इमरान के लिए आगे आए सुनील, कपिल
क्रिकेट को भद्रजनों का खेल क्यों कहा जाता है, यह बात 14 पूर्व कप्तानों ने साबित कर दिखाई है।

क्रिकेट को भद्रजनों का खेल क्यों कहा जाता है, यह बात 14 पूर्व कप्तानों ने साबित कर दिखाई है। पूर्व प्रधानमंत्री और क्रिकेटर इमरान ख़ान के स्वास्थ्य को लेकर पांच देशों के 14 पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कप्तानों ने पाकिस्तानी सरकार को पत्र लिखा है। इन पूर्व कप्तानों ने पाकिस्तान की सरकार से मांग की है कि इमरान ख़ान के साथ अच्छा व्यवहार किया जाए और उनका बेहतर तरीक़े से इलाज कराया जाए। अच्छी बात ये है कि इस पत्र के हस्ताक्षरकर्ताओं में सुनील गावस्कर और कपिल देव भी हैं, और साथ में सौरव गांगुली ने भी इमरान खान के लिए चिंता जाहिर की है। वर्ना बीते कुछ वक्त से भारत और पाकिस्तान के बीच मैच का भी ऐसा राजनीतिकरण किया गया है जिसे देखकर अफसोस होता है। दोनों देशों के बीच दुश्मनी का फायदा हमेशा से राजनेताओं को होता रहा है, इसलिए इसे खत्म करने की जगह बढ़ाया जाता रहा है। लेकिन यह देखकर दुख होता है कि जनता कितने जल्दी झांसे में आ जाती है। पुलवामा, पहलगाम हमले के बाद दोनों देशों के बीच जो सामान्य शिष्टाचार के तहत बात होती थी, वह भी बंद है। लेकिन भारत-पाक के मैच में सट्टेबाजी और विज्ञापनों से होने वाली कमाई को दोनों देश नहीं खोना चाहते, इसलिए जानी दुश्मनी दिखाने के बावजूद मैच खेले जा रहे हैं। उस पर तुर्रा यह कि क्रिकेट खिलाड़ी मैदान में एक-दूसरे से हाथ नहीं मिलाएंगे। खिलाड़ी अगर ये कहें कि हम मैच फीस नहीं लेंगे, तब तो उनकी देशभक्ति समझ आए, लेकिन कमाई भी करेंगे और खेल भावना का परिचय भी नहीं देंगे, यह कैसा दोहरा चरित्र है। बहरहाल, नए दौर के खिलाड़ियों ने खेल भावना न दिखाकर जितना निराश किया है, पुराने दौर के दिग्गज खिलाड़ियों ने उससे कहीं ज्यादा उम्मीद से भर दिया है।
भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर और कपिल देव, ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एलन बॉर्डर, स्टीव वॉ, ईयान चैपल, किम ह्यूज़ और ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान बेलिंडा क्लार्क, इंग्लैंड के माइक अथर्टन, नासिर हुसैन, माइक ब्रेयरली और डेविड गॉवर, वेस्ट इंडीज़ के क्लाइव लॉयड और न्यूज़ीलैंड के जॉन राइट ने पाकिस्तान की सरकार को अपने हस्ताक्षर के साथ पत्र भेजा है, जिसमें कहा गया है कि 'हम अपने-अपने देशों की राष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के पूर्व कप्तान हैं और इमरान ख़ान के साथ हुए कथित व्यवहार और जेल के हालात को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। इमरान ख़ान पाकिस्तान के पूर्व कप्तान होने के साथ-साथ विश्व क्रिकेट के एक दिग्गज खिलाड़ी भी हैं। कप्तान के रूप में उन्होंने 1992 क्रिकेट वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को ऐतिहासिक जीत दिलाई। एक ऐसी जीत जो कौशल, दृढ़ता, नेतृत्व और खिलाड़ियों वाली भावना पर आधारित थी और जिसने पीढ़ियों को प्रेरित किया। हममें से कई लोगों ने उनके ख़िलाफ़ खेला, उनके साथ मैदान साझा किया, या फिर उनकी ऑलराउंड क्षमता, व्यक्तित्व और प्रतिस्पर्धी जज़्बे की वजह से उन्हें अपना आदर्श माना। वह आज भी दुनिया के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों और कप्तानों में गिने जाते हैं, जिन्हें खिलाड़ी, प्रशंसक और प्रशासक सभी सम्मान देते हैं। क्रिकेट के अलावा इमरान ख़ान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में भी काम किया। राजनीतिक नज़रिए से अलग उन्हें अपने देश के सबसे ऊंचे पद पर लोकतांत्रिक तरीक़े से चुने जाने का सम्मान मिला है।'
