हवाई हादसे पर गंभीर सवाल
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक उड़ान में हुए हादसे और सऊदी अरब में उसकी आपातकालीन लैंडिंग ने पूरी दुनिया में नयी चिंताओं को जन्म दे दिया है।

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक उड़ान में हुए हादसे और सऊदी अरब में उसकी आपातकालीन लैंडिंग ने पूरी दुनिया में नयी चिंताओं को जन्म दे दिया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बिना देर किए 9/11 का जिक्र कर दिया। तो वहीं नेतन्याहू से बात करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भी आतंकवादी घटना की तरफ इशारा किया और चूंकि इस पूरे हादसे में जिसकी जान जोखिम में पड़ी और जिसने विमान में सवार 174 लोगों की जान बचाई, वह भारतीय पायलट था, लिहाजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी भारत के गौरव वाला नजरिया जाहिर कर दिया और शायद नेतन्याहू से गहरी दोस्ती का तकाजा है तो उन्होंने भी 9/11 की बात का समर्थन कर दिया। इसमें कोई दो राय नहीं कि फ्लाईदुबई के कप्तान स्मित मच्छर ने अपनी सूझबूझ से एक बड़े हादसे को रोक दिया। लेकिन जिस तरह से बेंजामिन नेतन्याहू, डोनाल्ड ट्रंप और उनके पीछे नरेन्द्र मोदी के बयान आए हैं, उसके बाद इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया में हिंदू-मुसलमान और आतंकवाद वाले नजरिए से पोस्ट की जा रही हैं, उससे समूचे प्रकरण में कई झोल दिखाई दे रहे हैं और कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
पाठकों को बता दें कि बुधवार 30 सितंबर दुबई से तेल अवीव जाने वाली फ्लाईदुबई की फ्लाइट उड़ान भरने के करीब दो घंटे बाद अपना रास्ता बदलकर सऊदी अरब मुड़ गई और वहीं लैंडिंग की। जानकारी मिली कि कॉकपिट में एक पायलट ने दूसरे पर हमला कर दिया। हमला करने वाला पायलट ओमान का मूल वासी है, और मुसलमान है, जबकि जिस पायलट पर हमला हुआ, वो भारतीय हैं और उनका नाम स्मित मच्छर है। स्मित मच्छर पर चाकू से हमला हुआ तो उन्होंने पहले 7700 का नॉर्मल इमरजेंसी कोड भेजा और उसके बाद 7500 कोड भेजा, जो अनाधिकृत दखलंदाजी का संकेत है, यानी इसमें अपहरण जैसी आशंका दिखाई देती है। इसके बाद इजरायली लड़ाकू विमानों को अलर्ट कर दिया गया। वहीं विमान कुछ क्षणों में ही कई फीट एकदम से नीचे आ गया। बताया जा रहा है कि स्मित मच्छर ने भीतर से कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, और चीखने की आवाज और खून बहता देख विमान के क्रू सदस्य और कुछ यात्री भीतर कॉकपिट के भीतर घुसे। उनमें से एक ने हमलावर पायलट को पीछे से पकड़कर अपने काबू में किया, एक डेंटिस्ट ने कैप्टन स्मित के बहते हुए खून को रोकने की कोशिश की, फिर फ्लाईदुबई के दो अन्य पायलट जो उसी विमान में सवार थे, उन्होंने विमान की सऊदी अरब में आपातकालीन लैंडिंग करवाई।
कैप्टन स्मित मच्छर को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है और इस बीच प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सऊदी अरब में भारतीय दूतावास ने घायल पायलट के परिजनों से बात कर ली है। अब इस घटना से जुड़ी कई आशंकाएं प्रकट की जा रही हैं, कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनके बाद घटना के कारण, हालात और टाइमिंग पर सवाल खड़े होते हैं। सबसे पहला सवाल तो यही है कि आखिर कॉकपिट के भीतर चाकू के साथ को-पायलट किस तरह पहुंचा। उसके हमले का मकसद क्या था। क्या दोनों पायलट्स के बीच कोई विवाद या बहस हुई, जिसका ऐसा अंजाम हुआ। अगर यह गुस्से में किया गया हमला है, तब भी यात्री सुरक्षा के लिहाज से काफी चिंताजनक है, क्योंकि पायलट्स को हर हाल में शांत रहना जरूरी है। हमलावर की मदद के लिए