Top
Begin typing your search above and press return to search.

आंदोलनों से डरे लोग

तीन दिन पहले पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक और कारोबारी रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था में आई गड़बड़ी और परीक्षाओं के पर्चे लीक होने को लेकर चिंता जताई थी।

आंदोलनों से डरे लोग
X

तीन दिन पहले पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक और कारोबारी रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था में आई गड़बड़ी और परीक्षाओं के पर्चे लीक होने को लेकर चिंता जताई थी। कई चैनलों के माइक के सामने बिना किसी का नाम लिए कहा था- सुधर जाओ, वर्ना मैं आंदोलन करूंगा। उन्होंने यह भी कहा था कि देश में बहुत से घपले हैं। लेकिन फिर न जाने कैसे उन्होंने अपने ही बयान पर शीर्षासन करते हुए अब कहा है कि 'देश का बचपन ख़तरे में हैं, इसलिए इस समय देश का सबसे बड़ा मुद्दा यही है। कुछ लोग बचपन का इस्तेमाल आंदोलन में कर रहे हैं। यदि देश का बच्चा प्राइमरी स्कूल में पढ़ रहा है और आप उसको आंदोलन में धकेल देंगे, तो बच्चा पढ़ेगा कब। उसको पता ही नहीं कि आंदोलन क्या होता है। लेकिन आपने उसको आंदोलन में धकेल दिया कि जाओ तुम भी थाने का घेराव करो, सड़कों पर उतर जाओ, डीएम-एडीएम का घेराव करो। छोटे बच्चों को आंदोलन में नहीं धकेलना चाहिए, ऐसा पूरी दुनिया में कहीं नहीं होता। रामदेव ने यह भी कहा कि देश में अराजक आंदोलन तो नहीं होना चाहिए, लेकिन संवैधानिक, लोकतांत्रिक और नैतिक मूल्यों पर आधारित आंदोलन होने चाहिए। आंदोलन के नाम पर अराजकता नहीं होनी चाहिए। देश की शिक्षा और चिकित्सा को लेकर गहरे प्रश्न हैं, उनका समाधान होना चाहिए। रामदेव ने कहा, 'यह किसी एक व्यक्ति के सामर्थ्य की बात नहीं है कि वो देश की व्यवस्था बदल सके। इसके लिए तीन स्तर पर जागरूकता चाहिए। सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर की जागरूकता चाहिए।

पाठक जानते हैं कि योग शिविर लगाते-लगाते रामदेव की गिनती देश के दिग्गज कारोबारियों में होने लगी है। देश-विदेश में उनके पतंजलि आयुर्वेद का करोड़ों का कारोबार फैला हुआ है। इसलिए वे सुविधाजनक तरीके से अपने बयान से पलटते हैं तो कोई आश्चर्य नहीं। लेकिन इस बार उन्होंने जो कुछ कहा है उस पर गौर करना जरूरी है। रामदेव कट्टर मोदी समर्थक माने जाते रहे हैं। अन्ना आंदोलन के बाद उनका भी आंदोलन यूपीए सरकार के खिलाफ हुआ था और पुलिस कार्रवाई होने पर उन्होंने सलवार पहनकर भागने की कोशिश भी की थी। बहरहाल, यूपीए सरकार को भ्रष्टाचार के नाम पर सत्ता से हटाने के लिए खुलकर आंदोलन करने और दूसरे आंदोलनों का समर्थन करने वाले रामदेव अब ज्ञान दे रहे हैं कि आंदोलन कैसे होने चाहिए और कैसे नहीं। आंदोलन की मुखालफत करने वाले रामदेव यह क्यों नहीं देख पा रहे हैं कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने जरा सी भी अराजकता नहीं दिखाई, बल्कि बेहद अनुशासित तरीके से अपनी मांगें सामने रखीं थीं। मोदी सरकार इस समय जेन ज़ी और जेन अल्फा के मुखर होने के कारण घिर ही चुकी है, तो रामदेव कह रहे हैं कि देश में व्यवस्था बदलना किसी एक व्यक्ति के सामर्थ्य की बात नहीं है। अगर ऐसा है तो फिर उन्हें खुलकर नरेन्द्र मोदी से कहना चाहिए कि फ्रेंड्स के लिए रील बनाने से लेकर, ट्रेन को हरी झंडी दिखाने और नोटबंदी की घोषणा तक सारे काम आप ही क्यों करते हैं, अपने मंत्रियों को काम करने क्यों नहीं कहते।

