन्हें तत्काल आत्मसमर्पण का निर्देश दिया, जिसके बाद उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया।

इंडस्ट्री से मिला समर्थन

राजपाल यादव के भावुक बयान और उनकी मौजूदा स्थिति ने फिल्म जगत में सहानुभूति की लहर पैदा कर दी है। कई कलाकार, निर्माता और सार्वजनिक हस्तियां उनकी मदद के लिए आगे आई हैं।

सोनू सूद ने बढ़ाया हाथ

अभिनेता सोनू सूद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर घोषणा की कि वह राजपाल यादव को अपनी अगली फिल्म में साइन कर रहे हैं और साइनिंग अमाउंट को सहायता के रूप में दे रहे हैं। उन्होंने लिखा, “राजपाल एक प्रतिभाशाली अभिनेता हैं और उन्होंने उद्योग को वर्षों तक अविस्मरणीय सेवाएं दी हैं। कभी-कभी समय खराब आता है। हमें उनके साथ खड़ा होना चाहिए।” सोनू सूद ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े निर्माताओं, निर्देशकों और सहयोगियों से भी अपील की कि वे आगे आकर राजपाल की मदद करें।

इंद्रजीत सिंह की आर्थिक सहायता

जैम म्यूजिक के प्रोड्यूसर इंद्रजीत सिंह ने 1 करोड़ 11 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “इंटरनेट मीडिया के माध्यम से हमें अभिनेता की पीड़ा की जानकारी मिली। मन बेहद व्यथित हुआ। राजपाल एक महान कलाकार ही नहीं, बल्कि अच्छे और सच्चे इंसान भी हैं। इस कठिन घड़ी में हम सभी को उनके साथ खड़ा होना चाहिए।”

तेज प्रताप यादव की मदद

जन शक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने भी 11 लाख रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि कलाकारों का सम्मान और उनकी सुरक्षा समाज की जिम्मेदारी है।

गुरमीत चौधरी का भावुक संदेश

टीवी अभिनेता गुरमीत चौधरी ने भी राजपाल के समर्थन में पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “राजपाल यादव ने हमें अनगिनत मुस्कानें, हंसी और अविस्मरणीय क्षण दिए हैं। आज उन्हें हमारी जरूरत है। एक साथी अभिनेता और एक इंसान के रूप में मैं जितना कर सकता हूं, करूंगा।”

कानूनी प्रक्रिया और बढ़ता कर्ज

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि चेक बाउंस के मामलों में अदालतें आमतौर पर समझौते को प्राथमिकता देती हैं, लेकिन बार-बार भुगतान न होने पर सख्त कार्रवाई भी की जाती है। राजपाल यादव के मामले में भी अदालत ने कई अवसर दिए, लेकिन भुगतान न होने के कारण सख्त रुख अपनाया गया। वर्षों तक चले मुकदमे और ब्याज के चलते कर्ज की राशि लगभग दोगुनी हो गई। यह मामला उन कलाकारों के लिए भी चेतावनी माना जा रहा है, जो फिल्म निर्माण जैसे जोखिम भरे निवेश में बिना ठोस वित्तीय योजना के उतरते हैं।

करियर का सफर: हंसी से संघर्ष तक

राजपाल यादव ने हिंदी सिनेमा में कॉमेडी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘वक्त’, ‘फिर हेरा फेरी’, ‘पार्टनर’, ‘भूल भुलैया’, ‘हंगामा’ और ‘चुप चुप के’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। अपनी अलग शैली, चेहरे के हाव-भाव और टाइमिंग के कारण वह कॉमिक भूमिकाओं के लिए पहली पसंद बने। हालांकि, फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखना उनके लिए आर्थिक रूप से भारी साबित हुआ। ‘अता पता लापता’ को लेकर उनकी महत्वाकांक्षा सफल नहीं हो सकी और यहीं से आर्थिक संकट की शुरुआत हुई।

इंडस्ट्री के लिए सबक

राजपाल यादव का मामला फिल्म उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण सबक भी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कलाकारों को बड़े वित्तीय निर्णय लेते समय पेशेवर सलाह लेनी चाहिए। फिल्म निर्माण में निवेश उच्च जोखिम वाला होता है और असफलता की स्थिति में गंभीर वित्तीय परिणाम सामने आ सकते हैं। इसके साथ ही यह मामला मनोरंजन जगत में आर्थिक सुरक्षा और कानूनी जागरूकता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। कई कलाकार अनियमित आय, अनुबंधों की जटिलता और वित्तीय प्रबंधन की कमी के कारण संकट में फंस जाते हैं।

धनराशि का प्रबंध


फिलहाल राजपाल यादव तिहाड़ जेल में हैं और उनके समर्थकों की कोशिश है कि जल्द से जल्द धनराशि का प्रबंध कर कानूनी समाधान निकाला जाए। यदि समझौता होता है या बकाया राशि का भुगतान किया जाता है, तो उन्हें राहत मिल सकती है। इंडस्ट्री से मिल रहा समर्थन उनके लिए मनोबल बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। हालांकि अंतिम फैसला अदालत और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

राजपाल यादव की कहानी एक सफल कलाकार के संघर्ष, आर्थिक जोखिम और कानूनी जटिलताओं का मिश्रण है। जहां एक ओर उन्होंने लाखों दर्शकों को हंसी दी, वहीं आज वह खुद मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इंडस्ट्री और समर्थकों की मदद से वह इस संकट से उबर पाएंगे।


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