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‘दोस्त की बेइज्जती बर्दाश्त नहीं हुई’: अक्षय कुमार ने सुनाया पुराना किस्सा, कहा-आज होता तो चला जाता
रियलिटी गेम शो ‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’ के सेट पर अक्षय कुमार ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया, जब वह अपने दोस्त की बेइज्जती सहन नहीं कर पाए और गुस्से में एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया था।

मुंबई। हिंदी सिनेमा के ‘खिलाड़ी’ कहे जाने वाले अभिनेता अक्षय कुमार अपनी फिटनेस, अनुशासन और साफ-सुथरी छवि के लिए जाने जाते हैं। लेकिन हाल ही में उन्होंने एक ऐसा किस्सा साझा किया, जिसने उनके व्यक्तित्व के एक अलग और भावुक पक्ष को सामने ला दिया। रियलिटी गेम शो ‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’ के सेट पर अक्षय कुमार ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया, जब वह अपने दोस्त की बेइज्जती सहन नहीं कर पाए और गुस्से में एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया था। आज उस घटना को याद करते हुए अक्षय ने इसे अपनी बड़ी गलती बताया और कहा कि अब वह ऐसी स्थिति में अलग तरीके से प्रतिक्रिया देंगे।
शो में ‘रैपिड फायर’ के दौरान खुलासा
इस खास एपिसोड में ‘शार्क टैंक इंडिया’ के चर्चित शार्क अमन गुप्ता, अनुपम मित्तल और नमिता थापर मेहमान के रूप में पहुंचे थे। शो के दौरान जब रैपिड फायर राउंड शुरू हुआ, तो अमन गुप्ता ने अक्षय से उनकी जिंदगी के किसी ऐसे पल के बारे में पूछा, जब उन्हें गहरी बेइज्जती महसूस हुई हो। सवाल सुनकर अक्षय कुछ पल के लिए ठहर गए, फिर उन्होंने वर्षों पुरानी एक घटना साझा की, जिसे वह लंबे समय तक सार्वजनिक तौर पर नहीं बता पाए थे।
पार्टी में हुई बहस और बढ़ता तनाव
अक्षय ने बताया कि यह घटना कई साल पहले की है। वह अपने एक करीबी दोस्त के साथ एक पार्टी में गए थे। वहां माहौल सामान्य था, लेकिन अचानक उनके दोस्त की किसी व्यक्ति के साथ बहस शुरू हो गई। बहस इतनी बढ़ गई कि सामने वाला व्यक्ति बार-बार उनके दोस्त को गालियां देने लगा। लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं रुका। अक्षय के मुताबिक, “जब सामने कोई आपके दोस्त की बार-बार बेइज्जती कर रहा हो, तो वह आपको अपनी बेइज्जती लगती है।” यही भावना उस समय उन पर हावी हो गई।
गुस्से में उठाया हाथ
अक्षय ने बताया कि जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और वह व्यक्ति लगातार अपशब्द कहता रहा, तो उनसे रहा नहीं गया। अक्षय ने कहा कि जब और बेइज्जती सहन नहीं हुई, तो मैंने उसे जोर का थप्पड़ मार दिया। हालांकि, बात यहीं खत्म नहीं हुई। दुर्भाग्य से वह व्यक्ति थप्पड़ लगते ही जमीन पर गिर पड़ा और कुछ समय के लिए बेहोश हो गया। यह दृश्य देखकर पार्टी में मौजूद लोग घबरा गए। माहौल अचानक गंभीर हो गया।
करियर खत्म होने का डर
अक्षय ने बताया कि उस पल उन्हें भी डर लगने लगा। उन्होंने कहा कि “एक पल के लिए मुझे लगा कि अब मेरा करियर खत्म हो गया। उनका दोस्त, जिसकी वजह से यह झगड़ा शुरू हुआ था, यह सब देखकर रोने लगा। उसके लिए यह स्थिति बेहद शर्मनाक और भावनात्मक थी। कुछ देर बाद उस व्यक्ति पर पानी डाला गया और उसे होश आ गया। तब जाकर सबकी जान में जान आई। हालांकि, यह घटना अक्षय के मन में लंबे समय तक बनी रही।
आज मानते हैं इसे गलती
समय बीतने के साथ अक्षय ने इस घटना पर दोबारा विचार किया। अब वह इसे अपनी बड़ी गलती मानते हैं। उन्होंने कहा, “अगर आज वैसा कुछ होता, तो मेरी प्रतिक्रिया पहले जैसी नहीं होती। वह कुछ ऐसा है, जिसे अगर मैं बदल सकता, तो मैं बदलना चाहता हूं। आज मैं बस वहां से चला जाता।” यह बयान उनके आत्ममंथन और परिपक्वता को दर्शाता है।
भावनाओं पर नियंत्रण की सीख
अक्षय कुमार अक्सर अनुशासन और संतुलन की बात करते हैं। उनके अनुसार, जीवन में संयम और धैर्य बेहद जरूरी हैं। यह घटना भले ही पुरानी हो, लेकिन उससे मिली सीख आज भी उनके व्यक्तित्व का हिस्सा है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि गुस्से में लिया गया फैसला अक्सर पछतावे का कारण बन सकता है। उनका यह अनुभव दर्शकों के लिए भी एक संदेश है कि भावनात्मक क्षणों में खुद पर नियंत्रण रखना कितना जरूरी है।
दोस्ती और जिम्मेदारी
अक्षय के इस किस्से से यह भी स्पष्ट होता है कि वह दोस्ती को कितनी गंभीरता से लेते हैं। अपने करीबी लोगों के सम्मान को लेकर वह संवेदनशील हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी की रक्षा करने का सही तरीका हिंसा नहीं हो सकता। समय के साथ उन्होंने सीखा कि कभी-कभी वहां से हट जाना ही सबसे समझदारी भरा कदम होता है।
फैंस ने सराहा ईमानदारी भरा स्वीकार
शो में इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने अक्षय की ईमानदारी की तारीफ की। कई लोगों ने कहा कि सार्वजनिक मंच पर अपनी गलती स्वीकार करना साहस का काम है। अक्षय कुमार का यह अनुभव न सिर्फ उनके अतीत की एक झलक देता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि समय के साथ इंसान सीखता और बदलता है।
भावनाओं, दोस्ती, गुस्से और आत्ममंथन की कहानी
अक्षय कुमार की यह कहानी केवल एक थप्पड़ या एक पार्टी की घटना तक सीमित नहीं है। यह भावनाओं, दोस्ती, गुस्से और आत्ममंथन की कहानी है। जहां एक समय उन्हें लगा था कि एक क्षणिक आवेश उनका करियर खत्म कर सकता है, वहीं आज वह उसी घटना को सीख के रूप में देखते हैं। उनके शब्दों में, “आज मैं बस वहां से चला जाता।” यह स्वीकारोक्ति दर्शाती है कि सच्ची ताकत सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और परिपक्वता में भी होती है।
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