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‘रामायणम्’ के VFX पर बहस के बीच ऋतिक रोशन का बयान: अच्छे और खराब विजुअल इफेक्ट्स का बताया फर्क
ऋतिक रोशन ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट साझा करते हुए VFX के प्रति अपने जुनून और अनुभव के बारे में बताया। उन्होंने लिखा, “हां, खराब VFX होते हैं। कभी-कभी ये इतने खराब होते हैं कि इन्हें देखना दर्दनाक होता है।”

मुंबई। निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायणम्’ की टीजरनुमा पहली झलक सामने आने के बाद से ही इसके विजुअल इफेक्ट्स (VFX) को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। जहां एक तरफ फिल्म के भव्य विजुअल्स की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर एक वर्ग इसके VFX को लेकर आलोचना भी कर रहा है। इसी बीच बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए अच्छे और खराब VFX के बीच का अंतर समझाया है।
सोशल मीडिया पर VFX को लेकर बंटी रायरामायणम् की पहली झलक सामने आते ही इंटरनेट पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ दर्शकों ने इसके विजुअल्स और स्केल की तारीफ की, जबकि कई लोगों ने VFX की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। इसी बहस के बीच ऋतिक रोशन का बयान सामने आया, जिसने चर्चा को एक नया आयाम दे दिया है।ऋतिक रोशन ने साझा किया अनुभवऋतिक रोशन ने शनिवार रात इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट साझा करते हुए VFX के प्रति अपने जुनून और अनुभव के बारे में बताया। उन्होंने लिखा, “हां, खराब VFX होते हैं। कभी-कभी ये इतने खराब होते हैं कि इन्हें देखना दर्दनाक होता है- खासकर मेरे लिए, और तब तो और ज्यादा जब वह मेरी ही फिल्म हो।” उनका यह बयान यह दिखाता है कि एक अभिनेता के तौर पर भी वह तकनीकी गुणवत्ता को लेकर कितने सजग हैं।बचपन से रहा VFX का आकर्षणऋतिक ने अपने बचपन की एक याद साझा करते हुए बताया कि 11 साल की उम्र में उन्होंने लंदन में हॉलीवुड फिल्म Back to the Future देखी थी, जिसने उनके सोचने का तरीका बदल दिया। उन्होंने लिखा कि उस फिल्म के बाद वह VFX के दीवाने हो गए थे। वह अपने पिता के साथ वीएचएस प्लेयर पर फिल्म के सीन बार-बार रोककर देखते थे, ताकि समझ सकें कि यह सब कैसे बनाया गया है। यहां तक कि उन्होंने अपनी पॉकेट मनी से Industrial Light & Magic: The Art of Special Effects नाम की किताब मंगवाई और उसके आने का महीनों इंतजार किया। ऋतिक ने उस दिन को अपनी जिंदगी के सबसे खुशी के दिनों में से एक बताया।भारतीय फिल्मकारों की सराहनाऋतिक रोशन ने अपने पोस्ट में भारतीय सिनेमा के उन फिल्मकारों की भी तारीफ की, जो बड़े स्तर पर VFX का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कल्कि, बाहुबली और रामायणम् जैसी फिल्मों के निर्माताओं को अपना “हीरो” बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके पिता राकेश रोशन ने कोई मिल गया और कृष जैसी फिल्मों में जिस तरह VFX का उपयोग किया, वह भी प्रेरणादायक है। ऋतिक के अनुसार, इन फिल्मकारों में वह हिम्मत और दृष्टि है, जो भारतीय सिनेमा को नए स्तर पर ले जा रही है।अच्छे और खराब VFX का फर्क समझायाअपने पोस्ट में ऋतिक रोशन ने VFX की गुणवत्ता को लेकर एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने लिखा कि अगर कोई फिल्मकार जिस तरह का विजुअल दिखाना चाहता है, उसे प्रभावी ढंग से स्क्रीन पर उतार पाता है, तो वह अच्छा VFX है। लेकिन यदि वह अपने विजन को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाता, तो वही VFX खराब माना जाता है। इस बयान के जरिए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि VFX का मूल्यांकन केवल तकनीकी जटिलता से नहीं, बल्कि उसके प्रभाव और कहानी के साथ उसके तालमेल से होना चाहिए।‘रामायणम्’ पर बहस जारीऋतिक रोशन का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रामायणम् के VFX को लेकर बहस तेज है। फिल्म के टीजर ने जहां दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ाई है, वहीं इसके विजुअल इफेक्ट्स को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी और पौराणिक फिल्म के लिए VFX का स्तर बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह फिल्म के अनुभव को सीधे प्रभावित करता है।