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करप्शन अगेंस्ट इंडिया

2004 से लेकर 2014 तक देश में यूपीए शासन रहा, जिसकी अगुवाई कांग्रेस ने की। इस सरकार पर 2010 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स, कोयला ब्लॉक आबंटन और 2जी स्पेक्ट्रम के आबंटन में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे।

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2004 से लेकर 2014 तक देश में यूपीए शासन रहा, जिसकी अगुवाई कांग्रेस ने की। इस सरकार पर 2010 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स, कोयला ब्लॉक आबंटन और 2जी स्पेक्ट्रम के आबंटन में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे। 2011 में अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार मिटाने के लिए लोकपाल लाने के नाम पर ही लंबा आंदोलन किया। जिसमें भाजपा और मीडिया का पूरा साथ रहा। तब फिल्म जगत के लोगों ने भी डॉ.मनमोहन सिंह का खूब मजाक उड़ाया। तब केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई पर भी सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख़ टिप्पणी करते हुए उसे पिंजरे का तोता कहा था। कांग्रेस के खिलाफ बने इस माहौल का ही असर था कि 2014 में भाजपा की सरकार बनी और इसके बाद कभी कांग्रेसमुक्त भारत तो कभी विपक्षमुक्त भारत बनाने की कोशिशें हुईं। यह और बात है कि भाजपा की ये कोशिशें नाकाम रहीं, मगर देश के लोकतांत्रिक ढांचे को इसमें जबरदस्त नुकसान हुआ है। ये सारी बातें इस समय करने की जरूरत पड़ रही है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कोयला ब्लॉक आबंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले को बंद कर दिया और उन्हें समन जारी करने के आदेश को रद्द कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने 2014 में दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर साफ कहा था कि मनमोहन सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इसके बावजूद विशेष अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी थी और 2015 में उन्हें आरोपी के रूप में तलब कर लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब कहा कि विशेष अदालत के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को ठुकराने का कोई ठोस कारण नहीं था, इसलिए अदालत ने उस आदेश को रद्द करते हुए मामला गुण-दोष के आधार पर बंद कर दिया। चूंकि 27 दिसंबर 2024 में मनमोहन सिंह का निधन हो चुका था, इसलिए यह फैसला उन्हें मरणोपरांत कानूनी राहत देने वाला माना जा रहा है।

डा. सिंह अपने निर्दोष होने के फैसले को सुनने के लिए इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन जनवरी 2014 में अपनी आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में मनमोहन सिंह ने भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े सवाल पर कहा था, 'मैं इस मामले में थोड़ा दु:खी महसूस करता हूं क्योंकि मैंने ही इस बात पर ज़ोर दिया था कि स्पेक्ट्रम आबंटन पारदर्शी और निष्पक्ष हो। मैं ही था जिसने ज़ोर देकर कहा था कि कोल ब्लॉक का आबंटन नीलामी के आधार पर हो, लेकिन इन तथ्यों को भुला दिया गया। इस मामले में विपक्ष का अपना स्वार्थ निहित था। कुछ मौक़ों पर मीडिया उनके हाथ का खिलौना भी बन गया।' उन्होंने कहा था कि 'इसलिए मेरे पास इसकी हर वजह है कि जब भी इस समय का इतिहास लिखा जाएगा, हम बेदाग़ बाहर आएंगे। मनमोहन सिंह ने कहा, 'मैं मानता हूं कि इतिहास मेरे प्रति आज के मीडिया के मुक़ाबले ज़्यादा उदार होगा।

मनमोहन सिंह ने कहा कि 'यह फ़ैसला इतिहासकारों को करना है कि मैंने क्या किया और क्या नहीं किया।'

महज 12 साल पहले का ऐसा राजनैतिक माहौल अब सपने जैसा नजर आता है कि प्रधानमंत्री प्रेस कांफ्रेंस किया करते थे, अपने ऊपर और अपनी सरकार पर लगे आरोपों को लेकर जवाब देते थे। अब न तो प्रधानमंत्री प्रेस कांफ्रेंस करते हैं, न मीडिया के लोग उनसे भ्रष्टाचार पर बातें करते हैं। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी तो ताजा प्रकरण है, पिछले बारह बरसों में कई और ऐसे प्रकरण हुए, लेकिन हर बार नैरेटिव बदल कर सरकार को जवाबदेही से निकलने का मौका मीडिया देता रहा। फिलहाल नरेन्द्र मोदी तो यह कहने की स्थिति में नहीं हैं कि इतिहास मेरे साथ न्याय करेगा। लेकिन डॉ.मनमोहन सिंह जानते थे कि सच कभी पराजित नहीं होता, इसलिए उन्होंने पहले ही अपने साथ होने वाले न्याय की बात कह दी थी।

दरअसल कोयला ब्लॉक आबंटन में यह आरोप लगाए गए कि सरकार ने निजी कंपनियों को बिना बोली लगाए आबंटन कर दिया, इससे कम से कम 10 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। यूपीए सरकार में कोयला सचिव रहे पी.सी. पारेख, इस मामले में व्हिसलब्लोअर माने जाते हैं। पारेख ने दावा किया था कि उन्होंने 2004 में ही प्रधानमंत्री को विवेकाधीन आबंटन प्रक्रिया में धोखाधड़ी की संभावना के बारे में लिखित रूप में सूचित किया था और खुली नीलामी की वकालत की थी। आरोप था कि प्रधानमंत्री ने इसे नजरअंदाज कर दिया और उनके कोयला मंत्रालय के कार्यकाल में बिना नीलामी के 142 कोयला ब्लॉक आबंटित कर दिए गए। डॉ. मनमोहन सिंह पर मुख्य आरोप 2005 में ओडिशा के तालाबिरा-ढ्ढढ्ढ कोयला ब्लॉक को हिंडाल्को इंडस्ट्रीज को आबंटित करने से जुड़ा था। जांच में यह आरोप लगा था कि इस आबंटन को मंजूरी देने से एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को वित्तीय नुकसान हुआ और एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। लेकिन लंबी जांच के बाद भी जब कुछ नहीं मिला तो अब न केवल मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है, बल्कि डॉ. सिंह को क्लीन चिट भी मिल गई है। ऐसा ही परिणाम टू जी स्पेक्ट्रम आबंटन में घोटाले के इल्जाम का भी निकला था। कैग की रिपोर्ट में कहा गया था कि नीलामी न करने से राजस्व में भारी घाटा हुआ। इसी आधार पर ए.राजा और कनिमोझी को जेल भी भेजा गया। लेकिन दिसंबर 2017 में विशेष सीबीआई अदालत ने पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।

यह तो पहले ही नजर आता था कि यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने और भाजपा के सत्ता में आने का रास्ता बनाया जा रहा है, अब अदालत के फैसलों से इस पर पक्की मुहर भी लग रही है। पवन खेड़ा ने एक्स पर सही लिखा है कि, 'अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन वास्तव में करप्शन अगेंस्ट इंडिया था।'


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