Top
Begin typing your search above and press return to search.

आंदोलनकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत

'धर्मेन्द्र प्रधान, ज़िंदाबाद', 'भारत माता की जय' जैसे नारे लगाए गए। प्रधान जैसे ही अपनी कार से उतरकर संसद भवन की तरफ बढ़े तो भाजपा और एनडीए के सांसदों ने उन्हें घेर लिया, उनसे मिलने की, उनसे हाथ मिलाने की होड़-सी लग गई।

आंदोलनकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत
X

पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शनों के मामले में अब एक तरफ पुलिस की दमनकारी नीति पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, वहीं एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और धर्मेन्द्र प्रधान को जरा भी अहसास है कि उन्होंने अपने पद और शक्ति का कितना दुरुपयोग किया है। सोमवार को जब संसद सत्र लगा तो भाजपा सांसद धर्मेन्द्र प्रधान भी पहुंचे। इस्तीफा देने के बाद वे पहली बार संसद आए थे और वहां भाजपा सांसदों ने उनका शानदार स्वागत किया।

'धर्मेन्द्र प्रधान, ज़िंदाबाद', 'भारत माता की जय' जैसे नारे लगाए गए। प्रधान जैसे ही अपनी कार से उतरकर संसद भवन की तरफ बढ़े तो भाजपा और एनडीए के सांसदों ने उन्हें घेर लिया, उनसे मिलने की, उनसे हाथ मिलाने की होड़-सी लग गई। मानो प्रधान ने कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली हो। संसद में प्रधान के स्वागत पर प्रतिक्रिया देते हुए ओडिशा की भाजपा सरकार के मंत्री बिभूति जेना ने कहा, 'धर्मेंद्र प्रधान जैसा मंत्री ओडिशा की शान है। शिक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने कई कल्याणकारी काम किए हैं, पेपर लीक जैसी ख़ामियों को दुरुस्त करने के लिए कई क़दम उठाए, दोबारा परीक्षा कराई।'

गृहमंत्री अमित शाह ने भी लिखा कि 'धर्मेन्द्र प्रधान जी ने अपने कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की व्यवस्था, पीएम श्री विद्यालयों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास एवं उद्योग-अकादमिक समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं।

अब बस प्रधानमंत्री मोदी के ही प्रमाणपत्र की कसर रह गई है। मोदी भी लिख सकते हैं कि आंदोलन के कारण प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा, वर्ना उनसे बेहतर शिक्षा मंत्री न कोई था, न कोई होगा। पता नहीं धर्मेन्द्र प्रधान का किस तरह का प्रभाव या दबाव नरेन्द्र मोदी पर है कि वे उन्हें मंत्री पद से हटाना ही नहीं चाहते थे। राहुल गांधी ने कहा था कि उन्हें खबर है कि मोदी प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से हटाएंगे तो दूसरा मंत्रालय दे सकते हैं, लेकिन हम यह होने नहीं देंगे। अब कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से भी यही खबर है कि सरकार की तरफ से चर्चा में शामिल जे पी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने प्रस्ताव रखा था कि धर्मेन्द्र प्रधान को किसी और मंत्रालय में भेजा जाए। लेकिन सीजेपी के लोगों ने इसे स्वीकार नहीं किया। लिहाजा मोदी को मजबूरी में धर्मेन्द्र प्रधान को मंत्रिमंडल से ही हटाना पड़ा। मगर अब उनका स्वागत और तारीफें यही जाहिर कर रही हैं कि धर्मेन्द्र प्रधान को मोदी किसी भी तरह नाराज नहीं करना चाहते। इसका यह भी मतलब है कि सवा महीने से चल रहे आंदोलन और फिर राहुल गांधी के भी मैदान में उतरने से नरेन्द्र मोदी की कुर्सी पर खतरा बढ़ने लगा तो धर्मेन्द्र प्रधान से इस्तीफा लिया गया। इसमें पेपर लीक होने की जिम्मेदारी और नैतिकता दिखाने जैसी कोई बात नहीं है।

इसलिए अगर निकट भविष्य में धर्मेन्द्र प्रधान को फिर किसी बहाने से मंत्रिमंडल में लाया जाए, या ओडिशा जैसे राज्य में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाए तो आश्चर्य नहीं। सरकार जानती है कि इस बार जैसा आंदोलन इतनी जल्दी फिर खड़ा करने में मुश्किल आएगी। इस बार सरकार ने भी अपनी कमियों को पहचान कर उन्हें दूर करना शुरु कर दिया होगा। वैसे सरकार ने पहली कोशिश आंदोलनकारियों के दमन की ही की थी, जिसके खिलाफ कई याचिकाएं भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थीं। मंगलवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सभी मामलों में लगभग समान मुद्दे सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि याचिकाओं में पैलेट गन के इस्तेमाल से एक 19 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी जाने, इलेक्ट्रिक बैटन के कथित उपयोग, एक युवती के गंभीर रूप से घायल होकर आईसीयू में भर्ती होने, वकीलों के साथ मारपीट और एक पत्रकार पर हमले जैसे आरोप शामिल हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इन मामलों पर लंबी बहस की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि विवाद का मूल मुद्दा स्पष्ट है। उन्होंने यह भी दोहराया कि छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे और शांतिपूर्ण विरोध करना मौलिक अधिकार है। वहीं प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत देते हुए अदालत ने एफआईआर पर दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है और साथ ही केंद्र समेत 7 राज्यों को नोटिस जारी किया गया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने साफ कहा है कि दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के किसी भी राज्य में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, कोर्ट ने अलग-अलग राज्यों में हिरासत में लिए गए नाबालिगों को तुरंत रिहा करने का आदेश भी दिया है। हिंसा की इन घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए अदालत ने एक हाई-पावर कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और उन सभी राज्यों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है जहां ये घटनाएं हुईं। मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश भी दिया है कि प्रदर्शनों से जुड़ी सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, वायरलेस कम्यूनिकेशन और अन्य जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं।

अदालत के निर्देश बताते हैं कि पुलिस की तरफ से ज्यादती तो हुई है, लेकिन सत्ता के अहंकार में उसे स्वीकारा नहीं जा रहा। पैलेट गन और एके 47 का आंदोलनकारियों पर इस्तेमाल बताता है कि सरकार की तरफ से आंदोलन को क्रूरता से कुचलने की तैयारी थी। ये और बात है कि इस आंदोलन पर किसी बात का जोर नहीं चला, न इंटरनेट, मेट्रो, बिजली, खाना-पानी बंद करने का न हिंसक क्रूरता का। दिल्ली पुलिस की डायरी से निकला सच भाजपा की पोल खोल चुका है।

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने की जनरल डेली डायरी में दर्ज एंट्री (नंबर 0008ए) के मुताबिक, मौके पर तैनात एक डिप्टी पुलिस कमिश्नर और सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट के आदेश के बाद कम से कम दो राउंड पैलेट गन से फायर किए गए थे। डिप्टी कमांडेंट की ओर से दर्ज कराई गई डायरी एंट्री के मुताबिक, रैपिड एक्शन फोर्स की टीम ने भीड़ को हटाने के लिए : 55 नॉन-इलेक्ट्रिक शेल, 15 इलेक्ट्रिक शेल, 5 आंसू गैस के गोले, 2 राउंड एंटी-रॉयट गन (एआरजी) से प्लास्टिक पैलेट (पीपी) कारतूस दागे थे।

एक तरफ अपने फ्रैंड्स पर हथियारों का इस्तेमाल और दूसरी तरफ पूर्व मंत्री का सत्कार बता रहा है कि सरकार की असली नीयत क्या है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it