बदलते दौर में VFX की बढ़ती भूमिकाआज के सिनेमा में VFX केवल तकनीकी सहायक नहीं, बल्कि कहानी कहने का अहम हिस्सा बन चुका है। खासकर पौराणिक, साइंस-फिक्शन और फैंटेसी फिल्मों में इसका महत्व और बढ़ जाता है। भारतीय सिनेमा भी अब इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बड़े बजट की फिल्मों में VFX का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।नजरिया और निष्पादन दोनों जरूरीऋतिक रोशन का बयान यह संकेत देता है कि VFX को लेकर बहस केवल “अच्छा” या “खराब” तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असल मायने में यह देखना जरूरी है कि फिल्मकार अपने विजन को कितनी प्रभावी तरीके से दर्शकों तक पहुंचा पाता है। रामायणम् को लेकर जारी चर्चा के बीच ऋतिक की यह राय दर्शकों और फिल्म निर्माताओं दोनों के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करती है।
ऋतिक रोशन ने शनिवार रात इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट साझा करते हुए VFX के प्रति अपने जुनून और अनुभव के बारे में बताया। उन्होंने लिखा, “हां, खराब VFX होते हैं। कभी-कभी ये इतने खराब होते हैं कि इन्हें देखना दर्दनाक होता है- खासकर मेरे लिए, और तब तो और ज्यादा जब वह मेरी ही फिल्म हो।” उनका यह बयान यह दिखाता है कि एक अभिनेता के तौर पर भी वह तकनीकी गुणवत्ता को लेकर कितने सजग हैं।
बचपन से रहा VFX का आकर्षणऋतिक ने अपने बचपन की एक याद साझा करते हुए बताया कि 11 साल की उम्र में उन्होंने लंदन में हॉलीवुड फिल्म Back to the Future देखी थी, जिसने उनके सोचने का तरीका बदल दिया। उन्होंने लिखा कि उस फिल्म के बाद वह VFX के दीवाने हो गए थे। वह अपने पिता के साथ वीएचएस प्लेयर पर फिल्म के सीन बार-बार रोककर देखते थे, ताकि समझ सकें कि यह सब कैसे बनाया गया है। यहां तक कि उन्होंने अपनी पॉकेट मनी से Industrial Light & Magic: The Art of Special Effects नाम की किताब मंगवाई और उसके आने का महीनों इंतजार किया। ऋतिक ने उस दिन को अपनी जिंदगी के सबसे खुशी के दिनों में से एक बताया।भारतीय फिल्मकारों की सराहनाऋतिक रोशन ने अपने पोस्ट में भारतीय सिनेमा के उन फिल्मकारों की भी तारीफ की, जो बड़े स्तर पर VFX का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कल्कि, बाहुबली और रामायणम् जैसी फिल्मों के निर्माताओं को अपना “हीरो” बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके पिता राकेश रोशन ने कोई मिल गया और कृष जैसी फिल्मों में जिस तरह VFX का उपयोग किया, वह भी प्रेरणादायक है। ऋतिक के अनुसार, इन फिल्मकारों में वह हिम्मत और दृष्टि है, जो भारतीय सिनेमा को नए स्तर पर ले जा रही है।अच्छे और खराब VFX का फर्क समझायाअपने पोस्ट में ऋतिक रोशन ने VFX की गुणवत्ता को लेकर एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने लिखा कि अगर कोई फिल्मकार जिस तरह का विजुअल दिखाना चाहता है, उसे प्रभावी ढंग से स्क्रीन पर उतार पाता है, तो वह अच्छा VFX है। लेकिन यदि वह अपने विजन को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाता, तो वही VFX खराब माना जाता है। इस बयान के जरिए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि VFX का मूल्यांकन केवल तकनीकी जटिलता से नहीं, बल्कि उसके प्रभाव और कहानी के साथ उसके तालमेल से होना चाहिए।‘रामायणम्’ पर बहस जारीऋतिक रोशन का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रामायणम् के VFX को लेकर बहस तेज है। फिल्म के टीजर ने जहां दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ाई है, वहीं इसके विजुअल इफेक्ट्स को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी और पौराणिक फिल्म के लिए VFX का स्तर बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह फिल्म के अनुभव को सीधे प्रभावित करता है।बदलते दौर में VFX की बढ़ती भूमिकाआज के सिनेमा में VFX केवल तकनीकी सहायक नहीं, बल्कि कहानी कहने का अहम हिस्सा बन चुका है। खासकर पौराणिक, साइंस-फिक्शन और फैंटेसी फिल्मों में इसका महत्व और बढ़ जाता है। भारतीय सिनेमा भी अब इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बड़े बजट की फिल्मों में VFX का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।नजरिया और निष्पादन दोनों जरूरीऋतिक रोशन का बयान यह संकेत देता है कि VFX को लेकर बहस केवल “अच्छा” या “खराब” तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असल मायने में यह देखना जरूरी है कि फिल्मकार अपने विजन को कितनी प्रभावी तरीके से दर्शकों तक पहुंचा पाता है। रामायणम् को लेकर जारी चर्चा के बीच ऋतिक की यह राय दर्शकों और फिल्म निर्माताओं दोनों के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करती है।
