निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने काम का किया बहिष्कार
पांच जिलों में बिजली के निजीकरण के विरोध में उत्तर प्रदेश के बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों ने आज काम का बहिष्कार किया।

लखनऊ। पांच जिलों में बिजली के निजीकरण के विरोध में उत्तर प्रदेश के बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों ने आज काम का बहिष्कार किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेश भर में सभी ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारियों व अभियन्ताओं ने पूरे दिन कार्य बहिष्कार कर काम बंद रखा। समिति के पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि जनहित में निजीकरण का फैसला वापस लें। यदि शांतिपूर्ण आन्दोलन का दमन करने के लिये किसी भी कर्मचारी का उत्पीड़न किया गया तो बिना और कोई नोटिस दिये अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार प्रारम्भ कर दिया जायेगा।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने आन्दोलन को और तेज करते हुए एलान किया है कि बिजली के निजीकरण के निर्णय के विरोध में 28 मार्च से बिजली कर्मचारी व अभियन्ता नियमानुसार कार्य करेंगे और नौ अप्रैल को 72 घंटे का प्रान्त व्यापी कार्य बहिष्कार करेगें। इस दौरान सारे प्रदेश में जिला व परियोजना मुख्यालायों पर प्रतिदिन विरोध सभायें जारी रहेंगी।
कार्य बहिष्कार के दौरान राजधानी लखनऊ सहित सभी जिलों में बिजली के दफ्तरों और विद्युत उपकेन्द्रों पर सन्नाटा पसरा रहा। अनपरा, ओबरा, पिपरी, पनकी, हरदुआगंज और पारीछा बिजली घरों के गेट पर तथा वाराणसी, गोरखपुर, इलाहाबाद, आजमगढ़, बस्ती, मिर्जापुर, फैजाबाद, गोण्डा, बरेली मुरादाबाद, गाजियाबाद, मेरठ, बुलन्दशहर, सहारनपुर, नोएडा, झांसी, बांदा, आगरा, अलीगढ़, कानपुर, केस्को और सभी जनपद मुख्यालयों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन एवं सभायें हुईं।
लखनऊ में पावर कारपोरेशन के मुख्यालय शक्ति भवन पर पांच हजार से अधिक कर्मचारियों व अभियन्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन कर अपने गुस्से का इजहार किया। शक्ति भवन स्थित कार्यालयों, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय एवं लेसा के दफ्तरों में सन्नाटा छाया रहा।


