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महंगाई पर हाहाकार, सरकार का दावा कुछ और

इस साल अब तक नरेन्द्र मोदी कम से कम 15 देशों की यात्रा कर चुके हैं।

महंगाई पर हाहाकार, सरकार का दावा कुछ और
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सितंबर का महीना आते ही देश में पर्व-त्योहारों की शुरुआत भी हो जाती है। रक्षाबंधन तो महंगाई के बीच किसी तरह बीत गया। लेकिन अब गणेश चतुर्थी, तीज, नवरात्रि, करवा चौथ, दशहरा, दीपावली सारे अहम पर्व त्योहार लोगों को मनाने हैं। सवाल यही है कि जिस तेजी से महंगाई बढ़ी है, क्या उसके बाद त्योहारों की खुशियों पर आम आदमी का कुछ हक बचेगा, या त्योहार भी अब केवल अमीरों के लिए रहेंगे। क्योंकि इस बार सितंबर की शुरुआत होते ही महंगाई का चौतरफा वार भी शुरू हो गया है। ऊपर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राहत के दो बोल कहने की जगह किर्गिस्तान में बैठकर प्रवचन दे रहे हैं कि लोग विदेश यात्रा न करें, सोना न खरीदें, स्थानीय उत्पाद खरीदें। पाठक जानते हैं कि किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन की शीर्ष बैठक में शामिल होने के लिए नरेन्द्र मोदी गए हुए हैं। किर्गिस्तान से पहले वे उज्बेकिस्तान पहुंचे। लोग विदेश यात्रा न करें, ऐसी अपील करने से पहले मोदी थोड़ा इंतजार कर लेते कि खुद देश लौट आएं। लेकिन उन्हें अब इन सबकी कोई परवाह ही नहीं है।

इस साल अब तक नरेन्द्र मोदी कम से कम 15 देशों की यात्रा कर चुके हैं। जब प.एशिया में अमेरिका और इजरायल की युद्ध नीति के कारण संकट बढ़ा और होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद होने के कारण ऊर्जा का संकट गहराया, तब भी नरेन्द्र मोदी ने यही अपील की थी कि लोग सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें, विदेश न जाएं, सोना न खरीदें। हालांकि ऐसे उपदेश देकर वो खुद विदेश दौरे पर निकल गए थे और लोगों को चिढ़ाने के लिए इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को मेलोडी टॉफी भेंट कर रहे थे। नरेन्द्र मोदी ग्लोबल की जगह लोकल यानी स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का ज्ञान भी जनता को बांटते-फिरते हैं, लेकिन खुद उनके चश्मे, जूते, घड़ियां, गाड़ियां सब विदेशी रहते हैं। हर किसी के लिए गांधी बनना मुमकिन नहीं है कि आश्रम में रहें और अपने हाथ से काते हुए सूत के कपड़े पहनें। लेकिन गांधीजी किसी को ज्ञान नहीं देते थे, वो अपने जीवन में जिन मूल्यों पर यकीन रखते थे, उन्हें अपनाते थे, बाकी लोग उनका अनुसरण करते थे। लेकिन नरेन्द्र मोदी सारा त्याग और समर्पण लोगों से मांगते हैं और खुद विदेशों में घूम रहे हैं।

इस समय देश में महंगाई से लेकर शिक्षा, लड़कियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी जैसे कई मुद्दों पर हाहाकार मचा है। लेकिन नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को फिर से एक इंस्टाग्राम रील बनाकर कहा है कि देश खुशियों से भर गया है। दरअसल सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने इंस्टाग्राम वीडियो के साथ लिखा 7.8 फीसदी की वृद्धि, मजबूत आंकड़े और उससे भी मजबूत भरोसा। प्रधानमंत्री ने इंस्टाग्राम वीडियो में कहा कि दुनिया युद्ध, संकट, सप्लाई चेन में बाधा और कोविड के बाद की आर्थिक अस्थिरता से जूझ रही है, लेकिन इन परिस्थितियों के बावजूद भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके बाद उन्होंने 'वोकल फॉर लोकल' विदेश यात्रा करने से बचना चाहिए, सोना खरीदने से भी बचना चाहिए जैसा ज्ञान दिया। इस वीडियो में 'झूठ की गूंज' और 'निराशा' फैलाने वालों का जिक्र मोदी ने किया, जो साफ तौर पर राहुल गांधी के युवाओं से जुड़े 'छात्रों की गूंज' अभियान पर सीधा हमला है।

