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‘जय हो’ विवाद फिर चर्चा में: वायरल वीडियो पर राम गोपाल वर्मा की सफाई, एआर रहमान को बताया महान संगीतकार

विवाद गहराने के बाद राम गोपाल वर्मा ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट साझा कर अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्हें गलत तरीके से कोट किया जा रहा है और उनके बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया है।

‘जय हो’ विवाद फिर चर्चा में: वायरल वीडियो पर राम गोपाल वर्मा की सफाई, एआर रहमान को बताया महान संगीतकार
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मुंबई। इंटरनेट मीडिया के इस दौर में किसी भी नए विवाद के साथ पुराने किस्से और बयान तेजी से सतह पर आ जाते हैं। हाल ही में संगीतकार एआर रहमान के एक बयान ने इसी तरह की बहस को जन्म दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि इंडस्ट्री में कथित सांप्रदायिक पक्षपात के कारण उन्हें काम मिलने में दिक्कतें आई हैं। इस बयान के बाद अब फिल्मकार राम गोपाल वर्मा (आरजीवी) का एक पुराना इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने एक बार फिर ऑस्कर विजेता गीत ‘जय हो’ को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।

वायरल वीडियो में आरजीवी यह कहते नजर आते हैं कि हॉलीवुड फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर का मशहूर गीत ‘जय हो’ एआर रहमान ने नहीं, बल्कि गायक सुखविंदर सिंह ने कंपोज किया था। वीडियो के वायरल होते ही इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। विवाद बढ़ता देख आरजीवी को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी।

आरजीवी ने दी सफाई


विवाद गहराने के बाद राम गोपाल वर्मा ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट साझा कर अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्हें गलत तरीके से कोट किया जा रहा है और उनके बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया है। आरजीवी ने लिखा, “सभी संबंधित लोगों के लिए… ‘जय हो’ गाने के मामले में मुझे गलत तरीके से कोट किया जा रहा है। मेरे बयान को संदर्भ से काटकर पढ़ा जा रहा है। मेरी नजरों में एआर रहमान अब तक के सबसे महान संगीतकार हैं और सबसे अच्छे इंसान भी, जिनसे मैं मिला हूं। वह आखिरी व्यक्ति होंगे जो किसी और का श्रेय लेंगे। मुझे उम्मीद है कि इस मुद्दे को लेकर फैली नकारात्मकता अब खत्म हो जाएगी।” इस पोस्ट के बाद कुछ हद तक विवाद की तीव्रता कम जरूर हुई, लेकिन सोशल मीडिया पर बहस जारी रही।





क्या था वायरल इंटरव्यू का पूरा संदर्भ?

दरअसल, वायरल हो रहे इंटरव्यू में आरजीवी ने फिल्म ‘युवराज’ के सेट से जुड़ा एक पुराना किस्सा सुनाया था, जिसमें एआर रहमान और मशहूर फिल्मकार सुभाष घई का जिक्र था। आरजीवी के मुताबिक, एक दिन रहमान सेट पर पहुंचे थे, जहां उन्होंने गायक सुखविंदर सिंह द्वारा कंपोज और गाया गया एक गाना सुना।

आरजीवी ने बताया कि रहमान ने सुभाष घई से पूछा था कि क्या उन्हें यह गाना पसंद आया। इस पर सुभाष घई कथित तौर पर नाराज हो गए और उन्होंने रहमान को उनकी भारी-भरकम फीस की याद दिलाई। घई का कहना था कि जब वह रहमान को इतना भुगतान कर रहे हैं, तो संगीत की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होनी चाहिए।

रहमान का जवाब और आगे की कहानी

आरजीवी के अनुसार, इस पर एआर रहमान ने सुभाष घई से कहा था कि वह उन्हें सिर्फ काम के लिए नहीं, बल्कि उनके नाम और ब्रांड वैल्यू के लिए भी पैसे दे रहे हैं। इसके बाद रहमान ने सुखविंदर सिंह से उस गाने की पूरी रिकॉर्डिंग ईमेल करने को कहा। आरजीवी ने आगे दावा किया कि करीब एक साल बाद एआर रहमान के मैनेजर ने सुखविंदर सिंह को पांच लाख रुपये का चेक भेजा और बताया कि रहमान ने वह गाना किसी और प्रोजेक्ट को बेच दिया है। आरजीवी के मुताबिक, वही गाना बाद में स्लमडॉग मिलियनेयर में ‘जय हो’ के रूप में इस्तेमाल हुआ।

इसी हिस्से को लेकर यह धारणा बनी कि शायद ‘जय हो’ का कंपोजिशन सुखविंदर सिंह ने किया था, जबकि रहमान को इसका श्रेय मिला।

‘जय हो’ की ऐतिहासिक सफलता


गौरतलब है कि स्लमडॉग मिलियनेयर का ‘जय हो’ गीत न केवल दुनियाभर में लोकप्रिय हुआ, बल्कि इसने ऑस्कर अवॉर्ड भी जीता। यह एआर रहमान के करियर का एक ऐतिहासिक पल माना जाता है। इस गीत के लिए रहमान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त पहचान मिली और भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाई मिली।

सुखविंदर सिंह पहले ही कर चुके हैं दावा खारिज


इस पूरे विवाद के बीच यह तथ्य भी अहम है कि गायक सुखविंदर सिंह खुद इस दावे को पहले ही खारिज कर चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में दिए एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा था कि ‘जय हो’ गीत उन्होंने कंपोज नहीं किया था।

सुखविंदर ने कहा था, मैंने ‘जय हो’ को सिर्फ आवाज दी है। इसका कंपोजिशन पूरी तरह से एआर रहमान का है। इस गाने को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए। उनके इस बयान के बावजूद वायरल वीडियो के कारण विवाद ने दोबारा जोर पकड़ लिया।

रहमान के हालिया बयान से जुड़ा विवाद

इस पूरे घटनाक्रम को एआर रहमान के हालिया बयान से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इंडस्ट्री में उन्हें कथित सांप्रदायिक पक्षपात का सामना करना पड़ा है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनके पुराने काम, उपलब्धियों और विवादों को खंगाला जाने लगा, और उसी क्रम में आरजीवी का यह पुराना इंटरव्यू भी फिर से सामने आ गया।

सोशल मीडिया और अधूरे संदर्भों की समस्या


यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया के दौर में पुराने बयानों को संदर्भ से अलग कर पेश करना कितना बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है। राम गोपाल वर्मा की सफाई और सुखविंदर सिंह के पुराने बयान के बाद यह साफ है कि ‘जय हो’ के कंपोजर को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, उसका वास्तविक तथ्यों से कोई मेल नहीं है। एआर रहमान की प्रतिष्ठा, उनकी वैश्विक पहचान और ‘जय हो’ जैसी रचनाएं आज भी उनकी संगीत प्रतिभा का प्रमाण मानी जाती हैं। वहीं, यह विवाद इंटरनेट मीडिया की उस प्रवृत्ति को भी उजागर करता है, जहां अधूरी जानकारी तेजी से सुर्खियों में बदल जाती है।


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