Top
Begin typing your search above and press return to search.

नवीन और प्राचीन के बीच भाजपा

नयी दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में उनके नाम का ऐलान किया गया।

नवीन और प्राचीन के बीच भाजपा
X

मंगलवार 19 जनवरी 2026 को नितिन नबीन भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। नयी दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में उनके नाम का ऐलान किया गया। इससे पहले श्री नबीन को 14 दिसंबर 2025 को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। 18 जनवरी को उनका नामांकन हुआ और वे पूर्णकालिक अध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध चुने गए। उनके अध्यक्ष बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें माला पहनाई, फिर करीब एक घंटे के भाषण में कहा, 'मैं भाजपा का कार्यकर्ता हूं। मैं मानता हूं कि नितिनजी मेरे बॉस हैं। अब वे मेरे काम का आकलन करेंगे।' वहीं बतौर अध्यक्ष नितिन नबीन ने पहले भाषण में कहा, 'राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मेरा निर्वाचन एक साधारण कार्यकर्ता की असाधारण यात्रा को मिला सम्मान है।'

इन बातों को सुनकर किसी को भी लगेगा कि देश क्या दुनिया की सबसे बड़ी और ताकतवर पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा कितने लोकतांत्रिक मिजाज़ की है। यहां साधारण से कार्यकर्ता को भी शिखर तक पहुंचने का मौका मिलता है। एक राष्ट्रीय दैनिक ने तो शीर्षक ही दे दिया -भाजपा का नवीन युग। अलंकार के हिसाब से शीर्षक काफी उपयुक्त है। लेकिन असलियत क्या है ये नितिन नबीन भी जानते हैं, उनके पूर्ववर्ती जे पी नड्डा भी जानते होंगे और भाजपा के बाकी कार्यकर्ता भी।

नितिन नबीन बिहार में पांचवी बार के विधायक हैं, यानी राजनीति में उनकी पकड़ है, इससे कोई इंकार नहीं। लेकिन राजनीति में वे अपने पिता भाजपा नेता नवीन किशोर सिन्हा की आकस्मिक मौत के बाद आए। पिता की विरासत संभालनी थी, लिहाजा भाजपा ने परिवारवाद की चिंता किए बिना उन्हें टिकट दी। और फिर लगातार चुनाव जीतकर नितिन नबीन ने अपनी योग्यता साबित की। अब उसी परिवारवाद को भुलाकर ही उन्हें पहले कार्यकारी और फिर पूर्णकालिक अध्यक्ष भी बनाया गया। क्योंकि वे अमित शाह और नरेन्द्र मोदी की पसंद हैं। जे पी नड्डा भी मोदी-शाह की ही पसंद थे, और बतौर अध्यक्ष उनका कार्यकाल बढ़ा-बढ़ाकर उन्हें शीर्ष पद पर बिठाए रखा गया। लेकिन इसके बाद शायद मोदी-शाह को लगा होगा कि इससे ज्यादा खींचने में पार्टी को नुकसान हो सकता है, तो शीर्ष पद का मोहरा बदल दिया गया।

वैसे भी बिहार चुनाव जीतने के बाद मोदी-शाह को राज्य का धन्यवाद करना था, तो इसका एक तरीका यही लगा होगा। दूसरी बात युवा चेहरे को आगे रखने से रणनीतियों को धार देने में आसानी भी होती है। ध्यान रहे कि छह अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी बनी थी और नितिन नबीन का जन्म इसके भी क़रीब दो महीने बाद 23 मई 1980 को हुआ था। यानी जितनी उम्र पार्टी की है, उतनी ही उसके अध्यक्ष की भी। लेकिन इससे भी उनके नाम के चयन का कोई लेना-देना नहीं है। आज की तारीख में भाजपा में आगे रहने की एकमात्र योग्यता मोदी-शाह की पसंद होना है। जिस कांग्रेस पर भाजपा बार-बार परिवारवाद बढ़ाने का आरोप लगाती है। गांधी परिवार के वर्चस्व की आलोचना करती है, वहां स्थिति बिल्कुल अलग है। कांग्रेस में मल्लिकार्जुन खड़गे बाकायदा चुनाव लड़कर अध्यक्ष बने। उन्हें शशि थरूर ने चुनौती भी दी थी। भाजपा की तरह यहां निर्विरोध नामांकन नहीं हुआ। पार्टी के भीतर अब भी कई कांग्रेस नेता किसी फैसले पर अपनी अलग राय देते हैं, या असहमति व्यक्त करते हैं, इसके बाद भी पार्टी में बने रहते हैं।

