अदनान सामी बोले- 'जबरदस्ती कुछ नहीं करता', RSS कार्यक्रम पर ट्रोलिंग को लेकर भी दिया करारा जवाब
अदनान सामी ने बताया कि वह लगातार काम करने के बजाय चुनिंदा प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना पसंद करते हैं। उनका कहना है कि वह किसी चीज को सिर्फ इसलिए करने की कोशिश नहीं करते क्योंकि बाकी लोग ऐसा कर रहे हैं।

मुंबई: गायक और संगीतकार अदनान सामी को भारत में रहते हुए करीब 26 साल हो चुके हैं। साल 2000 में भारत आने के बाद उन्होंने यहीं अपने संगीत करियर को नई पहचान दी और भारतीय संगीत जगत में एक अलग मुकाम बनाया। भारतीय नागरिकता हासिल करने के साथ उन्हें देश के चतुर्थ सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। लंबे करियर के बावजूद अदनान सामी लगातार अपने संगीत में बदलाव करते रहे हैं। उनका नया गाना 'इश्क तमाशा' हाल ही में रिलीज हुआ है। इस मौके पर उन्होंने अपने संगीत, भारत से जुड़ी यात्रा, पिता से मिले समर्थन, आशा भोसले के साथ पहली मुलाकात और हाल में हुई सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर खुलकर बात की।
'जबरदस्ती कुछ करने से बचता हूं'
अदनान सामी ने बताया कि वह लगातार काम करने के बजाय चुनिंदा प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना पसंद करते हैं। उनका कहना है कि वह किसी चीज को सिर्फ इसलिए करने की कोशिश नहीं करते क्योंकि बाकी लोग ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह लगातार यह जानने की कोशिश करते हैं कि दुनिया और खासकर संगीत की दुनिया में क्या बदलाव आ रहे हैं। जो चीजें उन्हें पसंद आती हैं, उन्हें सुनने के बाद वह सोचते हैं कि उन बदलावों को अपने संगीत में किस तरह शामिल किया जा सकता है। अदनान के मुताबिक, समय के साथ उनकी खुद की पसंद भी बदली है। इसलिए अब उनका संगीत पुराने दौर की नकल नहीं बल्कि मौजूदा समय का हिस्सा महसूस होता है।
'इश्क तमाशा' नाम रखने की वजह
अपने नए गाने के नाम को लेकर अदनान ने कहा कि प्यार के साथ 'तमाशा' शब्द जोड़ने के पीछे समाज की एक हकीकत छिपी है। उनके मुताबिक, दुनिया की मशहूर प्रेम कहानियां जैसे हीर-रांझा, रोमियो-जूलियट और देवदास आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं। लेकिन वास्तविक जिंदगी में जब कोई व्यक्ति बेहद जुनून के साथ प्यार करता है तो समाज अक्सर उसे 'पागल' कहकर उसका मजाक उड़ाता है। अदनान ने बताया कि 'इश्क तमाशा' का नायक भी इसी डर को महसूस करता है कि कहीं उसके प्यार को दुनिया तमाशा न बना दे।
पिता ने संगीत के लिए दिया था समर्थन
अदनान सामी के पिता पाकिस्तानी सेना में थे, लेकिन वह कला और संगीत के बड़े प्रशंसक थे। अदनान ने बताया कि उनके पिता को संगीत की बारीकियों की गहरी समझ थी। जब उन्होंने बेटे में संगीत की प्रतिभा देखी तो उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोका। हालांकि, उन्होंने अदनान को सलाह दी कि संगीत के क्षेत्र में सफलता हासिल करना आसान नहीं है। इसलिए अगर इसमें कामयाबी न मिले तो पढ़ाई पूरी करने का विकल्प खुला रखना चाहिए। अदनान ने बताया कि उन्होंने पिता की सलाह पर पढ़ाई पूरी की और बाद में संगीत को ही अपना करियर बना लिया।
वकालत और रग्बी छोड़कर संगीत को चुना
संगीत के अलावा अदनान ने पढ़ाई के दौरान रग्बी भी खेली। उन्होंने इंग्लैंड के एक प्रतिष्ठित रग्बी स्कूल में शिक्षा हासिल की। पिता की इच्छा के मुताबिक उन्होंने लंदन से वकालत की पढ़ाई की और एक साल अप्रेंटिसशिप भी की। हालांकि, संगीत के प्रति बचपन से लगाव के कारण उन्होंने अंततः वकालत छोड़ दी और पूरी तरह संगीत पर ध्यान केंद्रित करने लगे। अदनान के मुताबिक, उनकी मां उनके इस फैसले से शुरुआत में निराश थीं, लेकिन जब उन्हें संगीत में सफलता मिलने लगी तो उनकी चिंता भी कम हुई।
पिता के निधन के बाद लिया लंबा ब्रेक
अदनान ने फिल्मों के लिए बैकग्राउंड स्कोर पर भी काम किया था, लेकिन 2009-10 के आसपास उन्होंने यह काम बंद कर दिया। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह उनके पिता का निधन था। उन्होंने बताया कि इस सदमे से उबरने में उन्हें कई साल लग गए। इसके बाद भारतीय नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया, दिल्ली में रहना और परिवार से जुड़ी जिम्मेदारियों के कारण भी उनका ध्यान संगीत से दूर रहा। उनकी बेटी का जन्म भी इसी दौरान हुआ। अदनान ने कहा कि करीब 15 वर्षों तक उन्होंने छुट्टी नहीं ली थी, इसलिए उन्होंने काम से ब्रेक लिया और तब वापसी की जब उन्हें लगा कि वह मानसिक और रचनात्मक रूप से पूरी तरह तैयार हैं।
आशा भोंसले से 12 साल की उम्र में हुई थी मुलाकात
अदनान ने दिग्गज गायिका आशा भोंसले के साथ अपने रिश्ते को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उनकी पहली मुलाकात आशा जी से 12 साल की उम्र में लंदन में एक कंसर्ट के दौरान हुई थी। आशा भोंसले ने तब उनसे कहा था कि अगर वह इसी तरह मेहनत करते रहे तो एक दिन म्यूजिक डायरेक्टर बन सकते हैं। बाद में भारत में अदनान का पहला गाना भी आशा भोसले के साथ ही रिलीज हुआ। उन्होंने बताया कि आशा भोंसले के सुझाव पर वह मुंबई आए थे और शुरुआत में उन्हें लगा था कि वह यहां सिर्फ एक-दो महीने रहेंगे। लेकिन देखते ही देखते भारत में उनके 26 साल गुजर गए।
RSS कार्यक्रम की तस्वीर पर ट्रोलिंग को लेकर बोले
कुछ समय पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अदनान सामी और अभिनेता सलमान खान को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। इस पर अदनान ने कहा कि लोग अक्सर सिर्फ किसी तस्वीर या हेडलाइन को देखकर अपनी पूरी राय बना लेते हैं। उनके मुताबिक, लोग किसी घटना की पूरी पृष्ठभूमि या संदर्भ जानने की कोशिश नहीं करते और सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का मंच दे दिया है। अदनान ने कहा कि केवल एक तस्वीर देखकर किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी, सोच या दर्शन को समझ लेना संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी जानकारी समझने की जरूरत पर जोर दिया। अदनान सामी का कहना है कि संगीत और जिंदगी दोनों में बदलाव जरूरी है। इसी सोच के साथ वह अपने नए संगीत को मौजूदा दौर से जोड़ते हुए आगे बढ़ रहे हैं।


