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'अम्मा' में सत्ता संघर्ष तेज, एडहॉक कमेटी पर श्वेता मेनन ने उठाए गभीर सवाल

कोच्चि, मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों का प्रमुख कमेटी 'मलयालम मूवी आर्टिस्ट एसोसिएशन' (अम्मा) एक बार फिर अंदरूनी विवादों के कारण सुर्खियों में है। संगठन में नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर चल रहा टकराव अब एक संघर्ष में बदल गया है।

अम्मा में सत्ता संघर्ष तेज, एडहॉक कमेटी पर श्वेता मेनन ने उठाए गभीर सवाल
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कोच्चि, मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों का प्रमुख कमेटी 'मलयालम मूवी आर्टिस्ट एसोसिएशन' (अम्मा) एक बार फिर अंदरूनी विवादों के कारण सुर्खियों में है। संगठन में नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर चल रहा टकराव अब एक संघर्ष में बदल गया है। पूर्व अध्यक्ष श्वेता मेनन ने नई बनाई गई एड हॉक कमेटी की वैधता पर सवाल उठाया और दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में उनकी एग्जीक्यूटिव कमेटी की जिम्मेदारी संभालने की हकदार है।

पूरा मामला 21 जून को हुई एनुअल जनरल बॉडी (एजीबी) बैठक के बाद और गंभीर हो गया, जब भारी विरोध के बीच श्वेता मेनन और पूरी एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। यह कदम कमेटी के भीतर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व पर उठ रहे सवालों के बीच सामने आया था। उस समय माना गया था कि यह इस्तीफा कमेटी में एक बड़े बदलाव की शुरुआत है, लेकिन अब यह फैसला ही नए विवाद का कारण बन गया है।

इस्तीफे के बाद एजीबी ने एक 9 सदस्यीय एड हॉक समिति के गठन को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य तब तक कमेटी का संचालन करना है जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते। इस समिति की अध्यक्षता रमेश पिशारोडी को सौंपी गई, जबकि पूर्व विधायक के.बी. गणेश कुमार भी इसके सदस्य बनाए गए हैं। इस फैसले के बाद कमेटी के भीतर दो अलग-अलग खेमे बन गए, जिनमें एक पक्ष नई समिति का समर्थन कर रहा है और दूसरा इसे अवैध बता रहा है।

विवाद तब और बढ़ गया जब एड हॉक समिति ने हाल ही में कोच्चि में एक मीटिंग की। इस मीटिंग के बाद श्वेता मेनन ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत बयान जारी कर कमेटी की कार्यप्रणाली और नई समिति की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अम्मा के नियमों के अनुसार जब तक नई कार्यकारिणी का चुनाव नहीं होता, तब तक पुरानी कार्यकारिणी ही कमेटी की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालती है। ऐसे में एड हॉक समिति का गठन नियमों के खिलाफ है और इसका कोई कानूनी आधार नहीं बनता।

श्वेता मेनन ने आरोप लगाया कि कुछ सदस्य जानबूझकर कमेटी में भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं और व्यक्तिगत हितों के लिए कमेटी की दिशा बदलना चाहते हैं। उन्होंने इसे कमेटी पर नियंत्रण पाने की कोशिश करार दिया।

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि 21 जून की बैठक में 10 से 15 सदस्यों का एक समूह पहले से तैयार प्रस्ताव लेकर आया था, जिसका उद्देश्य उनकी कार्यकारिणी को हटाना था।

श्वेता मेनन ने दावा किया कि उस प्रस्ताव में लगाए गए आरोप न केवल निराधार थे, बल्कि उसे कमेटी के नियमों के अनुसार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत भी नहीं मिला। ऐसे में उस प्रस्ताव को वैध नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि अब वे चुप नहीं रहेंगी और अपने पक्ष को मजबूती से रखेंगी।


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