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राहुल को मारने के खतरनाक मंसूबे

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पांच महीने में दूसरी बार जान से मारने की धमकी सरेआम दी गई है।

राहुल को मारने के खतरनाक मंसूबे
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कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पांच महीने में दूसरी बार जान से मारने की धमकी सरेआम दी गई है। पिछले साल सितंबर में केरल के पूर्व अभाविप नेता पिंटू महादेव ने एक लाइव टीवी विमर्श में राहुल गांधी की हत्या की धमकी दी थी और अब फरवरी में फिर से राहुल गांधी को ऐसी ही एक और धमकी करणी सेना के एक कार्यकर्ता ने दी है। हैरान करने वाली बात यह है कि धमकी बाकायदा वीडियो बनाकर प्रसारित की गई है। धमकी देने वाला व्यक्ति सरेआम कह रहा है कि राहुल गांधी को घर में घुसकर मारूंगा और अपना दुस्साहस भी दिखा रहा है कि मुझे जेल भेजना हो तो भेज दो। क्योंकि वो भी जानता है कि उसका बाल भी बांका नहीं होगा। क्योंकि इससे पहले राहुल को धमकी देने वाले पिंटू महादेव के खिलाफ भी कांग्रेसियों ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, साथ ही 29 सितंबर 2025 को एक पोस्ट में लिखा था कि यह कोई आकस्मिक टिप्पणी या अतिशयोक्ति नहीं है। यह न्याय की लड़ाई में हर भारतीय के साथ खड़े नेता को दी गई एक सोची-समझी और निर्मम जान से मारने की धमकी है।

राहुल को विभिन्न अवसरों पर दी गई कई धमकियों में से यह नवीनतम धमकी भाजपा के इरादों पर गंभीर सवाल खड़े करती है- इस के बाद कांग्रेस ने पूछा था कि क्या यह राहुल गांधी के खिलाफ रची जा रही कोई बड़ी, भयावह साजिश है? क्या भाजपा आपराधिक धमकियों, हिंसा और यहां तक कि जान से मारने की धमकियों की राजनीति का समर्थन करती है? क्या भाजपा विपक्ष के नेता (जो संवैधानिक पद पर हैं) और अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाने की कोशिश कर रही है, जो उसके कुशासन के खिलाफ आवाज उठाते हैं?

अपने बयान में कांग्रेस ने जो सवाल उठाए थे, वो काफी गंभीर हैं, क्या यह राहुल गांधी के खिलाफ कोई बड़ी साजिश का हिस्सा है और क्या भाजपा यानी मोदी-शाह की इसमें सहमति है। हालांकि कांग्रेस की शिकायत के बावजूद नेता प्रतिपक्ष की जान लेने की धमकी देने वाले इस व्यक्ति पर कोई कठोर कार्रवाई की गई हो, ऐसी खबर ज्ञात नहीं है। बहरहाल, राहुल को मिली ताजा धमकी पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इसे देश में एक और गोडसे तैयार करने जैसा बताया है। पवन खेड़ा ने लिखा कि आरएसएस-भाजपा का गलियारा 'गोडसे फैक्ट्रीÓ है। राहुल गांधी और '25 सांसदों' के खिलाफ तथाकथित करणी सेना द्वारा जारी की गई धमकी कोई छिटपुट घटना नहीं है। यह एक सोची-समझी और धूर्त योजना का हिस्सा है। सबसे पहले, किरण रिजीजू ने सार्वजनिक रूप से झूठ बोला और देश को गुमराह किया कि कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा में ओम बिड़ला को गाली दी। फिर, विभिन्न मंचों पर भाजपा सांसदों ने एक समान बात दोहराना शुरू कर दिया: कि राहुल गांधी 'भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा' हैं। यह विपक्ष को बदनाम करने और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों- विशेष रूप से राहुल गांधी- के खिलाफ हिंसा को वैध ठहराने का एक सुनियोजित अभियान है। कट्टरपंथ का यही तरीका है:वे एक झूठ गढ़ते हैं, उसे बार-बार दोहराकर फैलाते हैं, राजनीतिक सत्ता के बल पर उसे वैधता प्रदान करते हैं, और तब तक उसका प्रसार करते हैं जब तक कि उनके अनुयायी घृणा और हिंसा के लिए उकसाए न जाएं। इसी तरह उस समय गोडसे का निर्माण हुआ था। इसी तरह आज एक और गोडसे को उकसाया जा रहा है।