पत्र में आगे उनकी सेहत को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है, और ख़ासकर हिरासत में रहते हुए उनकी नज़र तेज़ी से ख़राब होने की बात कही गई है। इस पत्र में लिखा है, 'क्रिकेटर होने के नाते हम निष्पक्षता, सम्मान और खेल भावना के उन मूल्यों को समझते हैं जो मैदान की सीमाओं से आगे जाते हैं। हम मानते हैं कि इमरान ख़ान जैसी शख़्िसयत के साथ गरिमा और बुनियादी मानवीय संवेदनाओं के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए।'
इस पत्र में शाहबाज सरकार से तीन मांगें की गई हैं। पहली मांग इमरान ख़ान की इच्छा के मुताबिक़ योग्य विशेषज्ञ डॉक्टरों से उनका तुरंत और लगातार इलाज कराया जाए। दूसरी मांग, अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से जेल के मानवीय और सम्मानजनक हालात बनाए जाएं, जिनमें परिवार के सदस्यों से नियमित मुलाक़ात शामिल हो। तीसरी मांग, बिना किसी देरी या बाधा के निष्पक्ष और पारदर्शी क़ानूनी प्रक्रिया तक उनकी पहुंच सुनिश्चित की जाए। पत्र में लिखा है कि, 'क्रिकेट हमेशा से देशों के बीच पुल का काम करता रहा है। मैदान की प्रतिद्वंद्विता स्टंप्स उखड़ने के साथ ख़त्म हो जाती है और सम्मान बना रहता है। इमरान ख़ान ने अपने पूरे कॅरियर में इसी भावना को जिया। हम अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि वे आज भी मर्यादा और न्याय के उन्हीं सिद्धांतों को निभाएं। यह अपील बिना किसी क़ानूनी प्रक्रिया में हस्तक्षेप के पूरी खेलभावना और मानवता के आधार पर की जा रही है।'
शाहबाज सरकार को अगर अपनी वैश्विक छवि की जरा भी चिंता होगी तो वह इस पत्र में लिखी बातों का सम्मान करेगी। वर्ना अपने राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी से कैसा अमानवीय व्यवहार किया जाता है, इसकी कई मिसालें पाकिस्तान पहले भी पेश कर चुका है। हालांकि अफसोस की बात है कि पत्र के हस्ताक्षरकर्ताओं में पाकिस्तान के एक भी पूर्व खिलाड़ी का नाम नहीं है।
विदित है कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और देश को एकमात्र विश्वकप दिलाने वाले क्रिकेट खिलाड़ी इमरान खान पाकिस्तान की अडियाला जेल में बंद हैं। उन पर अलग-अलग मामलों में कुल 31 साल की सजा हुई है। पाकिस्तान में सेना और आईएसआई के खिलाफ जाने वाले राजनेताओं का जो बुरा हश्र होता रहा है, इमरान खान उसी की एक मिसाल हैं। खेल से हासिल अपनी लोकप्रियता को उन्होंने राजनीति के मैदान में भुनाना चाहा और इसमें उन्हें सफलता भी मिली। लेकिन खेल की तरह राजनीति की रणनीतियां नहीं होती हैं, लिहाजा इमरान खान जितनी जल्दी प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे, उतनी ही तेजी से उनका बतौर राजनेता पतन हुआ। अब हालत ये है कि इमरान खान को एकाकी कैदी बनाकर रखा गया और काफी दिनों तक उनकी कोई खोज-खबर नहीं रही। बीच में कई खबरें ऐसी आईं जिनमें उनकी जान पर खतरा बताया गया। इस बीच पाकिस्तान में उनकी बहन अलीमा खानम ने भी इमरान समर्थकों के साथ मोर्चा खोला, तब जाकर उनकी तबियत पर खबरें बाहर आईं। पता चला कि उनकी दाईं आंख में सिफ़र् 15 प्रतिशत रोशनी ही बची है।
हालांकि गृह मंत्री मोहसिन नकवी दावा कर रहे हैं कि इमरान खान को बिल्कुल अच्छे से रखा जा रहा है और उनके इलाज में देरी उनकी बहन की वजह से हुई है। बहरहाल, सरकार ने फैसला लिया है कि इमरान ख़ान को उनकी आंखों के इलाज के लिए एक 'स्पेशल मेडिकल इंस्टीट्यूशनÓ में शिफ्ट किया जाएगा। इसकी एक विस्तृत रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी।Ó अब देखना होगा कि पाक सरकार इमरान खान के साथ आगे क्या सलूक करती है।


