भाजपा ने दिखाया आरक्षण विरोधी चेहरा
दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। उनके बेटे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार अस्पताल में अपनी मां के साथ बने हुए हैं।

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की तबीयत इन दिनों खराब है। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। उनके बेटे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार अस्पताल में अपनी मां के साथ बने हुए हैं। उन्होंने बुधवार को केरलम का चुनावी दौरा भी रद्द कर दिया, क्योंकि उन्हें अपनी मां की तबियत की फिक्र थी। ऐसे मौके पर भी भाजपा राजनीतिक वार करने से बाज़ नहीं आई। जब सोनिया गांधी अस्पताल में भर्ती हुईं, उसी वक्त कांग्रेस पार्टी को 24 अकबर रोड पर बने कार्यालय को खाली करने का नोटिस भेज दिया गया। इसके अलावा यूथ कांग्रेस को भी दफ्तर खाली करने का नोटिस भेजा गया। हालांकि कांग्रेस का नया दफ्तर इंदिरा भवन से चल रहा है, लेकिन 24 अकबर रोड का ऐतिहासिक महत्व है, जिसे भाजपा खत्म करना चाहती है। इधर भाजपा के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने सोनिया गांधी के इलाज में भी राजनीति का मौका तलाश लिया है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए पूछ लिया कि वह अपनी मां का ऐसे अस्पताल में क्यों इलाज करा रहे हैं जहां आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं है।
निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'राहुल गांधी जी सोनिया गांधी जी का इलाज जिस अस्पताल गंगाराम में हो रहा है वह प्राइवेट अस्पताल है, वहां आरक्षण लागू नहीं है। यदि एम्स में इलाज कराते तो वहां आपको 60 प्रतिशत आरक्षण के डॉक्टर मिलते, क्या आपका भरोसा सरकारी अस्पताल में नहीं है? उनका इलाज भी डॉक्टर अरुप बासु कर रहे हैं जो आरक्षित वर्ग के डॉक्टर नहीं हैं। सोनिया जी के स्वस्थ होने की कामना हम सभी करते हैं, लेकिन आपने कांग्रेस की क्या हालत बनाई है? जार्ज सोरोस के कहने पर आप समाज को बांटकर देश क्यों तोड़ना चाहते हैं?'
निशिकांत दुबे इससे पहले भी जिस तरह से नेहरूजी और इंदिरा गांधी के बारे में बेसिरपैर की बातें करते रहे हैं, उसमें उनसे किसी सदाशयता या शिष्टता की उम्मीद नहीं है। इस बार सोनिया गांधी के नाम पर उन्होंने राहुल गांधी को घेरने का मौका ढूंढ लिया, लेकिन इसमें दो बड़ी गलतियां सांसद दुबे कर बैठे। एक तो उन्होंने उस एम्स की श्रेष्ठता पर सवाल उठाए, जो भारत में करोड़ों लोगों के लिए इलाज की बड़ी आस है। एम्स के नाम पर नरेन्द्र मोदी ने खूब राजनैतिक रोटियां सेंकी है। कांग्रेस शासनकाल में केवल 7 एम्स थे, हमने देश भर में 20 एम्स बनवाए, ऐसी बातें बोलकर भाजपा अपनी काबिलियत दिखाती है। लेकिन निशिकांत दुबे तो बता रहे हैं कि एम्स में सही इलाज नहीं होता, इसलिए राहुल गांधी ने सर गंगाराम को अपनी मां के इलाज के लिए चुना। निशिकांत दुबे ने सत्ता में बैठकर जिस तरह अपनी ही सरकार द्वारा संचालित एम्स में अच्छे इलाज के लिए संदेह जाहिर किया है, वह राहुल गांधी या कांग्रेस के लिए नहीं बल्कि उनकी पार्टी भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी करेगा। जहां तक राहुल गांधी की बात है, तो पिछले साल जनवरी में उन्होंने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा और दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री आतिशी को पत्र लिखकर एम्स पर करोड़ों लोगों की निर्भरता और उस की बदहाली की तरफ ध्यान दिलाया था। राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा था कि, 'हाल ही में मैंने देखा कि कड़कड़ाती ठंड में ये लोग मेट्रो स्टेशन के सब-वे के नीचे सोने को मजबूर हैं, जहां पीने के पानी या शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। चारों ओर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। दिल्ली एम्स में इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का आना यह भी दर्शाता है कि लोगों को जहां वे रहते हैं, वहां सस्ती और अच्छी गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। मुझे उम्मीद है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मेरे पत्र का संज्ञान लेते हुए इस मानवीय संकट को हल करने के लिए तत्काल कदम उठाएंगे।'
राहुल गांधी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को लिखे पत्र में कहा, 'इनमें से कई मरीज देश के दूर-दराज इलाकों से आते हैं, अपनी जीवन भर की बचत खर्च करते हैं, और भारत के इस प्रमुख अस्पताल में इलाज के लिए महीनों तक प्रतीक्षा करते हैं। मुझे यकीन है कि आप इस बात से सहमत होंगे कि किसी को भी ऐसी कठिनाई का सामना नहीं करना चाहिए, खासकर तब जब वह पहले से ही गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो। दिल्ली एम्स उत्कृष्ट और किफायती इलाज प्रदान करता है, लेकिन मरीजों और उनके परिवारों की स्थिति से पता चलता है कि अब भी करोड़ों भारतीयों के पास बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं है। '
इस पत्र से राहुल गांधी के सरोकार स्पष्ट हो जाते हैं कि वे दिल्ली एम्स को उत्कृष्ट मानते हैं और उनकी चिंता के दायरे में करोड़ों परिवार आते हैं।
लेकिन निशिकांत दुबे की चिंता यह है कि सोनिया गांधी का इलाज सर गंगाराम में क्यों हो रहा है। और जिस तरह आरक्षण का मुद्दा यहां उन्होंने उठाया, उसमें भी भाजपा का आरक्षण विरोधी चेहरा फिर उजागर हो गया। एक तरफ यूजीसी के नए नियमों के बहाने दलितों और पिछड़ों की हितरक्षा का दिखावा और दूसरी तरफ आरक्षण के हक को कम काबिलियत के समान बताने की खोटी नीयत, यही खेल भाजपा इस समय खेल रही है। जबकि राहुल गांधी जाति जनगणना की मांग ही इसलिए करते हैं ताकि दलित और पिछड़ी आबादी को उसका पूरा हक मिले। आरक्षण की सीमा बढ़े ताकि शिक्षा, नौकरी या जीवन के अन्य क्षेत्रों में दलितों की भागीदारी बढ़े, क्योंकि इसी के बाद समाज में समानता स्थापित हो सकेगी।


