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अनिल कपूर बोले- दुनिया भारतीय प्रतिभा की ओर देख रही, अब हमें किसी बाहरी मान्यता की जरूरत नहीं

अनिल कपूर ने कहा कि जब उन्होंने स्लमडॉग मिलियनेयर में काम किया और फिल्म के साथ दुनिया भर की यात्रा की, तब वह ऑस्कर समारोह तक भी पहुंचे थे। हालांकि, उनका उद्देश्य किसी बाहरी मान्यता की तलाश नहीं था।

अनिल कपूर बोले- दुनिया भारतीय प्रतिभा की ओर देख रही, अब हमें किसी बाहरी मान्यता की जरूरत नहीं
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मुंबई: हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अनिल कपूर का मानना है कि आज भारतीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए विदेशी मान्यता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था, जब अंतरराष्ट्रीय मंचों से मिली पहचान को बहुत अहम माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और दुनिया भारतीय प्रतिभा को गंभीरता से देख रही है। एक कार्यक्रम के दौरान उनसे पूछा गया कि उनके लिए ऑस्कर विजेता फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर की वैश्विक पहचान अधिक महत्वपूर्ण है या फिर 1942 : ए लव स्टोरी का रोमांस और मिस्टर इंडिया की मासूमियत। इस सवाल के जवाब में अनिल कपूर ने भारतीय सिनेमा के बदलते वैश्विक प्रभाव पर विस्तार से अपनी बात रखी।

गर्वित भारतीय के रूप में पहुंचे थे ऑस्कर तक

अनिल कपूर ने कहा कि जब उन्होंने स्लमडॉग मिलियनेयर में काम किया और फिल्म के साथ दुनिया भर की यात्रा की, तब वह ऑस्कर समारोह तक भी पहुंचे थे। हालांकि, उनका उद्देश्य किसी बाहरी मान्यता की तलाश नहीं था। उन्होंने कहा कि वह वहां एक गर्वित भारतीय के रूप में गए थे और दुनिया के कई बड़े फिल्म निर्माताओं तथा एग्जीक्यूटिव्स से मुलाकात की। उनके अनुसार, आज भारतीय कलाकार वैश्विक मंच पर बराबरी के साझेदार के रूप में काम कर रहे हैं, न कि केवल पहचान पाने के लिए। अनिल कपूर ने कहा कि भारत में मौजूद प्रतिभा को अब पूरी दुनिया सम्मान की नजर से देख रही है और यही सबसे बड़ी उपलब्धि है।

‘1942 : ए लव स्टोरी’ करने की वजह था उसका संगीत

1994 में रिलीज हुई 1942 : ए लव स्टोरी को याद करते हुए अनिल कपूर ने कहा कि उन्होंने यह फिल्म मुख्य रूप से उसके संगीत की वजह से स्वीकार की थी। उनके मुताबिक, उन्हें लगता था कि इस फिल्म के लिए कोई युवा अभिनेता अधिक उपयुक्त हो सकता था, लेकिन फिल्म का संगीत उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने इसका हिस्सा बनने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि फिल्म की तकनीक और कलाकारों का प्रदर्शन बेहतरीन था, लेकिन आने वाले समय में इसे सबसे ज्यादा उसके संगीत के लिए याद किया जाएगा।

आर.डी. बर्मन और जावेद अख्तर के योगदान को किया याद

अनिल कपूर ने कहा कि 1942 : ए लव स्टोरी की असली ताकत उसका संगीत था, जिसे महान संगीतकार आर.डी. बर्मन ने तैयार किया था। उन्होंने गीतकार जावेद अख्तर के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि फिल्म के गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं और यही किसी संगीतकार और गीतकार की सबसे बड़ी सफलता होती है। उल्लेखनीय है कि बतौर संगीत निर्देशक 1942 : ए लव स्टोरी आर.डी. बर्मन की अंतिम फिल्म थी और इसके गीत आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय गीतों में गिने जाते हैं।

‘मिस्टर इंडिया’ आज भी उतनी ही प्रासंगिक’

अनिल कपूर ने अपनी सुपरहिट फिल्म मिस्टर इंडिया का जिक्र करते हुए कहा कि यह उन फिल्मों में से है, जो समय के साथ पुरानी नहीं हुईं। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी, किरदार और भावनात्मक पक्ष आज भी दर्शकों से जुड़ते हैं। उनके अनुसार, मिस्टर इंडिया ने अपनी प्रासंगिकता बरकरार रखी है और यही वजह है कि नई पीढ़ी भी इस फिल्म को उतना ही पसंद करती है, जितना इसके रिलीज के समय दर्शकों ने किया था।

भारतीय सिनेमा की बढ़ती वैश्विक पहचान पर जताया गर्व

अनिल कपूर का मानना है कि भारतीय फिल्म उद्योग अब केवल देश तक सीमित नहीं रह गया है। भारतीय कलाकार, तकनीशियन और फिल्म निर्माता दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब समय बदल चुका है और भारतीय सिनेमा को किसी बाहरी स्वीकृति की जरूरत नहीं है, क्योंकि दुनिया खुद भारत की रचनात्मक क्षमता और प्रतिभा की ओर आकर्षित हो रही है। उनकी यह टिप्पणी भारतीय सिनेमा के वैश्विक विस्तार और बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।


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