शहादत पर विवाद होना दुखद
मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ शुरु किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' में छह जवानों की शहादत हुई थी, जिनके नाम अब साल भर बाद जाकर मोदी सरकार ने सार्वजनिक किए हैं।

मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ शुरु किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' में छह जवानों की शहादत हुई थी, जिनके नाम अब साल भर बाद जाकर मोदी सरकार ने सार्वजनिक किए हैं। शहीद छह जवानों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल में उकेरे गए हैं। देश की रक्षा और आत्मसम्मान के लिए अपने प्राणों को दांव पर लगाने और सर्वोच्च बलिदान देने के इस जज्बे की तारीफ शब्दों में नहीं की जा सकती न ही पर्याप्त कृतज्ञता जताई जा सकती है। कायदे से शहादत जैसे विषयों पर राजनैतिक बहस या विवाद भी नहीं होने चाहिए। लेकिन मोदी सरकार ने अब सेना को भी राजनैतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना शुरु कर दिया है। इसलिए शहादत पर विवादित बयानबाजी भी हो रही है।
दरअसल 28 जुलाई 2025 को संसद सत्र के दौरान लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष से कहा था, 'आपको सवाल पूछना है तो ये पूछिए कि इस ऑपरेशन में क्या हमारे जांबाज़ सैनिकों को कोई क्षति पहुंची है तो उसका उत्तर है नहीं।' रक्षा मंत्री के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहा है, जिसमें सुनाई दे रहा है कि नहीं का उच्चारण उन्होंने पूरा जोर देकर किया था और तब सदन में मौजूद गृहमंत्री अमित शाह से लेकर तमाम बीजेपी सांसदों ने मेजें थपथपाकर मुस्कुराते हुए इस बयान का स्वागत किया था। इस बयान को सुनकर यही समझ आता है कि राजनाथ सिंह साफ कह रहे हैं कि हमारे जवानों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। राजनाथ सिंह ने उसी वक्तव्य में आगे कहा था, 'प्रतिपक्ष के लोग पूछते रहे हैं कि हमारे कितने विमान गिरे, मुझे लगता है कि उनका यह सवाल राष्ट्रीय जनभावनाओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता। उन्होंने एक बार भी नहीं पूछा कि हमारी सेनाओं ने दुश्मन के कितने विमान गिराए। उन्हें सवाल पूछना ही है तो उनका प्रश्न ये होना चाहिए कि क्या भारत ने आतंकवादी ठिकानों को तबाह किया, तो उसका उत्तर है हां। आपको प्रश्न पूछना है तो ये पूछिए कि क्या ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा तो उत्तर है हां।'
जिस तरीके विपक्ष का नाम लेकर और उसके सवालों की नीयत पर सवाल उठाकर रक्षा मंत्री ने जवाब दिया, उसी से जाहिर था कि सेना के नाम पर मोदी सरकार राजनीति कर रही है। देश की सेना को वह मोदी सरकार की सेना की तरह बताकर उसके कामों का श्रेय अकेले लूटना चाहती है। जबकि कायदे से सेना जो भी करती है, उसकी तारीफ की हकदार केवल वही होती है, कोई राजनैतिक दल नहीं। बहरहाल, रक्षा मंत्री ने जब ये कह दिया था कि किसी जवान की क्षति नहीं हुई, तो यही माना गया कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान का खूब नुकसान किया, लेकिन देश को कोई हानि नहीं हुई। हालांकि पाकिस्तान की तरफ से कभी लड़ाकू विमान गिराने के दावे किए गए, कभी 10 से ज्यादा जवानों को मारने के। लेकिन इन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। अब छह जवानों के नाम सामने आए हैं, तो विपक्ष ने सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत की जवाबी कार्रवाई को लेकर 'संसद को गुमराह' किया