अंधेरे को उजाला बताने के उल्टे दिन
आठ अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जिस रामलीला मैदान के मंच से सार्वजनिक सभा की थी, उसका शुद्धिकरण 11 अगस्त को किया गया था।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ उत्तराखंड में दलित होने के कारण जो भेदभाव हुआ, उस पर 29 अगस्त को राहुल गांधी ने आवाज उठाई और बताया कि छुआछूत कानूनन अपराध है, ऐसा करने वालों पर तुरंत एफआईआर दर्ज हो, तो 30 अगस्त को राहुल गांधी के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज करवा दी गई। कहा गया कि उन्होंने दलितों की भावना का अपमान किया है। मोदी सरकार में किस तरह विनाश को विकास, तकलीफों भरे दिन को अच्छे दिन, तानाशाही प्रवृत्ति को लोकतांत्रिक पहचान यानी अंधेरे को उजाला कहा जा रहा है, यह उसी का एक उदाहरण है।
दिसम्बर 2024, संसद के शीतकालीन सत्र में जब गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि 'अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर बोलना फैशन हो गया है इतना नाम भगवान का लेते तो स्वर्ग मिल जाता।Ó तब इस बयान के बाद ही देश को समझ जाना चाहिए था कि भाजपा के मन में संविधान के लिए कोई सम्मान नहीं है और दलितों को वह बराबर मानती है। वेदों से लेकर मनुस्मृति तक हिंदू समाज के लिए निर्धारित वर्णव्यवस्था पर ही भाजपा का यकीन है। हल्द्वानी में यही नजर आया।
आठ अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जिस रामलीला मैदान के मंच से सार्वजनिक सभा की थी, उसका शुद्धिकरण 11 अगस्त को किया गया था। कुछ लोगों ने हवन-यज्ञ और 'शुद्धिकरणÓ कार्यक्रम किया। कार्यक्रम में गंगाजल का छिड़काव भी किया गया। कांग्रेस ने इसे खड़गे की दलित पहचान से जोड़ते हुए भाजपा और आरएसएस की कथित मानसिकता पर सवाल उठाए। वहीं भाजपा की ओर से कहा गया कि रैली के बाद मैदान में गंदगी थी और धार्मिक स्थल पर आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे, इसलिए वहां धार्मिक अनुष्ठान किया गया। आपत्तिजनक नारों को समुदाय विशेष से जोड़ा गया।
जबकि 13 अगस्त को खुद श्री खड़गे ने राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया था। तब उन्होंने कहा था कि उन्हें आज तक किसी के संरक्षण की जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन हल्द्वानी की घटना ने उन्हें अस्पृश्यता का अहसास कराया है। खड़गे ने कहा था कि रैली में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और उन्होंने अपने भाषण में किसी जाति या धर्म का नाम नहीं लिया था। इसके बावजूद उनके जाने के बाद मंच पर हवन किया गया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा था कि भाजपा इस तरह की किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं करती और इस घटना की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा था कि अगर ऐसी घटना हुई है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