पवन खेड़ा ने पूरे हालात का सही चित्र खींचा है कि आज एक और गोडसे को उकसाया जा रहा है। क्योंकि 30 जनवरी 1948 से पहले गांधीजी के खिलाफ भी कई बेबुनियाद आरोप लगाकर उन्हें हिंदूविरोधी दिखाया गया था, जिसके बाद दक्षिणपंथी लोगों ने गांधीजी की हत्या की साजिश रची और नाथूराम गोडसे ने इस घृणित काम को अंजाम दिया। संघ और उससे जुड़े लोग अब भी इसे हत्या न कहकर गांधी वध कहते हैं। शब्दों के इस हेरफेर में भी बड़ी चालाकी है। वध और हत्या दोनों ही किसी के प्राण लेने की क्रियाएं हैं, लेकिन वध आमतौर पर न्याय, धर्म या समाज की भलाई के लिए किसी दुष्ट या अत्याचारी को मारने को कहते हैं (जैसे- कंस वध, महिषासुर वध) वध को नैतिक आधार दिया गया है। जबकि हत्या किसी निर्दोष, निहत्थे या सामान्य व्यक्ति को स्वार्थ, द्वेष या आपराधिक भावना से जान से मारना है। अब सोचिए किस चालाकी से गांधी वध शब्द का इस्तेमाल कर संघ गांधीजी को अत्याचारी या दुष्ट बताता है। प्रधानमंत्री बनने के बाद भले ही हर साल 30 जनवरी को मोदी राजघाट जाएं, लेकिन गोडसे का महिमामंडन करने वालों को आज तक सजा नहीं मिली है। याद कीजिए प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने गोडसे की तारीफ की थी, तो प्रधानमंत्री मोदी केवल इतना ही कह पाए थे कि उन्हें दिल से माफ नहीं करूंगा। लेकिन इससे ज्यादा मोदी कुछ नहीं कर पाए।

अब राहुल गांधी के खिलाफ माहौल बनाने वालों पर भी मोदी सरकार कोई कार्रवाई करेगी, इसकी कोई उम्मीद नहीं है। दरअसल इस बार बजट सत्र में राहुल गांधी समेत समूचा विपक्ष मोदी सरकार पर काफी भारी पड़ा है। पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की किताब से लेकर एपस्टीन फाइल्स तक मोदी पूरी तरह घिर चुके हैं। इन मुद्दों पर न राहुल गांधी को सदन में बोलने दिया गया, न मोदी ने लोकसभा में आने की हिम्मत दिखाई। ऊपर से इल्जाम लगा दिया कि मोदी की जान को कांग्रेस की महिला सांसदों से खतरा था। इस बारे में खुद ओम बिड़ला ने ही बयान दिया था। इसके बाद विपक्ष पर किरण रिजीजू ने आरोप लगाया कि सांसदों ने ओम बिड़ला के कक्ष में बदतमीजी की और उनके साथ गाली-गलौच भी की। एक इंटरव्यू में रिजीजू ने कहा कि राहुल गांधी भारत की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक इंसान बन गए हैं। क्योंकि वह भारत विरोधी ताकतों से जुड़े हैं। वह विदेश और देश में नक्सलियों, एक्सट्रीमिस्ट, विचारकों, जॉर्ज सोरोस जैसे लोगों से मिलते हैं।

अब सवाल ये है कि अगर राहुल गांधी देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, तो मोदी सरकार इंतजार किस बात का कर रही है। राहुल पर अब तक कोई मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया है। मानहानि के तो ढेरों मुकदमे राहुल गांधी झेलते ही रहते हैं, एक मामला देशविरोधी गतिविधि का भी बन जाएगा। मगर बजाए कार्रवाई करने के, केवल जुबानी जमाखर्च से मोदी सरकार काम चला रही है।


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