क्या कोई और भी उसी विमान में मौजूद था। बताया जा रहा है कि हमला करने वाला पायलट ओमान का रहने वाला था। इजरायली चैनल 16 के विदेशी मामलों के संपादक ने फ्लाईदुबई के कुछ कर्मियों से बात की, जिन्होंने अपना नाम न बताने की शर्त पर संदिग्ध पायलट के बारे में कहा कि उसका व्यवहार बहुत अजीब था, खासकर धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर। जैसे, वह बहुत ज़्यादा प्रार्थना करता था और महिलाओं से हाथ नहीं मिलाता था। यहां साफ तौर पर संदिग्ध पायलट को कट्टर धार्मिक व्यक्ति के तौर पर पेश किया जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या फ्लाईदुबई को यह बात पहले नहीं पता थी। सवाल यह भी है कि इस पायलट को दुबई-इजरायल मार्ग पर उड़ान भरने की मंज़ूरी कैसे मिली, क्योंकि राजनीतिक मतभेदों के कारण इज़रायल और ओमान के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं।
घटना के दौरान के जो वीडियो सामने आए हैं, उसमें एक में यह दिखाया जा रहा है कि कुछ यात्री बचाने के लिए कॉकपिट की तरफ बढ़ रहे हैं। जब विमान रुका रहे या बिना बाधा के उड़ता रहे, तब तो यात्री विमान में इधर से उधर चल सकते हैं, लेकिन अगर विमान तेजी से नीचे आ रहा था, तो किस तरह यात्री आराम से कॉकपिट की तरफ बढ़ रहे हैं, यह सोचने वाली बात है। या तो वीडियो झूठा है या फिर बचाने की कहानियों में झोल है। एक वीडियो इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का है, जिसमें हमलावर को पकड़कर विमान को संभालने वाले एक व्यक्ति से वे मिल रहे हैं। उसके कपड़ों पर खून के धब्बे हैं और वह उसी हाल में प्रधानमंत्री से गले मिल रहा है। ऐसा तो नहीं है कि विमान के उतरते ही नेतन्याहू ने रन वे पर ही उस व्यक्ति से मुलाकात की। वह बाकायदा सऊदी अरब से इजरायल पहुंचा, लेकिन उसके कपड़े खून में ही सने रहे। नेतन्याहू ने उसे हीरो कहा और उसने कहा कि हम शेरों का देश हैं। क्या यह सब नेतन्याहू के प्रचार तंत्र ने आगामी चुनाव में सहानुभूति बटोरने के लिए किया है, यह विचारणीय है।
नेतन्याहू से मिलकर इस व्यक्ति ने यह भी बताया कि वह प्लंबर यानी नल साज़ है, उसने टीवी कार्यक्रम एयर डिजास्टर्स देखकर विमान उड़ाने से जुड़े कुछ बुनियादी सिद्धांत सीखे थे। यह बात नेतन्याहू ने ट्रंप को भी बताई और ट्रंप ने पत्रकारों से इस इजरायली यात्री की असाधारण वीरता के बारे में कहा, 'कि वह एयर डिजास्टर्स कार्यक्रम बहुत देखता है और उसे देखकर उसने कुछ हद तक विमान उड़ाना सीख लिया। ट्रंप के मुताबिक, जब इस यात्री ने विमान संभाल लिया तो विमान के पिछले हिस्से में मौजूद अतिरिक्त पायलट और सुरक्षा कर्मी बाद में कॉकपिट तक पहुंचे और विमान का नियंत्रण अपने हाथों में लिया। ट्रंप ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह सबसे अविश्वसनीय कहानी है।Ó हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह केवल उन्हें मिली जानकारी बता रहे थे और उन्होंने इन तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है।
कितनी अजीब बात है कि एक गंभीर विमान हादसा टला और इसकी विस्तृत जांच पर ध्यान देने की जगह बेंजामिन नेतन्याहू डोनाल्ड ट्रंप को कहानियां सुना रहे हैं और ट्रंप समझ नहीं पा रहे कि उन पर भरोसा किया जाए या नहीं। दुनिया के सबसे ताकतवर नेता होने का दावा करने वाले ट्रंप उन बातों की चर्चा पत्रकारों से कर रहे हैं, जिनकी पुष्टि वो खुद नहीं कर सकते।
यह सब बहुत अजीब है, लेकिन सबसे ज्यादा डर सामान्य यात्रियों की सुरक्षा को लेकर है। ध्यान रहे कि अब तक मलेशियाई विमान 370 के साथ हुए हादसे या अहमदाबाद में एयर इंडिया विमान हादसे पर स्पष्ट जानकारियां सामने नहीं आई हैं।


