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कुणाल गांजावाला ने सुनाया ‘ओ हमदम’ की रिकॉर्डिंग का किस्सा, गुलजार की तारीफ ने बढ़ाया था आत्मविश्वास

कुणाल ने इस पुराने किस्से को याद करते हुए बताया कि ‘साथिया’ के गाने की रिकॉर्डिंग के लिए उन्हें चेन्नई जाना था। उस समय वह फिल्म ‘आवारा पागल दीवाना’ की रिकॉर्डिंग में व्यस्त थे। निर्देशक शाद अली खुद उन्हें टिकट देने पहुंचे थे।

कुणाल गांजावाला ने सुनाया ‘ओ हमदम’ की रिकॉर्डिंग का किस्सा, गुलजार की तारीफ ने बढ़ाया था आत्मविश्वास
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मुंबई: गायकी की दुनिया में कुछ मौके ऐसे होते हैं, जो कलाकार के पूरे करियर की यादगार पूंजी बन जाते हैं। गायक कुणाल गांजावाला के लिए फिल्म ‘साथिया’ का गीत ‘ओ हमदम सुनियो रे’ ऐसा ही अनुभव रहा। साल 2002 में रिलीज हुई इस फिल्म के लिए गाना रिकॉर्ड करते समय कुणाल को न सिर्फ एआर रहमान के संगीत का हिस्सा बनने का मौका मिला, बल्कि उनके पसंदीदा गीतकार और लेखक गुलजार से मिली तारीफ ने उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाया।

जब रिकॉर्डिंग के लिए चेन्नई पहुंचे कुणाल

कुणाल ने इस पुराने किस्से को याद करते हुए बताया कि ‘साथिया’ के गाने की रिकॉर्डिंग के लिए उन्हें चेन्नई जाना था। उस समय वह फिल्म ‘आवारा पागल दीवाना’ की रिकॉर्डिंग में व्यस्त थे। निर्देशक शाद अली खुद उन्हें टिकट देने पहुंचे थे। कुणाल के मुताबिक, उन्हें उस समय इतना ही पता था कि फिल्म का निर्देशन शाद अली कर रहे हैं और संगीत एआर रहमान का है। चेन्नई पहुंचकर जब वह होटल पहुंचे तो वहां उनकी मुलाकात अचानक गुलजार से हो गई।

होटल में गुलजार को देखकर चौंक गए

कुणाल ने बताया कि गुलजार उस समय सफेद कुर्ता-पायजामा और मोजड़ी पहने उनकी तरफ आते दिखाई दिए। गुलजार ने उन्हें देखते ही मजाकिया अंदाज में कहा, “बदमाश, तुम यहां पर भी।” दरअसल, कुणाल की गुलजार से मुलाकात कुछ दिन पहले ही फिल्म ‘अशोका’ की रिकॉर्डिंग के दौरान हुई थी। उस मुलाकात में कुणाल ने गुलजार से आरडी बर्मन यानी पंचम दा के बारे में कई सवाल पूछे थे। इन सवालों ने गुलजार को भावुक कर दिया था। कुणाल ने उस बातचीत के लिए उनसे माफी मांगी और फिर दोनों रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंचे।

‘वाह मेरे शेर’ सुनकर बढ़ा हौसला

रिकॉर्डिंग के दौरान जैसे ही कुणाल ने ‘ओ हमदम सुनियो रे’ गाना शुरू किया, गुलजार ने माइक पर उनकी तारीफ की। कुणाल के मुताबिक, गुलजार ने उन्हें उत्साहित करते हुए कहा, “वाह मेरे शेर, क्या गा रहे हो।” कुणाल के लिए यह बेहद खास पल था। जिस शख्स से वह प्रेरित होते थे, वही उनके सामने खड़े होकर उनका हौसला बढ़ा रहा था। उन्होंने बताया कि इस तारीफ से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया और करीब आधे घंटे में गाने की रिकॉर्डिंग पूरी हो गई।

सीए या अभिनेता बनना चाहते थे

मुंबई में जन्मे कुणाल गांजावाला का बचपन से ही संगीत से गहरा जुड़ाव रहा। हालांकि, शुरुआती दिनों में उन्होंने गायकी को ही अपना करियर बनाने का फैसला नहीं किया था। वह चार्टर्ड अकाउंटेंट या अभिनेता बनने के बारे में सोचते थे। उनके माता-पिता ने उनकी आवाज में छिपी प्रतिभा को पहचाना और संगीत की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। कुणाल ने अपने करियर की शुरुआत विज्ञापनों के जिंगल्स से की। इसके बाद उन्हें फिल्मों में गाने का मौका मिलने लगा।

‘भीगे होंठ तेरे’ ने बदल दी पहचान

कुणाल गांजावाला को बड़ी पहचान फिल्म ‘मर्डर’ के गीत ‘भीगे होंठ तेरे’ से मिली। इस गाने की सफलता ने उन्हें बॉलीवुड के चर्चित प्लेबैक सिंगर्स की कतार में ला खड़ा किया। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों के लिए अपनी आवाज दी। ‘सांवरिया’ के ‘परी’ और ‘जान-ए-जान’, ‘गुजारिश’ के ‘सौ ग्राम जिंदगी’ और ‘माई फ्रेंड पिंटो’ के गीतों में भी उनकी गायकी सुनने को मिली।

बेटे के जन्म के बाद लिया ब्रेक

कुणाल ने साल 2015 में अपने बेटे के जन्म के समय गायकी से ब्रेक लेने का फैसला किया। उस वक्त उनका करियर सक्रिय दौर में था, लेकिन बेटे के साथ बिताया समय उन्हें इतना पसंद आया कि ब्रेक लंबा होता चला गया। इसके बाद कोविड महामारी का दौर भी आया। इस दौरान वह अपने बेटे के साथ काफी समय बिताने लगे और दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। हालांकि, इस बीच उन्होंने कुछ फिल्मों के लिए गाने रिकॉर्ड किए, लेकिन धीरे-धीरे फिल्मों में उनके गानों की संख्या कम होती गई।

कई भारतीय भाषाओं में भी दी आवाज

कुणाल ने सिर्फ हिंदी फिल्मों के लिए ही नहीं, बल्कि बंगाली, उड़िया, कन्नड़ और मराठी में भी गाने गाए हैं। अलग-अलग भाषाओं में उनके काम को श्रोताओं की सराहना मिली। उनकी हालिया फिल्मी गायकी में 2021 में आई ‘ओए मामू’ का नाम लिया जाता है। इसके अलावा अजय देवगन की पुरानी फिल्म ‘नाम’ भी लंबे समय बाद 2024 में रिलीज हुई थी, जिसमें कुणाल की आवाज सुनाई दी। फिल्मों में सक्रियता भले पहले जैसी नहीं रही हो, लेकिन कुणाल गांजावाला अब भी सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रशंसकों से जुड़े रहते हैं। ‘ओ हमदम सुनियो रे’ और ‘भीगे होंठ तेरे’ जैसे गीत उनकी आवाज को हिंदी फिल्म संगीत के एक खास दौर की यादों से जोड़ते हैं।


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