Top
Begin typing your search above and press return to search.

रितिक रोशन ने भारतीय सिनेमा की स्टारडम संस्कृति पर उठाए सवाल, बोले- असली कला को समझना जरूरी

प्रतिम की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए रितिक रोशन ने लिखा कि यह बात बिल्कुल सही है कि सिनेमा स्टारडम से बड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत में सिनेमा को लेकर लोगों की समझ अभी भी काफी सतही है।

रितिक रोशन ने भारतीय सिनेमा की स्टारडम संस्कृति पर उठाए सवाल, बोले- असली कला को समझना जरूरी
X

मुंबई: भारतीय सिनेमा में स्टारडम और फिल्मों की वास्तविक कला को लेकर बहस लंबे समय से चलती रही है। अक्सर किसी फिल्म की चर्चा उसके निर्देशक, लेखक, तकनीशियन या कहानी से ज्यादा उसमें काम करने वाले सितारों के इर्द-गिर्द केंद्रित हो जाती है। अब इस बहस में अभिनेता रितिक रोशन भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय दर्शकों की सिनेमा को समझने की प्रक्रिया अब भी काफी सतही है। रितिक की यह टिप्पणी पटकथा लेखक और निर्देशक प्रतिम डी गुप्ता के एक सोशल मीडिया पोस्ट पर आई। प्रतिम ने इंस्टाग्राम पर ‘सिनेमा स्टारडम से बड़ा है’ विषय को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी थी। इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए रितिक ने सिनेमा में स्टारडम के मुकाबले फिल्म निर्माण की कला और प्रक्रिया को अधिक महत्व देने की जरूरत बताई।

मणिरत्नम के उदाहरण से शुरू हुई बहस

प्रतिम डी गुप्ता ने अपनी पोस्ट में फिल्मकार मणिरत्नम का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि मणिरत्नम इन दिनों कोलकाता में अपनी अगली तमिल फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं। फिल्म से जुड़े कलाकारों साई पल्लवी और विजय सेतुपति को लेकर चर्चा अधिक दिखाई देती है, जबकि फिल्म के निर्देशक मणिरत्नम और उनके रचनात्मक योगदान पर अपेक्षाकृत कम बात होती है। प्रतिम ने इसी उदाहरण के जरिए यह सवाल उठाया कि क्या फिल्मों को केवल सितारों के नजरिए से देखना सिनेमा की पूरी तस्वीर पेश करता है। उनके मुताबिक फिल्म एक सामूहिक कला है, जिसमें निर्देशक, लेखक, सिनेमैटोग्राफर, एडिटर, संगीतकार और कई अन्य लोगों की भूमिका होती है।

रितिक ने कहा- सिनेमा को समझने की जरूरत

प्रतिम की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए रितिक रोशन ने लिखा कि यह बात बिल्कुल सही है कि सिनेमा स्टारडम से बड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत में सिनेमा को लेकर लोगों की समझ अभी भी काफी सतही है। रितिक के मुताबिक दर्शक कई बार स्क्रीन पर दिखाई देने वाले स्टार और उसके किरदार के बीच अंतर नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में लोगों को इस तरह से नहीं पाला गया कि वे फिल्म के पीछे मौजूद वास्तविक कला और रचनात्मक प्रक्रिया को समझ सकें। अभिनेता ने उम्मीद जताई कि सिनेमा के इस पहलू पर आगे ज्यादा चर्चा होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि लोगों को फिल्म निर्माण के उन दूसरे महत्वपूर्ण हिस्सों में भी रुचि लेनी चाहिए, जो किसी फिल्म को आकार देने में अहम भूमिका निभाते हैं।

स्टार से आगे फिल्म की पूरी टीम पर नजर

रितिक की टिप्पणी ने एक बार फिर इस सवाल को सामने ला दिया है कि किसी फिल्म की सफलता और लोकप्रियता को केवल उसके कलाकारों के आधार पर देखना कितना सही है। एक फिल्म तैयार करने में कलाकारों के अलावा निर्देशक, लेखक, तकनीकी विशेषज्ञों और कई अन्य पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्टार की लोकप्रियता फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है, लेकिन कहानी, निर्देशन, सिनेमैटोग्राफी, संगीत और संपादन जैसे पहलू फिल्म के अंतिम रूप को तय करते हैं। ऐसे में रितिक की टिप्पणी को भारतीय सिनेमा में स्टारडम और कला के बीच संतुलन को लेकर चल रही बहस से जोड़कर देखा जा रहा है।

‘कृष 4’ से निर्देशन की नई पारी

रितिक रोशन खुद भी अब फिल्म निर्माण के दूसरे महत्वपूर्ण पक्ष से जुड़ने जा रहे हैं। वह ‘कृष 4’ के जरिए निर्देशन की दुनिया में कदम रखने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में सिनेमा की कला और फिल्म निर्माण को लेकर उनकी यह टिप्पणी खास महत्व रखती है। अभिनेता के लिए यह प्रोजेक्ट केवल अभिनय तक सीमित नहीं होगा, बल्कि निर्देशन की जिम्मेदारी भी उनके हिस्से में आएगी। ऐसे में आने वाले समय में दर्शकों को रितिक के उस रचनात्मक पक्ष को देखने का मौका मिलेगा, जिसका जिक्र उन्होंने अपनी हालिया सोशल मीडिया टिप्पणी में किया है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it