मुंबई। 25 Years of Lagaan: आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘लगान’ भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जाती है। यह फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे काफी सराहना मिली और ऑस्कर के लिए भी नामांकित हुई। अब यह फिल्म 15 जून को अपनी रिलीज के 25 साल पूरे करने जा रही है। इसी मौके पर मुंबई में आयोजित रेड लॉरी फिल्म फेस्टिवल में ‘लगान’ की विशेष स्क्रीनिंग रखी गई। इस दौरान फिल्म के अभिनेता और निर्माता आमिर खान ने मंच पर आकर फिल्म से जुड़े कई दिलचस्प और अनसुने किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने इस फिल्म को करने से मना कर दिया था, लेकिन बाद में यही कहानी उनके दिल और दिमाग में बस गई।
पहले ठुकरा दी थी फिल्म की कहानी
शनिवार को 61 साल के हुए आमिर खान ने बताया कि निर्देशक आशुतोष गोवारिकर कई बार उन्हें ‘लगान’ की कहानी सुनाने आए थे। आमिर के मुताबिक, जब आशुतोष पहली बार मेरे पास इस फिल्म की कहानी लेकर आए, तो मैंने उन्हें साफ मना कर दिया था। उस समय मुझे लगा कि यह बहुत बड़ा जोखिम है। हालांकि, कहानी सुनने के बाद भी वह उनके दिमाग से नहीं निकली। आमिर ने बताया कि इसके बाद वह हर कुछ महीनों में आशुतोष से दोबारा वही कहानी सुनाने के लिए कहते थे। उन्होंने कहा, हर छह महीने में मैं आशुतोष से कहता था कि एक बार फिर से मुझे यह कहानी सुनाओ। धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि यह कहानी बहुत अलग और खास है।
महान निर्देशकों से मिली प्रेरणा
आमिर खान ने बताया कि उन्हें भारतीय सिनेमा के महान निर्देशकों गुरुदत्त, महबूब खान और विमल राय के काम से हमेशा प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि ये निर्देशक हमेशा वही फिल्में बनाते थे, जिन पर उन्हें विश्वास होता था। वे नए और अलग विषयों पर काम करने से कभी डरते नहीं थे। आमिर ने कहा, मैं उनके काम का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। जब मैंने सोचा कि मैं उन लोगों को इतना मानता हूं, तो फिर मैं खुद क्यों वह फिल्म नहीं कर रहा हूं, जिसे करने का मेरा मन है। उसी सोच ने मुझे ‘लगान’ करने के लिए तैयार किया।
जब आमिर को सीन में साइड में खड़ा कर दिया गया
‘लगान’ में आमिर खान उस समय के सबसे बड़े स्टार थे और फिल्म में लगभग पूरी कास्ट नए कलाकारों की थी। इसके बावजूद निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने एक सीन में आमिर को केंद्र से हटाकर साइड में खड़ा कर दिया था। इस घटना का जिक्र करते हुए आमिर ने ‘घनन घनन…’ गाने की शूटिंग का किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि इस सीन में गांव के लोगों को बादलों को देखकर खुश होना था और सभी पात्र अपने-अपने घरों से निकलकर एक जगह इकट्ठा होते हैं। उस समय आशुतोष कैमरा ट्रॉली पर शॉट की तैयारी कर रहे थे।
आमिर ने कहा, “रिहर्सल के दौरान मैं हर बार बीच में आकर खड़ा हो जाता था और बाकी कलाकार मेरे आसपास खड़े होते थे। जब आशुतोष ने हमें डायरेक्ट करना शुरू किया तो उन्होंने मुझे बीच से हटकर बगल में खड़े होने के लिए कहा।” यह सुनकर आमिर थोड़े हैरान रह गए। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उस समय उनका दिल बैठ गया था। उन्होंने आशुतोष से कहा, “हम इतनी बड़ी फिल्म बना रहे हैं और आपके पास सिर्फ एक ही स्टार है, और आप उसी को साइड में कर रहे हैं।”
