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ऑडिशन देने से दीपिका पादुकोण ने किया मना, हाथ से निकला अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट

‘द व्हाइट लोटस’ एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय और समीक्षकों द्वारा सराही गई सीरीज है। इसके निर्माताओं की कास्टिंग प्रक्रिया बेहद सख्त मानी जाती है। शो से जुड़े सूत्रों का कहना है कि किसी भी कलाकार को साइन करने से पहले ऑडिशन देना अनिवार्य होता है, चाहे वह कलाकार कितना ही बड़ा नाम क्यों न हो।

ऑडिशन देने से दीपिका पादुकोण ने किया मना, हाथ से निकला अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट
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मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) इन दिनों अपने काम को लेकर सुर्खियों में हैं। पैन इंडिया फिल्मों ‘स्पिरिट’ और ‘कल्कि 2898 एडी’ के दूसरे भाग से दूरी बनाने के बाद अब खबर है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित वेब सीरीज ‘द व्हाइट लोटस’ (The White Lotus) के चौथे सीजन का हिस्सा भी वह नहीं बन सकीं। सूत्रों के मुताबिक, इस बार वजह कास्टिंग और ऑडिशन प्रक्रिया को लेकर मतभेद रही।

मनोरंजन जगत में यह चर्चा है कि दीपिका ने अपनी पेशेवर शर्तों से समझौता न करते हुए इस प्रोजेक्ट को छोड़ने का फैसला किया। हालांकि आधिकारिक तौर पर दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी जा रही है कि ऑडिशन प्रक्रिया पर असहमति के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।

निर्माता अपने नियमों पर अडिग

‘द व्हाइट लोटस’ एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय और समीक्षकों द्वारा सराही गई सीरीज है। इसके निर्माताओं की कास्टिंग प्रक्रिया बेहद सख्त मानी जाती है। शो से जुड़े सूत्रों का कहना है कि किसी भी कलाकार को साइन करने से पहले ऑडिशन देना अनिवार्य होता है, चाहे वह कलाकार कितना ही बड़ा नाम क्यों न हो।

बताया जा रहा है कि दीपिका पादुकोण ऑडिशन देने के पक्ष में नहीं थीं। उनका मानना था कि उनके अनुभव और वैश्विक पहचान को देखते हुए सीधे कास्टिंग पर विचार किया जाना चाहिए। वहीं, शो के निर्माता अपनी तय प्रक्रिया से हटने को तैयार नहीं थे। सूत्रों के अनुसार, निर्माताओं ने यह स्पष्ट किया था कि वे किसी भी कलाकार के लिए ऑडिशन नियम में ढील नहीं देंगे। इसी कारण दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई और दीपिका इस प्रोजेक्ट से बाहर हो गईं।

कितनी आगे बढ़ी थी बातचीत?

अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि दीपिका और ‘द व्हाइट लोटस’ की टीम के बीच बातचीत किस स्तर तक पहुंची थी। कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि प्रारंभिक चर्चा सकारात्मक थी, लेकिन जैसे ही औपचारिक प्रक्रिया और ऑडिशन की शर्त सामने आई, मतभेद उभर आए। यह भी कहा जा रहा है कि शो के निर्माता किसी भी कलाकार की वैश्विक पहचान या स्टारडम से प्रभावित हुए बिना अपनी कास्टिंग प्रणाली को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में बातचीत ठहर गई और दीपिका ने खुद को इस परियोजना से अलग कर लिया।

पहले भी शर्तों को लेकर लिया बड़ा फैसला

यह पहली बार नहीं है जब दीपिका ने अपने पेशेवर मानकों के आधार पर किसी बड़े प्रोजेक्ट से दूरी बनाई हो। इससे पहले उन्होंने निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ से किनारा कर लिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, दीपिका ने आठ घंटे की शिफ्ट की मांग रखी थी, जिसे प्रोडक्शन टीम पूरा नहीं कर सकी। इसके बाद उन्होंने फिल्म छोड़ने का निर्णय लिया। इसी के बाद खबर आई कि ‘कल्कि 2898 एडी’ के दूसरे पार्ट को लेकर भी कुछ कमिटमेंट संबंधी मुद्दों के चलते निर्माताओं ने उनसे दूरी बना ली। हालांकि इन मामलों पर भी आधिकारिक बयान सीमित रहे, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में यह चर्चा का विषय बना रहा कि दीपिका अपने काम को लेकर स्पष्ट और सख्त रुख अपनाए हुए हैं।

