साई पल्लवी की सीता पर दीपिका चिखलिया का भरोसा, बोलीं- किरदार निभाना सम्मान भी, सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी
दीपिका ने कहा कि कलाकारों के बीच तुलना होना स्वाभाविक है, लेकिन हर अभिनेता अपनी अलग शैली और दृष्टिकोण के साथ किरदार को जीवंत करता है। ऐसे में नई पीढ़ी के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलना चाहिए।

मुंबई: रामानंद सागर की ऐतिहासिक टीवी श्रृंखला रामायण में माता सीता की भूमिका निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री दीपिका चिखलिया ने नितेश तिवारी की आगामी फिल्म रामायणम् में सीता का किरदार निभा रहीं अभिनेत्री साई पल्लवी की खुलकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि किसी भी पौराणिक चरित्र को निभाना आसान नहीं होता, लेकिन साई एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं और उन्हें विश्वास है कि वह अपनी भूमिका के साथ न्याय करने की पूरी कोशिश करेंगी। दीपिका ने कहा कि कलाकारों के बीच तुलना होना स्वाभाविक है, लेकिन हर अभिनेता अपनी अलग शैली और दृष्टिकोण के साथ किरदार को जीवंत करता है। ऐसे में नई पीढ़ी के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलना चाहिए।
'सीता की छवि दर्शकों के मन में पहले से मौजूद है'
दीपिका चिखलिया का मानना है कि माता सीता का चरित्र भारतीय समाज और संस्कृति में अत्यंत सम्मानित और पूजनीय है। इसलिए इस भूमिका को निभाने वाले कलाकार पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि दर्शकों के मन में सीता के स्वरूप की एक स्पष्ट और पवित्र छवि पहले से मौजूद है। ऐसे में किसी भी अभिनेत्री को उस छवि के अनुरूप स्वयं को ढालना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि बाहरी रूप-रंग से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि कलाकार अपने अभिनय के माध्यम से चरित्र की गरिमा और भावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करे।
लुक को लेकर भी रखी अपनी राय
साई पल्लवी के लुक को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपिका ने कहा कि उन्होंने अभी फिल्म में उनका पूरा स्वरूप नहीं देखा है, इसलिए अंतिम राय देना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि प्राचीन ग्रंथों, विशेष रूप से तुलसीदास की रामचरितमानस में माता सीता के घुंघराले बालों का कोई विशेष उल्लेख नहीं मिलता। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि फिल्म में तैयार किया गया लुक किरदार की गरिमा और प्रस्तुति के अनुरूप लगता है, तो उसे सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए।
'सीता का किरदार मेरे लिए वरदान भी था और चुनौती भी'
दीपिका चिखलिया ने अपने अभिनय सफर को याद करते हुए कहा कि माता सीता की भूमिका ने उन्हें अपार लोकप्रियता, सम्मान और दर्शकों का प्रेम दिलाया। यह उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इस भूमिका की सफलता का एक दूसरा पक्ष भी था। लोगों ने उन्हें हमेशा माता सीता की छवि में ही देखा, जिसके कारण उन्हें अलग तरह की भूमिकाओं में स्वीकार करना आसान नहीं रहा। उनका कहना था कि कई दशक बीत जाने के बाद भी लोग उन्हें सबसे पहले सीता के रूप में ही पहचानते हैं।
नई 'रामायणम्' को लेकर बढ़ी उत्सुकता
निर्देशक नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी फिल्म रामायणम् लंबे समय से चर्चा में है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। वहीं, दक्षिण भारतीय सुपरस्टार यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म की स्टारकास्ट, भव्य विजुअल प्रस्तुति और बड़े बजट को देखते हुए दर्शकों के बीच इसे लेकर काफी उत्सुकता है। फिल्म के निर्माताओं का उद्देश्य भारतीय महाकाव्य रामायण को आधुनिक तकनीक और भव्य सिनेमाई अनुभव के साथ बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करना है।
पौराणिक किरदारों में अभिनय की चुनौती
फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि पौराणिक पात्र निभाना किसी भी कलाकार के लिए सबसे कठिन जिम्मेदारियों में से एक होता है। ऐसे किरदारों से लोगों की भावनाएं और आस्था जुड़ी होती हैं, इसलिए कलाकारों को अभिनय के साथ-साथ भाषा, हाव-भाव, संवाद अदायगी और व्यक्तित्व पर भी विशेष ध्यान देना पड़ता है। दीपिका चिखलिया की टिप्पणी इसी बात को रेखांकित करती है कि समय बदलने के बावजूद माता सीता जैसे चरित्र की गरिमा आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। वहीं साई पल्लवी जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्री से दर्शकों को भी बड़ी उम्मीदें हैं। अब सबकी निगाहें रामायणम् की रिलीज पर टिकी हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि नई पीढ़ी की यह प्रस्तुति दर्शकों की अपेक्षाओं पर कितनी खरी उतरती है।


