15 साल बाद ‘तीस मार खान’ की वापसी: ओटीटी और रील्स के दौर में जेन जी को भा रही फराह खान की फिल्म
साल 2010 में रिलीज हुई यह फिल्म अपने समय में आलोचकों और दर्शकों के निशाने पर रही थी। लेकिन 15 साल बाद अचानक यह फिल्म फिर से चर्चा में है और इसकी वजह है आज की नई पीढ़ी यानी जेन जी का इसे ढूंढकर देखना और पसंद करना। फराह खान खुद इस बदलाव से खुश और भावुक नजर आ रही हैं।

मुंबई। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में रही हैं, जो रिलीज के वक्त बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों की कसौटी पर खरी नहीं उतर पाईं, लेकिन समय के साथ उनकी किस्मत ने पलटी मारी। कभी टीवी पर, तो कभी ओटीटी प्लेटफॉर्म और अब सोशल मीडिया रील्स के जरिए ऐसी फिल्मों को नई पहचान मिली। कोरियोग्राफर और फिल्म निर्देशक फराह खान की फिल्म तीस मार खान भी अब इसी श्रेणी में शामिल होती दिख रही है।
साल 2010 में रिलीज हुई यह फिल्म अपने समय में आलोचकों और दर्शकों के निशाने पर रही थी। लेकिन 15 साल बाद अचानक यह फिल्म फिर से चर्चा में है और इसकी वजह है आज की नई पीढ़ी यानी जेन जी का इसे ढूंढकर देखना और पसंद करना। फराह खान खुद इस बदलाव से खुश और भावुक नजर आ रही हैं।
रील्स से शुरू हुई ‘तीस मार खान’ की दूसरी पारी
तीस मार खान की वापसी का सिलसिला अचानक शुरू हुआ। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म धुरंधर में अभिनेता अक्षय खन्ना के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासकर इंस्टाग्राम रील्स पर अक्षय खन्ना की पुरानी फिल्मों के सीन वायरल होने लगे। इन्हीं रील्स में तीस मार खान के कुछ संवाद और दृश्य भी सामने आए, जो देखते ही देखते युवाओं के बीच ट्रेंड करने लगे। इन वायरल क्लिप्स ने जेन जी दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ाई और बड़ी संख्या में लोगों ने इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर ढूंढकर देखना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि कभी ‘फ्लॉप’ कही जाने वाली फिल्म आज मजेदार, अंडररेटेड और कल्ट-कॉमेडी के रूप में देखी जाने लगी।
फराह खान की प्रतिक्रिया
फिल्म को मिल रही इस नई सराहना पर फराह खान ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह देखना उनके लिए सुकून देने वाला है कि आज की पीढ़ी उनकी इस फिल्म को एन्जॉय कर रही है। फराह ने कहा, “जावेद (अख्तर) अंकल हमेशा कहते हैं कि इतिहास हमेशा महान कृतियों के साथ अच्छा ही करता है। कुछ ऐसा ही तीस मार खान के साथ भी हुआ है। मुझे अच्छा लग रहा है कि जेन जी इसे पसंद कर रही है।” उन्होंने यह भी माना कि भले ही फिल्म अपने समय में नहीं चली, लेकिन उन्हें हमेशा यह फिल्म मजेदार लगती रही है। ‘
मुझे यह फिल्म काफी फनी लगती है’
फराह खान ने साफ तौर पर कहा कि वह तीस मार खान को शुरू से ही एक हल्की-फुल्की, मजेदार और व्यंग्यात्मक फिल्म के तौर पर देखती रही हैं। उन्होंने कहा कि आज के दर्शक शायद उस तरह की हास्य शैली को ज्यादा खुले मन से स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे यह फिल्म काफी मजेदार लगती है। खुश हूं कि 15 साल बाद लोग इसे देख रहे हैं और एन्जॉय कर रहे हैं।” फराह के मुताबिक, आज का दर्शक कंटेंट को ‘अच्छा या बुरा’ के पुराने पैमानों से नहीं, बल्कि एंटरटेनमेंट और रिलेवेंस के नजरिये से देख रहा है।
शिरीष कुंदर के डायलॉग्स को मिल रही नई तारीफ
फिल्म के दोबारा चर्चा में आने के साथ इसके संवाद भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। फराह खान ने इस मौके पर अपने पति और फिल्म के लेखक शिरीष कुंदर की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “मेरे पति शिरीष ने इस फिल्म को लिखा था और वाकई उन्होंने इसमें कई मजेदार डायलॉग्स लिखे थे। आज जब लोग उन डायलॉग्स को दोबारा सुनकर हंस रहे हैं, तो अच्छा लगता है।” फिल्म के कई संवाद आज मीम्स और रील्स का हिस्सा बन चुके हैं, जो इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
अक्षय कुमार और अक्षय खन्ना की जोड़ी फिर चर्चा में
तीस मार खान में अक्षय कुमार मुख्य भूमिका में थे, जबकि अक्षय खन्ना ने एक अहम किरदार निभाया था। उस समय फिल्म को भले ही आलोचनाओं का सामना करना पड़ा हो, लेकिन आज दर्शक इन दोनों अभिनेताओं के परफॉर्मेंस को अलग नजरिये से देख रहे हैं। खासकर अक्षय खन्ना के अभिनय की तारीफ हो रही है, जो हालिया फिल्मों में उनकी दमदार वापसी के बाद और तेज हो गई है। दर्शकों का कहना है कि फिल्म में उनका किरदार आज के समय में ज्यादा प्रभावी और दिलचस्प लगता है।
बदलता दर्शक, बदलती पसंद
फिल्म समीक्षकों का मानना है कि तीस मार खान की दोबारा लोकप्रियता यह दिखाती है कि दर्शकों की पसंद कैसे बदल रही है। पहले जहां बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को ही सफलता का पैमाना माना जाता था, वहीं अब ओटीटी और सोशल मीडिया के दौर में फिल्में लंबी उम्र पा रही हैं। आज का दर्शक पुरानी फिल्मों को नए संदर्भ में देख रहा है। व्यंग्य, अतिशयोक्ति और मेटा-ह्यूमर जैसी चीजें, जिन्हें पहले नकार दिया गया था, अब उन्हें ‘स्मार्ट कॉमेडी’ के तौर पर सराहा जा रहा है।
ओटीटी और सोशल मीडिया का असर
तीस मार खान की यह दूसरी पारी इस बात का भी उदाहरण है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया ने फिल्मों के मूल्यांकन का तरीका बदल दिया है। अब कोई फिल्म रिलीज के पहले हफ्ते में न चले, तो भी वह समय के साथ अपनी जगह बना सकती है। रील्स और मीम कल्चर ने खास तौर पर पुरानी फिल्मों को नई पीढ़ी से जोड़ने का काम किया है और तीस मार खान इसका ताजा उदाहरण बन गई है।
समय का इम्तिहान पास करती फिल्म
15 साल पहले जिस फिल्म को नकार दिया गया था, वही आज जेन जी के बीच लोकप्रिय हो रही है। फराह खान के लिए यह सिर्फ एक फिल्म की वापसी नहीं, बल्कि समय के साथ कला के मूल्य को समझे जाने की कहानी है। तीस मार खान की यह नई पहचान इस बात का सबूत है कि सिनेमा का सफर रिलीज के साथ खत्म नहीं होता। कभी-कभी फिल्मों को समझे जाने में वक्त लगता है और जब वह वक्त आता है, तो इतिहास सचमुच उनके साथ अच्छा करता है।


