एक और स्वयंभू भगवान के काले कारनामे
अशोक खरात की कहानी भी राम रहीम और आसाराम जैसे लोगों से अलग नहीं है।

धर्म के नाम पर बलात्कार, हत्या, ब्लैकमेलिंग करने जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने वाले ढोंगी बाबाओं की सूची में अब एक नया नाम नासिक के अशोक खरात का जुड़ गया है। अशोक खरात की कहानी भी राम रहीम और आसाराम जैसे लोगों से अलग नहीं है। धर्म के नाम पर तकलीफ में आए लोगों को फंसाना, उनसे धन ऐंठना और महिलाओं का यौन शोषण करना। अलग बरसों बरस ये अपराध होते रहें और ढोंगी व्यक्ति खुद को भगवान बताकर चमत्कार दिखाता रहे तो यह न स्वस्थ समाज की पहचान है, न स्वस्थ राजनीति और प्रशासन की। क्योंकि ताकतवर लोगों के प्रोत्साहन के बिना ठगी और अपराध की ऐसी दुकानें चल ही नहीं सकतीं। हो सकता है कि अभी पुलिस हिरासत में आए इस अपराधी को कुछ वक्त तक सलाखों के पीछे ही रहना पड़े, लेकिन इस समय ज्यादा चिंता की बात यह है कि समाज जिस तरह चमत्कारों, अंधविश्वासों और अतार्किक प्रथाओं की सलाखों में कैद है, उससे वह कब आजाद हो पाएगा।
कितनी बड़ी विडंबना है कि जिस महाराष्ट्र में महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, डॉ. अंबेडकर जैसे लोगों ने नए क्रांतिकारी विचारों की अलख जलाई, वहां अशोक खरात लोगों को अंधविश्वास की आग फैलाने का मौका मिला। नरेन्द्र दाभोलकर जैसे लोग अंधश्रद्धा के खिलाफ आवाज उठाएं तो उनकी हत्या कर दी जाए और अशोक खरात जैसे लोग अंधश्रद्धा के बूते खुद को गॉडमैन कहलवाएं। यह सब इसलिए ही है क्योंकि सरकारें भी ऐसी बातों पर तभी ध्यान देती हैं, जब बात बहुत आगे बढ़ जाती है। यूं तो देश का कोई भी राजनैतिक दल इस किस्म के बाबाओं से खुद को दूर नहीं रख पाया है, हर दल में ऐसे नेता मिल जाएंगे, जो ढोंगी लोगों को बढ़ावा देते रहे हैं। लेकिन भाजपा के शासनकाल में यह समस्या कुछ ज्यादा बढ़ चुकी है, यह मानने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। अभी भी कई ऐसे प्रकरण हमारे सामने हैं जहां कोई मुख्यमंत्री किसी कथावाचक की आरती उतार रहा है या रही है। या मोदी शासनकाल में हनुमानजी से बात करने का चमत्कार दिखाने वाला कोई बाबा करोड़ों-अरबों में खेलने लगे।
सवाल सीधा सा है कि भगवदभक्ति में लगे लोगों को भौतिक चकाचौंध की दरकार क्यों होनी चाहिए। लेकिन इस सवाल की परतें खोलें तो समझ आता है कि ऐसे लोगों को न भगवदभक्ति से मतलब है, न धर्म की रक्षा से, इन्हें तो अपने उन राजनैतिक और व्यापारी आकाओं की सेवा करनी है, जिनके काले धन को धर्म के धंधे से ये सफेद करते हैं। अशोक खरात का मामला भी कुछ ऐसा ही लगता है।
चमत्कारी बाबा बताने वाला यह शख्स अब महिलाओं के साथ शारीरिक शोषण, ब्लैकमेलिंग और करोड़ों की बेनामी संपत्ति बनाने के आरोपों में घिरा हुआ है। दरअसल 29 दिसंबर 2025 को अशोक खरात खुद वावी पुलिस स्टेशन पहुंचा और उसने शिकायत दर्ज कराई कि कुछ लोग उसके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं। शुरुआत में मामला ब्लैकमेलिंग का लगा, लेकिन जब पुलिस ने जांच शुरू की तो मोबाइल डेटा और साइबर जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिला। जिन लोगों पर आरोप लगाए गए थे, उन्हें भी अदालत से राहत मिल गई। यहीं से पुलिस को शक हुआ कि मामला कुछ और ही है। करीब डेढ़ महीने बाद 18 फरवरी 2026 को शिर्डी से एक और शिकायत सामने आई। एक महिला ने आरोप लगाया कि उसे एआई से तैयार अश्लील फोटो भेजकर धमकाया गया। इसी दौरान एक अहम गवाह सामने आया, जिसने पुलिस को कुछ ऐसे वीडियो दिखाए जिनमें कई महिलाओं के साथ अशोक खरात की आपत्तिजनक हरकतें नजर आईं।
आरोप है कि वह महिलाओं को धार्मिक झांसा देकर अपने जाल में फंसाता था और फिर उनका शोषण करता था। गवाह पहले डरा हुआ था, लेकिन पुलिस की सुरक्षा मिलने के बाद उसने ये सबूत सौंप दिए। मामला आगे बढ़ा तो 10 मार्च 2026 को अशोक खरात के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया और एयरपोर्ट पर उसे रोक दिया गया। फिर फड़नवीस सरकार ने 13 मार्च को एसआईटी गठित की और लगातार नए खुलासे सामने आने लगे। 17 मार्च को सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में एक महिला ने बताया कि अशोक खरात ने खुद को दैवी शक्तियों वाला बताकर उसे अनुष्ठान के नाम पर अपने ऑफिस बुलाया। वहां उसे नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया गया और उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया।
इस शिकायत के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसके ठिकानों पर छापेमारी की गई, जहां से कई अहम सबूत मिले। आरोपी के पास से लाखों रुपये नकद, लैपटॉप, डिजिटल रिकॉर्डिंग डिवाइस और हथियार तक बरामद किए गए हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह भी सामने आया कि आरोपी ने अलग-अलग जगहों पर करोड़ों की संपत्ति जमा कर रखी है। नासिक, शिर्डी, पुणे और पनवेल जैसे शहरों में जमीन, बंगले और फार्महाउस उसके नाम या बेनामी रूप से जुड़े हुए पाए गए। कुल संपत्ति का अनुमान करीब 40 करोड़ रुपये से ज्यादा लगाया जा रहा है।
पुलिस का आश्वासन मिलने के बाद अब कई पीड़िताएं सामने आई हैं और जादूटोना, यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप खरात पर लगे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि एनसीपी अजित गुट की नेता और महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर का भी एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो अशोक खरात के पैर धोती दिखाई दे रही हैं। हालांकि अब देवेन्द्र फड़नवीस ने उचित कदम उठाते हुए चाकणकर से इस्तीफा ले लिया है। वहीं चाकणकर का भी कहना है कि वो आरोपी को 2019 से जानती थीं और उसके काले कारनामों से परिचित नहीं थी। लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि किसी पुरुष के पैर धोने जैसे काम क्या राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष को करना चाहिए। क्या इससे गैरबराबरी का संदेश नहीं जाता है।
बहरहाल अब अशोक खरात तो पुलिस हिरासत में है, लेकिन क्या ऐसे लोगों की गिरफ्तारी और सजा के बावजूद समाज से अंधविश्वास खत्म हो पाएगा, यह समाज को खुद सोचना होगा। क्योंकि सत्ताधारी तो अपने मुनाफे के लिए नाग हो या सांप किसी को दूध पिलाने से बाज़ नहीं आएंगे।