मतलब अगर खुशी का मौका रहे, फिर भी नरेन्द्र मोदी राहुल गांधी को कोसे बिना नहीं रह सकते, यह जाहिर हो गया। हालांकि इस जीडीपी वृद्धि की सच्चाई कुछ और ही है। देश में दूध-चीनी से लेकर प्याज और अंडे तक की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। ऊपर से तेल महंगा होने के बाद सामानों की आवाजाही भी महंगी होगी। 1 सितंबर से जेट फ्यूल भी महंगा हो गया है। घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी की गई है, जिसमें रुपए 6.28 प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। अब एटीएफ रुपए 115.00 से बढ़कर रुपए 121.28 प्रति लीटर हो गया है। इधर 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत भी रुपए 762 से बढ़कर रुपए 764 हुई। हालांकि, घरेलू सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी नहीं की गई। चीनी 56 से लेकर 62 रुपये तक आ गई है। दूध की कीमत अब रुपए 93 से सीधे 102 पहुंच गई है। 9 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी महंगा हो गया है। दिल्ली में इसकी कीमत में 9.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अब यह 2747.50 रुपये में मिलेगा। कुछ दिन पहले सीएनजी की कीमत करीब 4 रुपये बढ़ी थी।

यानी एक तरफ महंगाई से आम जनता को राहत नहीं है, बल्कि शिकंजा और कस चुका है, वहीं नरेन्द्र मोदी बता रहे हैं कि देश में खुशियां हैं। असल में मोदी जमीनी हकीकत से बिलकुल अनजान हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसी पर लिखा कि लाइट्स, कैमरा और... कोई एक्शन नहीं, अर्थव्यवस्था के मामले में मोदी जी की पब्लिसिटी की कहानी कुछ ऐसी ही है। खड़गे ने बताया कि आम लोग बेरोज़गारी, असहनीय महंगाई और बेतहाशा असमानता के बोझ तले दबे हैं। बेरोज़गारी 50 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है। 40 प्रतिशत युवा ग्रेजुएट बिना नौकरी के हैं। जुलाई 2026 में 15 से 29 साल की उम्र के हर 6 में से 1 युवा भारतीय बेरोज़गार था। हर साल 2 करोड़ नौकरियों का वादा टूट चुका है।

खुदरा महंगाई 19 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर है। मिडिल क्लास परिवार किसी तरह गुज़ारा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और गरीबों ने उम्मीद छोड़ दी है और असमानता ब्रिटिश शासन से भी बदतर है। भारत की कुल संपत्ति का 40 प्रतिशत हिस्सा सबसे अमीर 1 प्रतिशत लोगों के पास है। सबसे निचले 50 प्रतिशत लोग सिफ़र् 15 प्रतिशत हिस्से पर गुज़ारा करते हैं, जो शर्मनाक है। आपकी सरकार ने आज़ाद भारत के इतिहास में गरीबों से अमीरों की ओर संपत्ति का सबसे बड़ा ट्रांसफर किया है।

बेहिसाब 'क्रोनी कैपिटलिज़्म' (खास दोस्तों को फायदा पहुंचाने वाला पूंजीवाद) ही आपकी एकमात्र आर्थिक नीति है। खड़गे ने बताया कि आपकी सरकार ने 2014 से अब तक 16 लाख करोड़ से ज़्यादा के कॉर्पोरेट लोन माफ किए हैं। देश ने देखा है कि भारत के प्रधानमंत्री अपने एक खास दोस्त के लिए पर्सनल ट्रैवल एजेंट की तरह काम कर रहे हैं! भारतीयों को सोना न खरीदने और विदेश यात्रा न करने की आपकी बार-बार की नसीहतें ज़मीनी हकीकत दिखाती हैं। सच तो यह है : लोगों से झूठ बोलने की आपकी काबिलियत के अलावा कुछ भी नहीं बदला है!


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