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‘धुरंधर: द रिवेंज’ पर सियासी संग्राम, अतीक अहमद और ISI कनेक्शन के चित्रण पर विपक्ष ने जताया विरोध

फिल्म में गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद से प्रेरित किरदार ‘अतीफ अहमद’ और उसके कथित पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंधों के चित्रण को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) ने इसे भाजपा का “प्रोपेगंडा” करार दिया है।

‘धुरंधर: द रिवेंज’ पर सियासी संग्राम, अतीक अहमद और ISI कनेक्शन के चित्रण पर विपक्ष ने जताया विरोध
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मुंबई: Dhurandhar The Revenge: 19 मार्च को रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ अब राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गई है। फिल्म में गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद से प्रेरित किरदार ‘अतीफ अहमद’ और उसके कथित पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंधों के चित्रण को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) ने इसे भाजपा का “प्रोपेगंडा” करार दिया है, जबकि भाजपा नेताओं ने फिल्म का बचाव करते हुए इसे “वास्तविकता का चित्रण” बताया है।




दर्शकों ने की सराहना


फिल्म में दिखाया गया अतीफ अहमद का किरदार यूपी के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद रहे अतीक अहमद से प्रेरित माना जा रहा है। इस किरदार को अभिनेता सलीम सिद्दीकी ने पर्दे पर निभाया है और उनकी परफॉर्मेंस को दर्शकों से काफी सराहना मिल रही है। सलीम ने अपने अभिनय के जरिए इस किरदार में ऐसी जान डाल दी है कि दर्शकों को यह वास्तविक महसूस होता है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद तारिक अनवर ने फिल्म को “देश में नफरत फैलाने का प्रयास” बताया। उनके अनुसार, फिल्म में हिंसा और एक विशेष समुदाय का चित्रण ऐसा किया गया है, जिससे सामाजिक विभाजन को बढ़ावा मिल सकता है। कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने फिल्म के फंडिंग स्रोत पर भी सवाल उठाए और कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि फिल्म को संभवतः वैचारिक संगठनों का समर्थन मिला हो सकता है। वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने फिल्म में 2016 की नोटबंदी के सकारात्मक चित्रण पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों मुसलमानों को इस तरह के नैरेटिव से अलग-थलग नहीं किया जा सकता।


नफरत फैलाने की कोशिश

समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र विधायक अबू आजमी ने फिल्म की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि इसे एक खास समुदाय को बदनाम करने के उद्देश्य से बनाया गया है। उन्होंने कहा, “यह फिल्म नफरत फैलाने के लिए बनाई गई है। अगर यह पाकिस्तान से जुड़ी कहानी है, तो इसे वहां दिखाया जाना चाहिए, भारत में क्यों?” आजमी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी के किसी भी नेता का आईएसआई से कोई संबंध नहीं हो सकता।

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि भाजपा जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए इस तरह की फिल्मों का सहारा ले रही है। वहीं, सपा सांसद राजीव राय ने कहा कि ऐसे चित्रण राजनीतिक प्रचार का हिस्सा हैं।

भाजपा का पलटवार

विपक्ष के आरोपों के बीच भाजपा नेताओं ने फिल्म का खुलकर बचाव किया है। उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि फिल्म निर्माता वही विषय चुनते हैं, जो दर्शकों को पसंद आएं। उन्होंने स्पष्ट किया, “सरकार फिल्में नहीं बनाती। यह फिल्मकारों का रचनात्मक निर्णय होता है।” बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने भी फिल्म के पक्ष में बोलते हुए कहा कि सिनेमा समाज में घटित घटनाओं को ही दिखाता है। उनके अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के जीवन से प्रेरित कहानी दिखाई जा रही है, तो इसमें गलत कुछ नहीं है।

पूर्व अधिकारी और अन्य दलों की राय

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद ने भी फिल्म का समर्थन करते हुए कहा कि यह “जमीनी हकीकत” को दर्शाती है। उनके मुताबिक, सिनेमा के माध्यम से कई बार उन पहलुओं को सामने लाया जाता है, जिन पर सार्वजनिक चर्चा कम होती है। वहीं, जद(यू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि फिल्म देखे बिना उस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने कहा कि बॉलीवुड का मुख्य उद्देश्य मनोरंजन है और इसे उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।

विवाद के केंद्र में कहानी और किरदार

फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ में अतीक अहमद से प्रेरित किरदार को ‘अतीफ अहमद’ के नाम से दिखाया गया है। कहानी में उसके कथित अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आपराधिक नेटवर्क को दर्शाया गया है, जिसने इस विवाद को जन्म दिया है। गौरतलब है कि वास्तविक जीवन में अतीक अहमद की पुलिस हिरासत के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद वह पहले ही एक चर्चित और विवादास्पद व्यक्तित्व बन चुके थे। ‘धुरंधर: द रिवेंज’ पर उठा यह विवाद एक बार फिर यह दिखाता है कि सिनेमा और राजनीति के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो सकती है। जहां एक ओर विपक्ष इसे सामाजिक विभाजन और राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा मान रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और यथार्थ का चित्रण बता रहा है।


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