एआर रहमान के 'कम्युनल' बयान पर भड़कीं कंगना रनौत, संगीतकार को लेकर कही यह बात
अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने रहमान के बयान पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर रहमान के इंटरव्यू का एक वीडियो साझा करते हुए लंबा पोस्ट लिखा, जिसमें उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव का हवाला दिया।

मुंबई। ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान के उस बयान पर फिल्म इंडस्ट्री में तीखी बहस छिड़ गई है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि पिछले कुछ वर्षों से उन्हें बॉलीवुड में अपेक्षाकृत कम काम मिल रहा है और इसके पीछे संभावित रूप से सांप्रदायिक कारण भी हो सकते हैं। रहमान के इस बयान से फिल्म जगत के कई नामचीन कलाकार सहमत नजर नहीं आ रहे हैं। अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत, गायक अनूप जलोटा और शान ने सार्वजनिक रूप से इस दावे को खारिज किया है और कहा है कि संगीत और सिनेमा की दुनिया में काम मिलने या न मिलने के पीछे कई व्यावसायिक और रचनात्मक कारण होते हैं, न कि धर्म या समुदाय।
क्या कहा था एआर रहमान ने
एक हालिया इंटरव्यू में एआर रहमान ने कहा था कि बीते करीब आठ वर्षों में बॉलीवुड में उन्हें पहले की तुलना में कम काम मिला है। उन्होंने इस बदलाव के पीछे उद्योग में निर्णय लेने की प्रक्रिया में आए परिवर्तन का जिक्र किया। रहमान के मुताबिक, अब कई बार ऐसे लोग फैसले लेते हैं, जो रचनात्मक पृष्ठभूमि से नहीं आते। उन्होंने यह भी कहा कि कभी-कभी यह बातें उनके पास पहुंचती हैं कि उन्हें किसी प्रोजेक्ट के लिए बुक किया गया था, लेकिन बाद में म्यूजिक कंपनियां आगे बढ़कर अपने “पांच कंपोजरों” को काम सौंप देती हैं। बातचीत के दौरान रहमान ने यह भी जोड़ा कि इसके पीछे कोई सांप्रदायिक कारण भी हो सकता है। हालांकि रहमान ने किसी व्यक्ति या संस्था का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
कंगना रनौत का तीखा पलटवार
अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने रहमान के बयान पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर रहमान के इंटरव्यू का एक वीडियो साझा करते हुए लंबा पोस्ट लिखा, जिसमें उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव का हवाला दिया। कंगना ने लिखा कि उन्हें भी फिल्म इंडस्ट्री में भारी भेदभाव और पक्षपात का सामना करना पड़ा है, क्योंकि वह खुलकर एक “भगवा पार्टी” का समर्थन करती हैं। इसके बावजूद उन्होंने रहमान के रवैये को “नफरत से भरा” करार दिया। कंगना ने दावा किया कि जब वह अपनी निर्देशित फिल्म इमरजेंसी की कहानी लेकर रहमान के पास गई थीं, तो उन्होंने न केवल फिल्म का संगीत देने से मना कर दिया, बल्कि उनसे मिलने से भी इनकार कर दिया।
कंगना के अनुसार, उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि रहमान किसी “प्रोपेगेंडा फिल्म” का हिस्सा नहीं बनना चाहते। उन्होंने इसे विडंबना बताते हुए कहा कि इमरजेंसी को बाद में आलोचकों ने मास्टरपीस बताया और यहां तक कि विपक्षी दलों के नेताओं ने भी फिल्म की सराहना करते हुए उन्हें पत्र लिखे। कंगना ने अपने पोस्ट के अंत में लिखा, “आप नफरत से अंधे हो गए हैं। मुझे आप पर तरस आता है।”
शान ने सांप्रदायिक एंगल से किया इनकार
लोकप्रिय गायक शान ने भी रहमान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सांप्रदायिक कोण को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद भी पहले की तुलना में काफी कम काम मिल रहा है, जबकि वह कई दशकों से गा रहे हैं। शान के मुताबिक, यह किसी एक कलाकार या समुदाय की समस्या नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें कितना काम मिलेगा, यह हमारे हाथ में नहीं है। म्यूजिक इंडस्ट्री में यह हमेशा बदलता रहता है। मुझे इसमें कोई सांप्रदायिक या अल्पसंख्यक एंगल नजर नहीं आता। संगीत में ऐसी बातें नहीं होतीं।” शान ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि इंडस्ट्री में धर्म के आधार पर भेदभाव होता, तो पिछले 30 सालों से तीनों खान शाह रुख खान, सलमान खान और आमिर खान की लोकप्रियता लगातार बढ़ती नहीं रहती।
अनूप जलोटा बोले, रहमान को भरपूर काम मिला
भजन गायक अनूप जलोटा ने भी एआर रहमान के दावे से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत होगा कि रहमान को पर्याप्त काम नहीं मिला। जलोटा के अनुसार, रहमान ने बहुत कम समय में असाधारण मात्रा में काम किया है। अनूप जलोटा ने कहा, “उन्होंने सिर्फ पांच सालों में 25 सालों के बराबर काम किया है। इससे ज्यादा क्या कहा जा सकता है। उन्होंने बेहतरीन प्रोजेक्ट्स दिए हैं और आज भी सक्रिय हैं।” उनके मुताबिक, किसी कलाकार के करियर में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है और इसे सांप्रदायिक चश्मे से देखना उचित नहीं है।
फिल्म इंडस्ट्री में बदलते समीकरण
फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक दशक में बॉलीवुड में काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। म्यूजिक कंपनियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और नए प्रोड्यूसर्स की बढ़ती भूमिका ने कई वरिष्ठ कलाकारों के काम के स्वरूप को प्रभावित किया है। अब एक ही फिल्म में कई संगीतकारों को मौका दिया जाता है, जिससे किसी एक नाम को पहले जितना व्यापक काम नहीं मिल पाता।
फिल्म इंडस्ट्री को लेकर नई बहस
एआर रहमान के बयान ने फिल्म इंडस्ट्री में काम, रचनात्मक स्वतंत्रता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर एक बहस जरूर छेड़ दी है। हालांकि कंगना रनौत, शान और अनूप जलोटा जैसे कलाकारों का मानना है कि इसे सांप्रदायिक नजरिए से देखना सही नहीं है। यह बहस आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है, लेकिन फिलहाल बॉलीवुड दो धड़ों में बंटा हुआ नजर आ रहा है। एक जो रहमान की पीड़ा को समझता है और दूसरा जो इसे उद्योग की बदलती परिस्थितियों का नतीजा मानता है।