भाजपा में यह सब कभी नहीं हुआ। पहले अटल-आडवानी के युग ही भाजपा थी, जिसमें जना कृष्णमूर्ति, कुशाभाऊ ठाकरे और बंगारू लक्ष्मण जैसे कमजोर अध्यक्ष बनाए गए। नितिन गडकरी या राजनाथ सिंह जैसे कद्दावर नेताओं ने भी पार्टी की कमान संभाली, लेकिन उनसे चुनौती मिलते देख उन्हें किनारे भी कर दिया गया। अब नितिन नबीन कब तक हाशिए से दूर रखे जाएंगे, ये देखना होगा।

वैसे उन्होंने भाजपा का अध्यक्ष पद तब संभाला है, जब पार्टी सबसे मजबूत स्थिति में है। 240 लोकसभा सीटें, 99 राज्यसभा सीटें, और 21 राज्यों में भाजपा या एनडीए की सरकार है। अधिकतर नगरीय निकायों पर भी भाजपा का ही कब्जा है। सत्ता के लिहाज से तो पार्टी काफी मजबूत है, लेकिन क्या संगठन के तौर पर भी यही मजबूती नितिन नबीन कायम रख पाएंगे, ये देखना होगा। क्योंकि उनके पीछे अगर अमित शाह और नरेन्द्र मोदी का हाथ है, तो वही उनके लिए बड़ी चुनौती भी हैं। प्रधानमंत्री भले उन्हें अपना बॉस बताएं, लेकिन क्या नितिन नबीन नरेन्द्र मोदी को कभी कोई सलाह दे सकते हैं, या उनके किसी फैसले पर आपत्ति जता सकते हैं, इस सवाल का जवाब वही बेहतर दे पाएंगे।

नितिन नबीन के सामने फिलहाल इस साल के केरल, तमिलनाडु, प.बंगाल, असम और पुड्डुचेरी चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन बेहतर दिखाने की चुनौती है। लेकिन असली चुनौती तो 2029 के लोकसभा चुनावों की है, जिसमें अभी से जीत का दावा भाजपा कर चुकी है और अमित शाह के मुताबिक नरेन्द्र मोदी ही तब भी प्रधानमंत्री बनेंगे। हालांकि तब तक मोदी 80 के रहेंगे और भाजपा में यह सवाल प्रबलता से उठ सकता है कि मोदी के बाद कौन। तब शायद पार्टी में माहौल अमित शाह बनाम आदित्यनाथ योगी का बने, क्योंकि एक तरफ शाह मोदी के बाद दूसरे सबसे प्रभावशाली नेता भाजपा में हैं, जबकि योगी यह मानते हैं कि स्वीकार्यता उनकी अधिक है। पार्टी के इस संभावित आंतरिक संघर्ष में क्या नितिन नबीन निर्णायक भूमिका निभा पाएंगे, ये देखना दिलचस्प होगा।

वैसे जहां तक सांगठनिक क्षमता की बात है, तो उसका प्रदर्शन नितिन नबीन 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में भाजपा के सह-प्रभारी के तौर पर दे चुके हैं, जिसमें सत्तारूढ़ कांग्रेस को हराकर भाजपा ने अप्रत्याशित जीत दर्ज की थी। इसके बाद ही 2024 में उन्हें छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनावों के लिए प्रभारी नियुक्त किया गया, जहां पार्टी ने राज्य में सभी सीटें जीत ली थीं। फिलहाल देखना होगा कि क्या नितिन नबीन भाजपा में वाकई नवीन युग लाते हैं या प्राचीन बंधनों में खुद को जकड़ा पाते हैं।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it