गया। एक्स पर श्री खेड़ा ने लिखा कि 'सिफ़र् दो ही संभावनाएं हैं या तो रक्षा मंत्री को अपने ही मंत्रालय से जुड़े तथ्यों की जानकारी नहीं थी, जो उनकी क्षमता पर 'गंभीर सवाल' खड़ा करता है, या फिर उन्हें सच्चाई मालूम थी और इसके बावजूद उन्होंने 'संसद को गुमराह' करने का फै़सला किया।' उन्होंने लिखा, 'जिस सरकार ने ख़ुद को तिरंगे में लपेट रखा है और जो राष्ट्रवाद की बातें करते नहीं थकती, उसी सरकार ने इन वीरों को वह सम्मान और स्मरण नहीं दिया, जिसके वे हक़दार थे।' पवन खेड़ा ने कहा, 'इन वीरों के नाम देश की सामूहिक स्मृति में हमेशा के लिए दर्ज होने चाहिए थे। उनके परिवारों को यह महसूस होना चाहिए था कि पूरा देश उनके बलिदान को सम्मान के साथ याद कर रहा है। लेकिन इसके उलट, पूरे एक साल तक भाजपा सरकार ने उनकी शहादत को देश से छिपाए रखने का फै़सला किया।'
इसी तरह के बयान अन्य दलों ने भी दिए, तो अब रक्षा मंत्रालय ने सफाई दी है कि 'कु छ सोशल मीडिया पोस्टों में 28 जुलाई 2025 को संसद में रक्षा मंत्री द्वारा दिए गए भाषण को ग़लत तरीक़े से पेश करने की कोशिश की गई है। इन पोस्टों में भाषण के एक छोटे से हिस्से को चुनकर यह झूठा दावा किया गया है कि रक्षा मंत्री ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी भारतीय सैनिक की मौत नहीं हुई। यह दावा जानबूझकर भ्रामक तरीके से पेश किया गया है और पूरी तरह तथ्यात्मक रूप से ग़लत है'। 'यह याद रखना चाहिए कि जब रक्षा मंत्री संसद में अपना भाषण दे रहे थे, उस समय मीडिया और सोशल मीडिया के कुछ हिस्सों में लगातार यह झूठा प्रचार किया जा रहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलट मारे गए थे। यह दावा पूरी तरह गलत था, लेकिन ऑपरेशन की सफलता को कम करके दिखाने और जनता का मनोबल गिराने के उद्देश्य से इसे लगातार फैलाया जा रहा था। रक्षा मंत्री का संबंधित बयान इसी विशेष और भ्रामक दुष्प्रचार के जवाब में दिया गया था। इसलिए उनके बयान को उसी संदर्भ में समझा जाना चाहिए। रक्षा मंत्रालय के बयान में आगे बताया गया है कि 'यह भाषण भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और क्षमता को सम्मान देने वाला था और भारत को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश करने वालों के लिए एक स्पष्ट संदेश भी था।'
'रक्षा मंत्री और भारत सरकार भारतीय सशस्त्र बलों के प्रत्येक सदस्य के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। विशेष रूप से उन वीर जवानों के प्रति, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। 'इसी सर्वोच्च बलिदान के सम्मान में सरकार ने सुनिश्चित किया है कि इन वीर सैनिकों के नाम राष्ट्रीय समर स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) की दीवारों पर अंकित किए जाएं।
रक्षा मंत्रालय ने जिस तरह की सफाई पेश की है, ऐसा अतीत में कभी नहीं हुआ। भारत पहले भी लड़ाइयों में उलझा है, जिसमें बड़ी संख्या में जवान हताहत हुए हैं। ये लड़ाइयां कांग्रेस और भाजपा दोनों सरकारों के दौरान हुईं, लेकिन कभी किसी को इस तरह सफाई देने की नौबत नहीं आई। मोदी सरकार को इस पर विचार करना चाहिए कि आखिर क्यों उसके फैसले इस कदर विवादों में उलझ जाते हैं। जब पहलगाम हमला हुआ था, तब भी आतंकियों ने धर्म पूछा, जाति नहीं जैसे पोस्टर बनाकर एक भयावह आतंकी घटना को सस्ती राजनीति का हिस्सा भाजपा ने बनाया था और अब ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक नया विवाद खड़ा हुआ है, जो किसी तरह उचित नहीं है।


