पाषाण युग का सच!
क्या पाषाण युग में रहने वाले लोग दूरी तक मार करने वाली मिसाइल, अत्याधुनिक संचार प्रणाली, चिकित्सा विज्ञान में आधुनिक आविष्कार कर सकते हैं या इन सबसे बढ़कर परमाणु हथियार बना सकते हैं

क्या पाषाण युग में रहने वाले लोग दूरी तक मार करने वाली मिसाइल, अत्याधुनिक संचार प्रणाली, चिकित्सा विज्ञान में आधुनिक आविष्कार कर सकते हैं या इन सबसे बढ़कर परमाणु हथियार बना सकते हैं। यह सवाल इसलिए क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को नयी धमकी देते हुए कहा है कि 'अगले दो से तीन हफ्तों में, हम उन्हें पाषाण युग में वापस भेज देंगे, जहां वे वास्तव में हैं।' पाठक जानते हैं कि ट्रंप इससे पहले ईरान के लोगों को बेहद खतरनाक बताते हुए ईरान जैसे देश को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने की बात भी कह चुके हैं। ईरान के पास परमाणु हथियार है और इसकी वजह से अमेरिका समेत पूरी दुनिया पर बड़ा खतरा है, इसी बहाने के साथ इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमला बोला था और उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या कर दी थी।
जब इंसान सभ्यता की सीढ़ियों पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था, उस समय के कबीलाई जीवन में इसी तरह का व्यवहार दो कबीलों में किया जाता था। अपना वर्चस्व कायम करने के लिए दूसरे कबीले के नेता को मार दो और फिर उसके लोगों से कहो कि हमारा आधिपत्य स्वीकार कर लो। उससे भी पहले जो पाषाण युग हुआ था, जिसका ज़िक्र ट्रंप इस सदी में कर रहे हैं, उस युग में पत्थर से हथियार बनाने का हुनर इंसान ने सीख लिया था, जिसके बूते अब वो जंगली जानवरों से खुद को बेहतर बताने लगा था। जानवरों के पास उनके पंजे और नाखून ही हुआ करते थे, इंसान के पास पंजे, नाखून के साथ अब औजार भी थे। उनके बीच फर्क केवल इन्हीं औजारों का ही था। बाकी प्रवृत्ति दोनों की एक जैसी ही थी कि अपना अस्तित्व बचाने के लिए दूसरे को मार डालो। लड़ाई के नियम-कायदे नहीं होते थे, ताकत और ही मायने रखती थी। कोई कमजोर है, निहत्था है, लड़ाई के लिए तैयार है या नहीं, लड़ाई की जरूरत है या नहीं, ऐसे सवालों में उलझे बिना केवल अपने फायदे के लिए हमले होते थे। इस लिहाज से देखें तो आज ईरान नहीं अमेरिका पाषाण युग का प्रतिनिधित्व करता हुआ दिख रहा है और डोनाल्ड ट्रंप इस कबीले के मुखिया के तौर पर जहां मर्जी वहां हमला कर रहे हैं।
ईरान के साथ युद्ध पांचवे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, और अब तक डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू को सफलता नहीं मिली है। ऐसे में ट्रंप ने जब राष्ट्र के नाम संबोधन का ऐलान किया तो सभी को लगा कि शायद युद्ध खत्म करने की बात कही जाएगी, इस वजह से शेयर बाजार भी चढ़ गया। लेकिन ट्रंप के भाषण में अब तक सोशल मीडिया और मीडिया में कही गई बातों का दोहराव ही था। यह बिल्कुल साफ़ हो गया कि ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका के पास कोई रणनीति नहीं है और वह पूरी तरह से इज़रायल लॉबी की गिरफ़्त में है। इस युद्ध के कारण दुनिया में पहले ही काफी तबाही हो चुकी है और अब नजर आ रहा है कि युद्ध लंबा खिंचेगा और भारत समेत दुनिया के अधिकतर देशों के लिए आर्थिक चुनौतियां गंभीर होती जायेंगी। ऐसे में मोदी सरकार को अब वाकई संकट से निपटने के लिए कमर कस लेना चाहिए।