आशुतोष ने दी थी खास वजह
आमिर के अनुसार आशुतोष गोवारिकर ने उन्हें समझाया कि गांव में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति गांव का मुखिया होता है, इसलिए उस सीन में वही केंद्र में दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी के अनुसार आमिर का किरदार भुवन तब तक खास नहीं है, जब तक वह अंग्रेजों की शर्त को स्वीकार नहीं करता। आमिर ने बताया, आशुतोष ने कहा कि भुवन का महत्व तब बढ़ेगा, जब वह गांव के लोगों की ओर से अंग्रेजों की चुनौती स्वीकार करेगा। उसके बाद ही वह कहानी का केंद्र बनेगा।
छह महीने तक रोज सुना गया गायत्री मंत्र
‘लगान’ की शूटिंग के दौरान एक और दिलचस्प परंपरा भी रही। आमिर खान ने बताया कि फिल्म की पूरी टीम ने लगभग छह महीने तक रोज गायत्री मंत्र सुना। उन्होंने बताया कि अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा, जिन्होंने फिल्म में अर्जन का किरदार निभाया था, शूटिंग के लिए बस से लोकेशन पर जाते समय गायत्री मंत्र बजाते थे। आमिर ने कहा, कुछ लोग बस में अंग्रेजी गाने सुनना चाहते थे, लेकिन मैंने कहा कि हम गायत्री मंत्र ही सुनेंगे। इसके बाद छह महीने तक हर दिन शूटिंग लोकेशन पर पहुंचने से पहले हम सब इसे सुनते थे।
फिर से बने ‘लगान’ तो क्या बदलना चाहेंगे आमिर
जब आमिर खान से पूछा गया कि अगर उन्हें दोबारा ‘लगान’ करने का मौका मिले तो वह क्या बदलाव करना चाहेंगे, तो उन्होंने दो दिलचस्प बातें बताईं। उन्होंने कहा कि इस बार वह भुवन के किरदार को दाढ़ी-मूंछ के साथ निभाना चाहेंगे। आमिर के मुताबिक, मैं शुरू से ही चाहता था कि भुवन के पास दाढ़ी-मूंछ हो। फिल्म में सूखा पड़ा है, पानी तक नहीं है, तो फिर मेरा किरदार रोज शेव कैसे कर सकता है?
भाषा को लेकर भी था अलग विचार
आमिर ने बताया कि वह फिल्म में शुद्ध अवधी भाषा का इस्तेमाल करना चाहते थे, ताकि कहानी और ज्यादा प्रामाणिक लगे। हालांकि निर्देशक आशुतोष गोवारिकर का मानना था कि अगर पूरी फिल्म शुद्ध अवधी में होगी, तो देशभर के दर्शकों के लिए उसे समझना मुश्किल हो सकता है। आमिर ने कहा, “अगर मुझे दोबारा ‘लगान’ करने का मौका मिला तो मैं दाढ़ी-मूंछ के साथ और शुद्ध अवधी भाषा में भुवन का किरदार निभाना चाहूंगा।”
भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्म
साल 2001 में रिलीज हुई ‘लगान’ भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाती है। ब्रिटिश शासन के दौर में बसे एक काल्पनिक गांव की कहानी पर आधारित इस फिल्म में क्रिकेट मैच के जरिए लगान माफ कराने की कहानी दिखाई गई थी। फिल्म में आमिर खान के साथ ग्रेसी सिंह, पॉल ब्लैकथॉर्न, रेचल शेली और कई नए कलाकारों ने काम किया था।
आज भी ‘लगान’ को भारतीय सिनेमा की उन फिल्मों में गिना जाता है, जिसने कहानी, संगीत और प्रस्तुति के जरिए दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। फिल्म के 25 साल पूरे होने के मौके पर आमिर खान द्वारा साझा किए गए ये किस्से दर्शकों के लिए एक खास याद बन गए हैं।