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राम मंदिर ट्रस्ट से उठे नए सवाल

इस ट्रस्ट में अब तक कभी सीईओ को नियुक्तनहीं किया गया था।

राम मंदिर ट्रस्ट से उठे नए सवाल
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ बनाया है। इस ट्रस्ट में अब तक कभी सीईओ को नियुक्तनहीं किया गया था। इसलिए खबरों में बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के इतिहास में पहली बार कोई सीईओ बना है। ये और बात है कि यह इतिहास महज छह साल पुराना है, क्योंकि यह 2020 में बना है। लेकिन भारतीय वायुसेना के इतिहास में और आजाद भारत के 80 बरसों के इतिहास में शायद यह पहली बार है कि किसी रिटायर्ड वरिष्ठ वायुसेना अधिकारी को मंदिर का सीईओ बनाया गया हो। जीतेंद्र मिश्रा अभी चार महीने पहले ही 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हुए हैं। अमूमन भारतीय वायुसेना और अन्य सैन्य बलों के अधिकारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद कॉर्पोरेट या प्राइवेट सेक्टर (कमर्शियल नौकरियों) में जाने के लिए 1 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड निर्धारित है। यदि कोई ग्रुप 'ए' या समकक्ष रैंक का अधिकारी सेवानिवृत्ति के एक साल के भीतर किसी निजी कंपनी या व्यावसायिक संस्थान में नौकरी में आना चाहता है, तो उसे रक्षा मंत्रालय से पूर्व अनुमति लेनी अनिवार्य होती है।

जीतेंद्र मिश्रा के मामले में संभवत: इस नियम में ढील दी गई है, या फिर रक्षा मंत्रालय ने पहले ही उनके लिए अनुमति दे दी होगी, या ये भी हो सकता है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट न कॉर्पोरेट के दायरे में आता है न निजी संस्थान के, इसके लिए कोई और ही विशेष दर्जा बनाया गया हो, जिसकी जानकारी संघ या भाजपा ही बेहतर दे सकती है। देश में कई बड़े, प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर चारों दिशाओं में बने हुए हैं, जिनमें सालाना अरबों-खरबों का चढ़ावा आता है, इन मंदिरों के प्रबंधक कई धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करवाते हैं। लेकिन कभी न इनके हिसाब-किताब में गड़बड़ी की शिकायतें आईं, न चढ़ावा चोरी की खबरें आईं। मंदिर प्रबंधकों की नियुक्ति में छोटे या स्थानीय स्तर पर राजनीति भले होती रही हो, लेकिन केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सीधे दखलंदाजी भी नहीं रही। अयोध्या में बना राम मंदिर इस मामले में शुरु से अलग ही रहा।

भाजपा ने इसी राम मंदिर को बनवाने के वादे के साथ साल-दर-साल चुनाव लड़े। हालांकि उसका यह वादा तभी पूरा होता जब सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में फैसला आता। भाजपा को इसके लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा। 2019 में अदालत ने बाबरी मस्जिद तोड़ने को गलत बताते हुए भी उसी जमीन पर फिर से मस्जिद बनाने की जगह मंदिर बनाने के लिए जगह दे दी। फिर नरेन्द्र मोदी ने इसका भूमिपूजन किया, मंदिर बनना शुरु हो गया और 22 जनवरी 2024 को इसकी प्राण प्रतिष्ठा कर दी गई, ताकि आम चुनावों में भाजपा लोगों को बता सके कि उसने वादा पूरा किया। इसमें संविधान ने लोगों के साथ हर तरह से इंसाफ का जो वादा किया है, वो टूट गया, लेकिन इसकी परवाह न अदालत ने की, न सत्तारुढ़ भाजपा ने। मुसलमानों को दूसरी जगह पर मस्जिद बनाने के लिए जगह दी गई और आज तक उन दोषियों को सजा नहीं मिली है, जिनके कारण बाबरी मस्जिद तोड़ी गई। इस बीच राम मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरु हो गई और फिर नए किस्म के दोषी यहां खड़े हो गए। जिन्होंने भक्तों के चढ़ाए हुए करोड़ों रूपए अपनी जेबों में भर लिए। इन दोषियों की भी न पूरी शिनाख्त हुई है, न उन्हें सजा देने के आसार दिख रहे हैं।

जब से राम मंदिर ट्रस्ट ने नयी नियुक्तियों की घोषणा की है, इसी पर चर्चा तेज हो गई है कि इसमें अब कौन-कौन लोग शामिल हो रहे हैं। पुराने जिन लोगों ने चढ़ावे की चोरी की, भक्तों की श्रद्धा को ठगी में बदल दिया, उनका क्या होगा, इस पर चर्चाएं गौण बना दी गई हैं।

भाजपा का यही तरीका रहा है कि एक मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए दूसरा मुद्दा खड़ा कर दो। बहरहाल, ट्रस्ट को नए सीईओ समेत नए पदाधिकारी मिल गए हैं, लेकिन क्या इनसे चोरी हुआ चढ़ावा वापस आ पाएगा, यह देखना होगा। इस नयी नियुक्ति में एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर सेवानिवृत्त एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को मंदिर ट्रस्ट का सीईओ बनाकर भाजपा कोई संदेश सशस्त्र बलों को देना चाह रही है। क्योंकि मोदी सरकार में ऐसे कई प्रकरण हुए हैं, जिनमें सेना राजनीति का हिस्सा बनती दिखी, जबकि अब तक कांग्रेस, भाजपा या अन्य दलों की जितनी सरकारें बनीं, सेना को सियासी उथल-पुथल से दूर रखा गया। भारत और पाकिस्तान में यही बड़ा फर्क है, जिस वजह से भारत में लोकतंत्र फला-फूला और पाकिस्तान में आज तक लोकतंत्र की जड़ें नहीं जम पाई हैं। मोदी सरकार में सेना को राजनीति का हिस्सा बनाने की सायास कोशिशें हुईं हैं, इसलिए जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर ऐसा सवाल उठ रहा है।

हालांकि उनकी योग्यता पर कोई सवाल नहीं है। 39 साल लंबी सेवाएं उन्होंने भारतीय वायुसेना को दी। 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन मिला था। उन्होंने फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट के चीफ टेस्ट पायलट, दो अग्रिम एयरबेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग और एयर मुख्यालय में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किया। वह एक फाइटर कॉम्बैट लीडर और प्रयोगात्मक टेस्ट पायलट रहे हैं। उनके पास 3000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। जनवरी 2025 में उन्होंने भारतीय वायुसेना की सबसे अहम परिचालन कमानों में से एक वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाली थी। बाद में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इस कमान का नेतृत्व किया। और अब वे राम मंदिर ट्रस्ट को संभालेंगे।

बताया जा रहा है कि इस पद के लिए ट्रस्ट को 5585 आवेदन मिले थे। जिसमें पहले 111 उम्मीदवारों का चयन किया गया फिर 16 उम्मीदवारों को अयोध्या बुलाकर आमने-सामने साक्षात्कार किया गया। सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने अंतिम तीन नामों की सूची ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंपी थी। विचार-विमर्श के बाद एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम मुहर लगी।

कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि क्या इस नियुक्ति के पीछे ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी कोई बात तो नहीं है। ऐसा संदेह होना स्वाभाविक है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर पर मोदी सरकार ने कई बार विरोधाभासी बयान दिए। अब इससे जुड़े एक अधिकारी को सीधे ट्रस्ट का सीईओ बनाया गया है, इसके पीछे केवल जीतेंद्र मिश्रा की योग्यता ही पैमाना है या इसके सियासी निहितार्थ हैं, यह खुलासा होना जरूरी है।


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