ऋतिक रोशन ने अपने पोस्ट में भारतीय सिनेमा के उन फिल्मकारों की भी तारीफ की, जो बड़े स्तर पर VFX का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कल्कि, बाहुबली और रामायणम् जैसी फिल्मों के निर्माताओं को अपना “हीरो” बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके पिता राकेश रोशन ने कोई मिल गया और कृष जैसी फिल्मों में जिस तरह VFX का उपयोग किया, वह भी प्रेरणादायक है। ऋतिक के अनुसार, इन फिल्मकारों में वह हिम्मत और दृष्टि है, जो भारतीय सिनेमा को नए स्तर पर ले जा रही है।
अच्छे और खराब VFX का फर्क समझायाअपने पोस्ट में ऋतिक रोशन ने VFX की गुणवत्ता को लेकर एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने लिखा कि अगर कोई फिल्मकार जिस तरह का विजुअल दिखाना चाहता है, उसे प्रभावी ढंग से स्क्रीन पर उतार पाता है, तो वह अच्छा VFX है। लेकिन यदि वह अपने विजन को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाता, तो वही VFX खराब माना जाता है। इस बयान के जरिए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि VFX का मूल्यांकन केवल तकनीकी जटिलता से नहीं, बल्कि उसके प्रभाव और कहानी के साथ उसके तालमेल से होना चाहिए।‘रामायणम्’ पर बहस जारीऋतिक रोशन का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रामायणम् के VFX को लेकर बहस तेज है। फिल्म के टीजर ने जहां दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ाई है, वहीं इसके विजुअल इफेक्ट्स को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी और पौराणिक फिल्म के लिए VFX का स्तर बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह फिल्म के अनुभव को सीधे प्रभावित करता है।बदलते दौर में VFX की बढ़ती भूमिकाआज के सिनेमा में VFX केवल तकनीकी सहायक नहीं, बल्कि कहानी कहने का अहम हिस्सा बन चुका है। खासकर पौराणिक, साइंस-फिक्शन और फैंटेसी फिल्मों में इसका महत्व और बढ़ जाता है। भारतीय सिनेमा भी अब इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बड़े बजट की फिल्मों में VFX का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।नजरिया और निष्पादन दोनों जरूरीऋतिक रोशन का बयान यह संकेत देता है कि VFX को लेकर बहस केवल “अच्छा” या “खराब” तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असल मायने में यह देखना जरूरी है कि फिल्मकार अपने विजन को कितनी प्रभावी तरीके से दर्शकों तक पहुंचा पाता है। रामायणम् को लेकर जारी चर्चा के बीच ऋतिक की यह राय दर्शकों और फिल्म निर्माताओं दोनों के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करती है।
ऋतिक रोशन का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रामायणम् के VFX को लेकर बहस तेज है। फिल्म के टीजर ने जहां दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ाई है, वहीं इसके विजुअल इफेक्ट्स को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी और पौराणिक फिल्म के लिए VFX का स्तर बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह फिल्म के अनुभव को सीधे प्रभावित करता है।
बदलते दौर में VFX की बढ़ती भूमिकाआज के सिनेमा में VFX केवल तकनीकी सहायक नहीं, बल्कि कहानी कहने का अहम हिस्सा बन चुका है। खासकर पौराणिक, साइंस-फिक्शन और फैंटेसी फिल्मों में इसका महत्व और बढ़ जाता है। भारतीय सिनेमा भी अब इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बड़े बजट की फिल्मों में VFX का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।नजरिया और निष्पादन दोनों जरूरीऋतिक रोशन का बयान यह संकेत देता है कि VFX को लेकर बहस केवल “अच्छा” या “खराब” तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असल मायने में यह देखना जरूरी है कि फिल्मकार अपने विजन को कितनी प्रभावी तरीके से दर्शकों तक पहुंचा पाता है। रामायणम् को लेकर जारी चर्चा के बीच ऋतिक की यह राय दर्शकों और फिल्म निर्माताओं दोनों के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करती है।
ऋतिक रोशन का बयान यह संकेत देता है कि VFX को लेकर बहस केवल “अच्छा” या “खराब” तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असल मायने में यह देखना जरूरी है कि फिल्मकार अपने विजन को कितनी प्रभावी तरीके से दर्शकों तक पहुंचा पाता है। रामायणम् को लेकर जारी चर्चा के बीच ऋतिक की यह राय दर्शकों और फिल्म निर्माताओं दोनों के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करती है।
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