फिलहाल देश को आज की तारीख तक पता नहीं है कि इस मुद्दे पर भाजपा ने कोई जांच कराई या नहीं। उत्तराखंड और केंद्र दोनों जगह भाजपा की ही सरकारें हैं, केन्द्रीय मंत्री या भाजपा अध्यक्ष चाहते तो कुछ मिनटों में सारी जांच-पड़ताल शुरु हो जाती, लेकिन 29 अगस्त तक भी खड़गेजी के साथ हुए भेदभाव पर कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई, तो फिर कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक प्रेस कांफ्रेंस की। इसमें उन्होंने न केवल मल्लिकार्जुन खड़गे बल्कि टीकाराम जूली और जीतनराम मांझी जैसे नेताओं के साथ घटी घटनाओं का भी जिक्र किया, जिसमें उनके मंदिर जाने के बाद शुद्धिकरण किया गया था। राहुल गांधी ने बताया था कि स्कूलों में केवल दलित होने के आधार पर छोटे बच्चों से झाड़ू लगवाने या शौचालय साफ करवाने का काम करवाया जाता है। चाय की गुमटियों में दलितों को कागज के कप में चाय दी जाती है। दलितों को उसी कुएं से पानी नहीं लेने दिया जाता, जहां तथाकथित ऊंची जातियों के लोग आते हैं। दलित दूल्हा घोड़ी पर नहीं चढ़ सकता, अगर चढ़े तो उसे सुरक्षा उपाय करने पड़ते हैं। इन सारी घटनाओं को केवल मुंहजुबानी राहुल गांधी ने नहीं कहा, बल्कि उनके वीडियो और तस्वीरें भी दिखा दीं।
भाजपा के मन में अगर संविधान को पूरी तरह लागू करने की भावना होती और दलितों के साथ चले आ रहे सदियों पुराने भेदभाव को खत्म करने की इच्छाशक्ति या नीयत होती तो वह खुद इस मामले में राहुल गांधी का साथ देती। जैसे कांग्रेस पार्टी ने 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित करने में भाजपा का साथ दिया, क्योंकि मुद्दा सही था। वैसे ही भाजपा समेत बाकी सभी दलों को दलित उत्पीड़न के मुद्दे को केंद्र में लाने पर राहुल गांधी का साथ देना चाहिए था। लेकिन मोदी सरकार ने फिर से उल्टी गंगा बहाने की कोशिश की।
हल्द्वानी पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में आरोप है कि राहुल गांधी ने 29 अगस्त को दिल्ली में प्रेस कॉन्ल्लफ्रेंस के दौरान हल्द्वानी में हुए 'शुद्धीकरणÓ कार्यक्रम को छुआछूत और दलितों के ख़िलाफ़ भेदभाव के तौर पर पेश किया। शिकायतकर्ता अमित कुमार का कहना है कि इससे अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुईं, क्योंकि उसके मुताबिक़ उस सफ़ाई और हवन में अनुसूचित जाति के लोग भी शामिल थे। शिकायतकर्ता का दावा है कि श्री खड़गे की रैली के बाद वहां गंदगी और शराब की बोतलें मिली थीं। इसके बाद 11 अगस्त को स्थानीय लोगों और खुद शिकायतकर्ता ने मैदान की सफाई और वहां धार्मिक अनुष्ठान कराया था। शिकायतकर्ता ने खुद को अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित बताते हुए कहा कि कार्यक्रम में अलग-अलग वर्गों के लोगों के साथ अनुसूचित जाति के लोग भी शामिल थे और इस कार्यक्रम का खड़गे की जाति से कोई संबंध नहीं था। वहीं श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के सदस्य विनोद आर्य ने शुद्धिकरण कार्यक्रम का बचाव किया है। उनका कहना है कि सनातन परंपरा के अनुयायी के रूप में जिस स्थान पर भगवान श्रीराम की पूजा और धार्मिक आयोजन होते हैं, वहां स्वच्छता सुनिश्चित करना उनका अधिकार और कर्तव्य है। आर्य ने कहा कि वह खुद दलित हैं और उनके साथ दलित समुदाय के अन्य लोग भी इस गतिविधि में शामिल थे। उनके मुताबिक उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया।
इस पूरे प्रकरण में नजर आ रहा है कि राहुल गांधी को घेरने के लिए भाजपा ने दलित अपमान जैसे संवेदनशील मुद्दे को राजनीति का हथियार बनाया है। राहुल गांधी पर पहले भी पचासों एफआईआर और मानहानि के मुकदमे हो चुके हैं। उनकी संसद सदस्यता तक मोदी सरकार ने खत्म करने की चालाकी दिखा दी, लेकिन इन सब के बावजूद राहुल गांधी के उठाए मुद्दों का जवाब देने के लिए भाजपा खुद को तैयार नहीं कर पाई है, क्योंकि उसके लिए संविधान मायने ही नहीं रखता।


