नेताओं के सोशल मीडिया पर गर्मी की चर्चा
नेताओं के बहाने ही सही लेकिन पूरे देश में भीषण गर्मी का मसला अब सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है।

नेताओं के बहाने ही सही लेकिन पूरे देश में भीषण गर्मी का मसला अब सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है। सामान्य तौर पर तो मीडिया संस्थान अपने न्यूज बुलेटिन में टेल पीस यानी पुछल्ले की तरह मौसम का हाल बता ही देते हैं कि तापमान कितना रहेगा, उमस रहेगी या हवा चलेगी, बारिश होगी या केवल बादल छाए रहेंगे, और इसके अलावा मौसम से जुड़ी खबर तभी आती है जब आम जनता के मरने की नौबत आ जाए। जैसे भीषण गर्मी और लू की चपेट से फलानी-फलानी जगह पर इतने दिनों में इतनी मौतें। या बाढ़ के कारण जान-माल की बड़ी हानि। हाड़-मांस के जीते-जागते लोग मौसम की मार के कारण कब मौत के आंकड़ों में तब्दील हो जाते हैं, देश उस पर ध्यान ही नहीं देता। मौसम से मरने वालों के नाम खबरों में नहीं आते, क्योंकि वे बेहद आम और गरीब लोग होते हैं। आसमान से गिरने वाली बिजली भी जानती है कि गरीब कहां खड़ा है, उसी पर गिरती है। लू भी यही जानती है कि उसके लिए गरीब का घर ही खुला है, क्योंकि वहां एसी, कूलर तो दूर की बात पंखा भी नसीब नहीं होता। खस के पर्दे लगाने जैसे पारंपरिक तरीकों से ही थोड़ा बहुत बचाव करने की कोशिश होती है।
तो ऐसी गर्मी सालों साल से हिंदुस्तान के आम आदमी को झुलसा रही है, लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर उसकी चर्चा है। एक तो बिहार की नवनिर्वाचित विधायक मैथिली ठाकुर ने अपने क्षेत्र अलीनगर का दौरा किया और वहां लोगों ने बिजली कटौती की शिकायत की, तो उनका जवाब था बाप रे बाप! इतनी गर्मी में बिजली नहीं आती। अच्छी बात है कि विधायक महोदया को अहसास तो हुआ कि गर्मी में बिना पंखे के गुजारा करना कितना मुश्किल होता है। उन्होंने फौरन बिजली विभाग में फोन लगाया और कहा कि हमारा नाम खराब हो रहा है यहां की कटौती रोकिए। उसके बाद अपनी जनता से कहा कि चार दिन में बिजली आ जाएगी। इस पर वहां की जनता खुश हुई और ये सारा वाकया बाकायदा रिकार्ड होकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया। अब इसे कितने लाइक्स और कमेंट्स मिलते हैं, उसे परख कर शायद मैथिली ठाकुर अपने अगले वीडियो की तैयारी करें। वे मोदीजी की पार्टी भाजपा की विधायक हैं, जहां सब लोग उन्हीं से प्रेरित होकर अलग-अलग एंगल्स से वीडियो बनाकर अपलोड करवाते हैं। काम हो न हो, वीडियो अच्छा चलना चाहिए। वैसे मैथिली ठाकुर को जनता से कहना चाहिए था कि पांच साल तक गर्मी बर्दाश्त कर लें, तब तक भागलपुर में अडानी बिजली संयंत्र तैयार हो जाएगा, जिसमें वादा है कि बिहार के लोगों के लिए सस्ती बिजली दी जाएगी। आखिर इसी वादे के लिए तो हजार एकड़ जमीन अडानी समूह को दी गई और यहां लगे आम, लीची और सागौन के करीब 10 लाख पेड़ काटने की इजाज़त भी दी गई है। अब अगर घनी अमराइयां और घने, फलदार पेड़ शहरों-गांवों में दिखते रहें तो लगेगा कि हम पुराने जमाने में जी रहे हैं, जबकि सरकार को विकास दिखाना है, इसलिए पेड़ों को काटना और कारखाने लगाना जरूरी है।
केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शायद ऐसा ही कुछ समझाना चाहते हैं। क्योंकि उनका भी एक वीडियो काफी वायरल हुआ है, जिसमें वह कह रहे हैं कि संचार मंत्री जेब में प्याज रखकर घूमता है। श्री सिंधिया ने ये भी बताया कि वह गाड़ी में एसी नहीं चलाते हैं और 51 डिग्री तापमान वाली गर्मी और गर्म हवा के थपेड़ों का सामना करने के लिए जेब में प्याज रखते हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर शेयर किए वीडियो में जेब से प्याज निकालकर लोगों को दिखाया और कहा कि जेब में प्याज रखो और गर्मी से बचे रहो। मोदीजी का चेला बनने के सारे गुण श्री सिंधिया ने अर्जित कर लिए हैं, ये इस वीडियो से समझ आता है। एक तरफ अपनी ताकत और संपन्नता का निर्लज्ज प्रदर्शन और दूसरी तरफ गरीब के जख्मों को कु रेदना, ये दोनों काम मोदी भी बढ़िया करते हैं और अब सिंधिया भी वही कर रहे हैं। गाड़ी में एसी न चलाकर वो अपना एहसान दिखा रहे हैं। लेकिन क्या उन्हें इस बात का एहसास है कि आम आदमी न गाड़ी खरीद पाता है, न एसी। और रहा सवाल प्याज रख कर लू से बचने का, तो ये भी पारंपरिक इलाज के नाम पर फैलाए गए हजारों मिथ में से ही एक है। बेशक प्याज में मौजूद तत्व शरीर के लिए कई तरह से लाभदायक होते हैं। इसकी तासीर ठंडी होती है, इसमें कम्पाउंड क्वेरसेटिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर को ठंडक देते हैं। जिस वजह से लोग गर्मी में प्याज ज्यादा खाते हैं। इसे खाने से शरीर का तापमान सामान्य रहता है और पानी की कमी भी नहीं होती। लेकिन ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि प्याज साथ में रखने से आप गर्मी या लू से बच जाएंगे। जानकारों का कहना है कि प्याज खाने से शरीर को ठंडक मिलती है लेकिन इसे साथ में रखने से हीट स्ट्रोक या लू से नहीं बच सकते हैं। इसलिए गर्मी से बचने के लिए नारियल पानी, तरबूज, खीरा जैसे फल खाने, हर आधे घंटे पर पानी पीने और ग्लूकोज़ लेवल बनाए रखने की सलाह दी जाती है। साथ ही दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक बाहर न निकलने की सलाह भी चिकित्सक देते हैं।
हालांकि यह भी गरीब, मजदूर वर्ग के लिए विलासिता के समान है कि वह पूरी दोपहर आराम करे, क्योंकि उसे तो हर घंटे काम के पैसे मिलते हैं। कम काम यानी कम कमाई। दूसरी तरफ रेहड़ी-पटरी वाले क्या करें, कहां जाएं, उनके लिए भी आजीविका के जो साधन हैं, वो मौसम के अनुसार आराम की सहूलियत नहीं देते हैं। ठेले वाले, रिक्शे वाले, सड़क किनारे बैठे मोची, दर्जी, नाई क्या ये लोग गर्मी में न निकलने का विकल्प आजमा सकते हैं। इनकी तो नियति ही मौसम के थपेड़े सहकर काम करना है। सरकार चाहे तो इनके लिए सुविधाओं का इंतजाम करे, हर थोड़ी दूर पर विश्रामगृह बनाए, जहां बिजली के पंखे, कूलर रहें, पीने का पानी रहे। इतना भी हो तो इन्हें बहुत आराम हो जाएगा। और इसमें जो खर्च आएगा वो प्रधानमंत्री और बाकी नेताओं की रील बनाने, फूल मालाओं से स्वागत करवाने या प्रचार पर किए जाने वाले खर्च से काफी कम पड़ेगा। लेकिन इतनी सी जिम्मेदारी पूरा करने की जगह सलाह मिली है कि जेब में प्याज रखो। हालांकि प्याज भी तो सस्ती नहीं है।


