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The Kerala Story 2 Trailer: द केरल स्टोरी-2’ पर कानूनी और राजनीतिक घमासान: हाई कोर्ट का नोटिस, सियासी बयानबाज़ी तेज

कामाख्या नारायण सिंह द्वारा निर्देशित ‘केरल स्टोरी 2: गोज बियांड’ हाल ही में अपने टीजर के कारण चर्चा में आई है। फिल्म की कहानी तीन अलग-अलग राज्यों की तीन हिंदू महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने परिवारों की इच्छा के विरुद्ध मुस्लिम पुरुषों से विवाह करती हैं और बाद में कथित रूप से जबरन मतांतरण का सामना करती हैं।

The Kerala Story 2 Trailer: द केरल स्टोरी-2’ पर कानूनी और राजनीतिक घमासान: हाई कोर्ट का नोटिस, सियासी बयानबाज़ी तेज
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कोच्‍चि/नई दिल्‍ली। फिल्म ‘द केरल स्टोरी-2: गोज बियांड’ को लेकर केरल में कानूनी और राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। केरल हाई कोर्ट ने फिल्म के निर्माताओं, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) और केंद्र सरकार को एक याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में फिल्म के प्रमाणन को रद्द करने, शीर्षक पर पुनर्विचार करने और अंतिम निर्णय तक रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को निर्धारित की गई है। इस बीच राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नेताओं के बयान और विरोध-समर्थन ने विवाद को और तीखा बना दिया है।

याचिका में क्या है आपत्ति?

यह याचिका कन्नूर जिले के कन्नावम निवासी श्रीदेव नंबूदिरी ने दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म को सीबीएफसी द्वारा सिनेमा अधिनियम, 1952 के तहत आवश्यक कानूनी प्रावधानों का पूर्ण पालन किए बिना प्रमाणित किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि फिल्म के टीजर और ट्रेलर में अलग-अलग राज्यों की महिलाओं से जुड़ी कथाएं दिखाई गई हैं, लेकिन इसे ‘द केरल स्टोरी’ शीर्षक के तहत प्रस्तुत किया गया है। उनके अनुसार, इससे आतंकवाद, जबरन मतांतरण और जनसांख्यिकीय साजिशों जैसे गंभीर आरोपों को केवल केरल से जोड़ने का संदेश जाता है, जो राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि ऐसा चित्रण केरल की जनता को कलंकित करने वाला है और इससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। अदालत से मांग की गई है कि सीबीएफसी द्वारा दिए गए प्रमाणन को रद्द किया जाए, फिल्म के शीर्षक पर पुनर्विचार का आदेश दिया जाए, अंतिम निर्णय तक फिल्म की रिलीज निलंबित की जाए, आवश्यक संशोधन कर सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए जाएं

हाई कोर्ट की कार्रवाई

जस्टिस बेचु कुरियन थामस की पीठ ने गुरुवार को याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। इसमें फिल्म के निर्माता, सीबीएफसी और केंद्र सरकार शामिल हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी तय की है। फिलहाल अदालत ने रिलीज पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है, लेकिन याचिका में उठाए गए बिंदुओं पर विस्तृत सुनवाई होने की संभावना है।

फिल्म की विषयवस्तु क्या है?

कामाख्या नारायण सिंह द्वारा निर्देशित ‘केरल स्टोरी 2: गोज बियांड’ हाल ही में अपने टीजर के कारण चर्चा में आई है। फिल्म की कहानी तीन अलग-अलग राज्यों की तीन हिंदू महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने परिवारों की इच्छा के विरुद्ध मुस्लिम पुरुषों से विवाह करती हैं और बाद में कथित रूप से जबरन मतांतरण का सामना करती हैं। फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह का कहना है कि यह फिल्म वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है और इसका उद्देश्य “सच्चाई” को सामने लाना है। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि फिल्म की प्रस्तुति सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकती है और इसे राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील समय में रिलीज किया जा रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: समर्थन और विरोध


गिरिराज सिंह का समर्थन

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने फिल्म का समर्थन करते हुए कहा कि यह “सच्चाई दिखा रही है” और फिल्म निर्माताओं को इसे देश के सामने प्रस्तुत करने का पूरा अधिकार है। उनके अनुसार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।

शशि थरूर की आलोचना पर प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा फिल्म की आलोचना किए जाने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में विपक्ष के नेता सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि यदि फिल्म तथ्यों को दिखा रही है, तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इस बयान से स्पष्ट है कि फिल्म को लेकर राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज हो चुका है।

मुख्यमंत्री विजयन पर भाजपा का हमला

फिल्म को लेकर केरल की सियासत भी गर्म है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री पी. विजयन पर “दोहरी नीति” अपनाने का आरोप लगाया। चंद्रशेखर ने कहा कि यदि कोई संगठन या व्यक्ति विवादित कार्यक्रम आयोजित करता है तो उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताया जाता है, लेकिन जब ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दे पर फिल्म बनाई जाती है तो उसे “नफरत फैलाने वाला” कहा जाता है। उन्होंने मलप्पुरम में 2023 में आयोजित एक फलस्तीन समर्थक कार्यक्रम का हवाला देते हुए कहा कि यदि उस तरह की अभिव्यक्ति को अनुमति मिल सकती है, तो फिल्म निर्माताओं को भी समान अधिकार मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री विजयन की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री पी. विजयन ने फिल्म के सीक्वल की प्रस्तावित रिलीज को “अत्यंत गंभीर” विषय बताया है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक कलह भड़काने के उद्देश्य से गढ़ी गई कहानियों को खुली छूट नहीं मिलनी चाहिए। विजयन ने सोशल मीडिया पोस्ट में भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की फिल्मों से समाज में विभाजन बढ़ सकता है। इससे पहले भी उन्होंने फिल्म की रिलीज को लेकर आशंका जताई थी।

छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया

तिरुअनंतपुरम में कांग्रेस सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की छात्र शाखा मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (एमएसएफ) ने फिल्म के बहिष्कार का आह्वान किया है। हालांकि, एमएसएफ ने स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) द्वारा आयोजित ‘बीफ फेस्ट’ पर भी सवाल उठाए। एमएसएफ के राज्य महासचिव सीके नजफ ने कहा कि इस तरह के आयोजन से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। इससे स्पष्ट है कि विवाद केवल फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी प्रतिक्रियाओं और विरोध के तरीकों पर भी बहस छिड़ी हुई है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम सामाजिक सद्भाव

‘द केरल स्टोरी-2’ का विवाद एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव के बीच संतुलन के प्रश्न को केंद्र में ले आया है। एक पक्ष इसे तथ्य आधारित प्रस्तुति और अभिव्यक्ति के अधिकार का मामला बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे संभावित रूप से विभाजनकारी और भड़काऊ मान रहा है। अब सबकी नजरें 24 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। हाई कोर्ट के रुख से यह तय होगा कि फिल्म की रिलीज पर कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं, और क्या इसके शीर्षक या सामग्री में बदलाव की जरूरत समझी जाएगी। फिलहाल, ‘द केरल स्टोरी-2: गोज बियांड’ सिनेमा से आगे बढ़कर कानूनी और राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुकी है।


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