‘अपनी शर्तों’ की रणनीति

दीपिका पादुकोण लंबे समय से हिंदी सिनेमा की शीर्ष अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। ‘पद्मावत’, ‘पिकू’, ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ और ‘पठान’ जैसी फिल्मों से उन्होंने बॉक्स ऑफिस और समीक्षकों दोनों का विश्वास हासिल किया है। हाल के वर्षों में वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सक्रिय रही हैं और वैश्विक ब्रांड्स से जुड़ी हैं। ऐसे में उनके करियर का यह चरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां वह प्रोजेक्ट्स चुनने में अधिक सतर्क और चयनात्मक नजर आ रही हैं। फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष स्तर पर पहुंचने के बाद कई कलाकार अपने काम के घंटे, स्क्रिप्ट की प्रकृति और अनुबंध की शर्तों को लेकर अधिक स्पष्ट रुख अपनाते हैं। हालांकि, यह रणनीति कभी-कभी बड़े अवसरों से दूरी का कारण भी बन सकती है।

‘द व्हाइट लोटस’ की लोकप्रियता और संभावित प्रभाव

‘द व्हाइट लोटस’ एक बहुचर्चित अंतरराष्ट्रीय शो है, जिसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। इसके हर सीजन में अलग लोकेशन और नई कहानी के साथ वैश्विक कलाकारों को जोड़ा जाता है। ऐसे में दीपिका का इस प्रोजेक्ट से जुड़ना उनके अंतरराष्ट्रीय अभिनय करियर के लिए एक अहम कदम माना जा रहा था। हालांकि, उन्होंने शो की लोकप्रियता की परवाह किए बिना अपनी शर्तों पर कायम रहना चुना। यह फैसला इंडस्ट्री में दो तरह की प्रतिक्रियाएं ला रहा है- एक ओर जहां कुछ लोग इसे आत्मसम्मान और पेशेवर स्पष्टता का उदाहरण मान रहे हैं, वहीं कुछ का कहना है कि वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा के लिए लचीलापन भी जरूरी होता है।

अब हिंदी फिल्मों पर फोकस

इन तमाम चर्चाओं के बीच दीपिका फिलहाल अपनी हिंदी फिल्मों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। आगामी दिनों में वह अभिनेता शाहरुख खान के साथ फिल्म ‘किंग’ में नजर आएंगी। ‘किंग’ को लेकर पहले से ही दर्शकों में उत्सुकता है, क्योंकि ‘पठान’ के बाद शाहरुख और दीपिका की जोड़ी को फिर साथ देखने की संभावना चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, दीपिका फिलहाल स्क्रिप्ट चयन और कार्यशैली को लेकर बेहद सजग हैं और सीमित लेकिन प्रभावशाली प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना चाहती हैं।

समझौता करने के मूड में नहीं?

लगातार बड़े प्रोजेक्ट्स से दूरी ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि क्या दीपिका की ‘अपनी शर्तों’ वाली नीति उनके करियर को नई दिशा देगी या अवसरों को सीमित करेगी। फिलहाल इतना तय है कि दीपिका पादुकोण अपने पेशेवर फैसलों में समझौता करने के मूड में नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय शो ‘द व्हाइट लोटस’ का हिस्सा न बन पाना भले ही एक बड़ा अवसर था, लेकिन अभिनेत्री ने अपनी प्राथमिकताओं को तरजीह दी है। अब सभी की निगाहें उनकी आने वाली फिल्मों पर हैं, जो तय करेंगी कि यह रणनीति उनके करियर के लिए कितना लाभदायक साबित होती है।


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