अपने भाषण में ईरान को बर्बाद करने का दावा करते हुए ट्रंप ने कहा कि उसकी नौसेना 'नष्ट' हो गई है और उसकी वायुसेना 'खंडहर' हो गई है। उनके अधिकांश नेता अब मर चुके हैं। मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने की उनकी क्षमता में भारी कमी आई है, और उनके हथियार, कारखाने और रॉकेट लॉन्चर टुकड़े-टुकड़े हो रहे हैं। जब यह सब कहा जा रहा था, उस समय ईरान ने इजरायल पर कई मिसाइलें दागीं। ईरानी सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि अभी अमेरिका हमारे बारे में पूरी तरह जानता नहीं है। वैसे ट्रंप ने अपने बड़बोलेपन में पूर्व राष्ट्रपतियों का मजाक भी उड़ाया। उन्होंने कहा कि प्रथम विश्व युद्ध में अमेरिकी भागीदारी एक वर्ष, सात महीने और पांच दिन तक चली। द्वितीय विश्व युद्ध तीन वर्ष, आठ महीने और 25 दिन तक चला। कोरियाई युद्ध तीन वर्ष, एक महीने और दो दिन तक चला। वियतनाम युद्ध 19 वर्ष, पांच महीने और 29 दिन तक चला। इराक युद्ध आठ वर्ष, आठ महीने और 28 दिन तक चला। हम इस सैन्य अभियान में 32 दिनों से हैं। और ईरान पूरी तरह से तबाह हो चुका है और वास्तव में अब कोई खतरा नहीं है। यानी पहले के अमेरिकी नेतृत्व ने लंबे युद्धों में हिस्सा लिया, जबकि ट्रंप केवल 32 दिनों की लड़ाई लड़ रहे हैं, हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि युद्ध अगले 'दो से तीन सप्ताह' तक चलेगा। यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरानी बिजली प्लांट पर हमला करेगा। शायद ट्रंप अब तक समझे नहीं कि ईरान ऐसी धमकियों से पीछे हटने वाला नहीं है।
ट्रंप के संबोधन से पहले ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिकी जनता को संबोधित एक खुला पत्र लिखकर उनसे अपील की है कि वे 'गढ़ी हुई कहानियों' से परे देखें और यह सवाल करें कि मौजूदा युद्ध वास्तव में किसके हितों की सेवा कर रहा है। राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने लिखा, 'अमेरिकी लोगों के हितों में से कौन से हित वास्तव में इस युद्ध द्वारा पूरे हो रहे हैं? क्या निर्दोष बच्चों का नरसंहार, कैंसर की दवा बनाने वाली कंपनियों का विनाश, या किसी देश को 'पत्थर के युग' में वापस भेजने की डींग हांकना, अमेरिका की वैश्विक प्रतिष्ठा को और नुकसान पहुंचाने के अलावा कोई अन्य उद्देश्य पूरा कर रहा है?' उन्होंने कहा, 'ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे-जिसमें ऊर्जा और औद्योगिक सुविधाएं शामिल हैं, पर हमला सीधे ईरानी लोगों को निशाना बनाता है। यह युद्ध अपराध के अलावा और कुछ नहीं है और इसके परिणाम ईरान की सीमाओं से कहीं आगे तक फैलते हैं। ये अस्थिरता पैदा करते हैं, मानवीय और आर्थिक लागत बढ़ाते हैं तथा तनाव के चक्रों को जारी रखते हैं, जो वर्षों तक जनता में अलगाववाद और आक्रोश के बीज बोते रहेंगे। यह शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि रणनीतिक भ्रम और स्थायी समाधान हासिल करने में असमर्थता का संकेत है।'
इधर सुप्रीम लीडर मोज़तबा खामेनेई ने बुधवार को प्रकृति दिवस पर कहा कि ईरानी राष्ट्र पूरे देश में आशा के बीज बोएगा, ताकि ईश्वर की कृपा से, उनमें से प्रत्येक आने वाले वर्षों में भरपूर फल दे। सभी शहरों और गांवों के लोग प्रकृ ति दिवस से शुरू होकर वसंत ऋतु के अंत तक फलदार पेड़ लगाएं। ऐसे समय में जब अमेरिकी-ज़ायोनी शत्रु ने हमारी प्यारी मातृभूमि के प्राकृ तिक पर्यावरण और पारिस्थितिक क्षेत्रों पर भी हमला किया है, विकास के उद्देश्य से किए गए कोई भी प्रयास आवश्यक कार्य हैं।
अब दुनिया खुद तय करे कि पाषाण युग की मानसिकता ट्रंप की है या ईरानियों की है।


