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नरेन्द्र मोदी पहले हैं या देश?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जब भी फोन पर बात होती है, फौरन उसकी सुर्खियां बन जाती हैं।

नरेन्द्र मोदी पहले हैं या देश?
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जब भी फोन पर बात होती है, फौरन उसकी सुर्खियां बन जाती हैं। लेकिन जब ट्रंप भारत के लिए गलत शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, भला-बुरा कहते हैं तो सरकार और मीडिया की तरफ से एकदम सन्नाटा छा जाता है। पाठक जानते हैं कि कई मोदी समर्थक पत्रकार तो मोदी-ट्रंप चर्चा पर बिना विस्तृत विवरण जाने ही लहालोट होने लगते हैं, क्योंकि उन्हें इन दोनों नेताओं की दोस्ती साबित करना है। खुद प्रधानमंत्री मोदी भी देश को फौरन इत्तला करते हैं कि मेरे प्रिय मित्र डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात हुई। अभी पिछले हफ्ते ही दोनों नेताओं के बीच करीब 40 मिनट लंबी वार्ता फोन पर हुई। जिसके बारे में बताया गया कि प.एशिया में चल रहे तनाव, होर्मुज बंद होने का असर जैसे मुद्दों पर दोनों ने चर्चा की, आपसी साझेदारी को बढ़ाने पर जोर दिया। इसके बाद ट्रंप ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी मेरे बहुत प्यारे मित्र हैं, और हम सब उनसे बहुत प्यार करते हैं। बस इतने में ही मोदी समर्थक गदगद हैं कि अमेरिका का राष्ट्रपति हमारे प्रधानमंत्री को पसंद करता है। लेकिन क्या यही अमेरिकी राष्ट्रपति भारत को भी पसंद करता है, यह एक बड़ा सवाल है। अक्सर विपक्ष की देशभक्ति की परीक्षा लेने वाले, उनके देशप्रेम को चुनौती देने वाले पत्रकारों और भाजपा के लोगों के लिए भी अब एक परीक्षा का वक्त है कि उनके लिए नरेन्द्र मोदी बड़े हैं या देश बड़ा है।

दरअसल डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक विवादास्पद पोस्ट को दोबारा पोस्ट किया है, जिसमें भारत, चीन और अन्य देशों को 'हेलहोलÓ (नर्क जैसा देश) करार दिया गया है। इस पोस्ट में अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता (बर्थराइट सिटीजनशिप) की नीति पर तीखा हमला किया गया है। अमेरिकी रेडियो होस्ट माइकल सैवेज ने मूल रूप से यह पोस्ट लिखी है। जिससे सहमति जताते हुए ट्रंप रीपोस्ट करते रहते हैं।

इस में जन्मसिद्ध नागरिकता का मुद्दा अदालतों के बजाय आम नागरिकों द्वारा तय किए जाने की वकालत की गई है। इसमें अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन और अन्य कानूनी संगठनों की आलोचना करते हुए कहा गया है कि ये संस्थाएं अवैध आप्रवासन को बढ़ावा देने वाली नीतियों को प्रभावित करती हैं, जिससे सार्वजनिक संसाधनों पर बोझ बढ़ता है। पोस्ट में कहा गया है कि जन्मसिद्ध नागरिकता की वजह से अप्रवासी अमेरिका में आसानी से पैर जमाते हैं। इसके अनुसार, 'यहां एक बच्चे का जन्म होते ही वह तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वह अपने पूरे परिवार को चीन, भारत या दुनिया के किसी दूसरे नर्क जैसे देश से यहां बुला लेता है।'

ट्रंप ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए जन्मसिद्ध नागरिकता के खिलाफ अपने पुराने रुख को दोहराया है। दूसरा कार्यकाल संभालते ही ट्रंप ने अवैध रूप से रह रहे प्रवासी लोगों को बाहर निकालने का काम किस तरह से किया था, यह भारत ने देखा है। कम से कम तीन बार अमेरिका के सैन्य जहाजों में हथकड़ियों और बेड़ियों के साथ भारतीयों को वापस भेजा गया था। तब भी विपक्ष ने देश की संप्रभुता की रक्षा का सवाल उठाया था कि अमेरिकी सैन्य विमान हमारी धरती पर कैसे उतरे, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं कहा। जब विपक्ष ने भारतीयों के सम्मान का मुद्दा उठाया तो विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में कहा था कि यह उनकी नीति है कि वे अवैध प्रवासियों को बाहर कर रहे हैं। यानी हर तरह से ट्रंप का बचाव करने की कसम मोदी सरकार ने खा ली है। लेकिन फिर देश का बचाव कौन करेगा, यह सवाल अब और गंभीरता से उठ रहा है। क्योंकि इस बार भारत को सीधे नर्क जैसी जगह कहा गया है।

ट्रंप ने अगर ऐसी कोई पोस्ट मोदी की तारीफ में लिखी होती तो अब तक उस पर ढिंढोरा पीटा जा चुका होता, लेकिन देश को नर्क कहा जा रहा है और मोदी सरकार ने इन पंक्तियों के लिखे जाने तक एक शब्द भी विरोधस्वरूप दर्ज नहीं कराया है। वैसे तो खुद नरेन्द्र मोदी भी कह चुके हैं कि 2014 से पहले भारतीय सोचते थे कि पता नहीं पिछले जन्म का कौन सा पाप किया है, जो इस देश में जन्म लिया। यह भी देशविरोधी वक्तव्य था। लेकिन प्रधानमंत्री ने दिया था तो आलोचना की गई। इस बार मामला दूसरा है। इस बार देश के प्रधानमंत्री ने नहीं, दूसरे देश के राष्ट्रपति ने हमारे देश को नर्क बताया है तो उस पर चुप्पी साधना कायरता ही कहलाएगी। छोटे से छोटा देश भी इस तरह का अपमान बर्दाश्त नहीं करता। लेकिन भारत सरकार यानी मोदी सरकार क्यों चुप है, इस पर सवाल उठ रहे हैं।

कांग्रेस ने तो इस घटनाक्रम पर भड़कते हुए, अपनी तत्काल प्रतिक्रिया में कहा है कि ये बात बेहद अपमानजनक है और भारतविरोधी है। हर भारतीय इससे आहत है। इस बात के लिए प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका के राष्ट्रपति से बात करनी चाहिए और कड़ी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। हालांकि, जिस हिसाब का मोदी का ट्रैक-रिकॉर्ड रहा है, ऐसे में यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि मोदी, ट्रंप के आगे कुछ बोल पाएंगे। ट्रंप लगातार भारत के लिए अपमानजनक बातें करते हैं और मोदी चुपचाप सुनते हैं। नरेंद्र मोदी एक कमजोर प्रधानमंत्री हैं और इसका खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है।

इसी तरह तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोईत्रा ने नरेन्द्र मोदी से पूछा है कि आप खी खी करते हुए बंगाल चुनाव में प्रचार करेंगे या फिर अमेरिका के सामने विरोध दर्ज कराएंगे।

इन प्रतिक्रियाओं में भले ही विपक्ष ने अपना राजनैतिक हिसाब-किताब भी साध लिया है, लेकिन फिर भी इन्हें गलत नहीं कहा जा सकता, क्योंकि हकीकत यही है कि जब-जब नरेन्द्र मोदी से कड़ी प्रतिक्रिया देने की अपेक्षा की जाती है, वे निराश करते हैं। यह सिलसिला इस बार टूटता है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।


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