रामदेव ने बड़ी चालाकी से सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर की बात कही, लेकिन सरकारी शब्द मुंह से नहीं निकाला। जबकि शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था में सुधार का पहला जिम्मा लोककल्याणकारी सरकार का ही बनता है। अगर जिम्मेदारी निभाई नहीं जाती तो फिर सत्ता पर बैठे लोगों को हट जाना चाहिए। और जहां तक उन्हें इस बात पर आपत्ति है कि बच्चों को पढ़ना चाहिए, आंदोलन में उनका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, तो फिर रामदेव यह भी बता दें कि क्या देश के अधिकतर सरकारी स्कूल इस हाल में हैं कि वहां बच्चे बिना किसी दिक्कत के पढ़ सकें। बच्चों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलीं, तभी तो कई जगहों पर उन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।

बच्चों की पहल और संघर्ष देखकर ही अभिजित दिपके ने स्कूल ठीक करो अभियान शुरु किया तो अब राजस्थान सरकार ने उसमें भी चालाकी दिखाई। सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत दिखाते हुए छात्र-विरोध की कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए, तो अब शिक्षा विभाग ने स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और फोटो-वीडियोग्राफ़ी को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि प्रधानाचार्य या संस्था प्रधान की पूर्व अनुमति के बिना किसी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। आदेश के मुताबिक़, स्कूलों में प्रवेश के दौरान विज़िटर रजिस्टर में एंट्री भी करनी होगी। क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी, हॉस्टल, टॉयलेट समेत अन्य जगह भी अधिकृत शिक्षक और अधिकारी के साथ ही प्रवेश किया जा सकेगा। आदेश में छात्रों और शिक्षकों की फ़ोटो, वीडियो, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए भी प्रिंसिपल की पूर्व लिखित अनुमति ज़रूरी की गई है।

जैसे किसी विदेशी मेहमान के आने पर झुग्गी-झोपड़ियों और राजधानी की गंदगी को सफेद, चमकीले पर्दे से मोदी सरकार ढंकती आई है, वही उपाय राजस्थान ने दूसरे तरीके से आजमाया कि किसी को स्कूल की दुर्दशा देखने ही न दो। हालांकि सीजेपी के आशुतोष रांका ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा है कि उनके खिलाफ अग्रिम एफआईआर के निर्देश दे दिए जाएं, क्योंकि वे तो स्कूल ठीक करने की मुहिम चलाएंगे ही। वहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आदेश का विरोध करते हुए इसे 'तानाशाही आदेश' बताया और तत्काल वापस लेने की मांग की है। आदेश वापस नहीं हुआ तो कांग्रेस सविनय अवज्ञा आंदोलन करेगी।

राजस्थान सरकार का यह फरमान ज्यादा टिक नहीं पाएगा, यह तो नजर आ रहा है। वहीं इस समय पूरे देश से शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक खबर है कि लखनऊ में जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की छात्राओं ने हाईवे पर धरना देते हुए शिक्षकों की कमी पूरी करने की मांग की है। यानी एक के बाद अलग-अलग जगहों पर छात्र अपने हक के लिए सड़क पर उतर आए हैं। इन बच्चों और नौजवानों की हिम्मत देखते हुए इसी तरह सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने की मुहिम छिड़ जाए तो आश्चर्य नहीं।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it