जेन ज़ी के रेहान वाड्रा पर भाजपा का वार
पूरे गीत में किसी का नाम नहीं है, लेकिन जनता समझदार है और जानती है कि किसके बारे में बातें हो रही हैं

सोशल मीडिया पर एक गीत की इस समय खूब चर्चा हो रही है, जिसे अदिति एवं साथियों की पेशकश कहा जा कहा है, गीत का मुखड़ा है-
कैसा घबराया साहिब, बात-बात पर डरता है।
डगमग-डगमग होवे कुर्सी, धर्म को आगे करता है।।
पूरे गीत में किसी का नाम नहीं है, लेकिन जनता समझदार है और जानती है कि किसके बारे में बातें हो रही हैं। वैसे इस गीत को सार्थक करती घटनाएं लगातार घट ही रही हैं। अभी ताजा प्रसंग युवा छायाकार रेहान वाड्रा का है। रेहान वाड्रा की खींची तस्वीरों की प्रदर्शनी कई बार लग चुकी है। दिल्ली के बीकानेर हाउस में ही पहली बार उन्होंने जुलाई 2021 में अपनी तस्वीरों की पहली प्रदर्शनी लगाई थी। अब एक बार फिर उसी बीकानेर हाउस में रेहान वाड्रा की एक और प्रदर्शनी बुधवार को लगी, लेकिन अब यह विवादों में आ गई है। क्योंकि अधिकारियों ने प्रदर्शनी से चंद घंटे पहले कम से कम 70 तस्वीरों को हटवा दिया।
कला पर सेंसरशिप का ये नया मामला है। वैसे रेहान वाड्रा का एक परिचय यह भी है कि वे कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के बेटे हैं। वे कई मौकों पर अपनी मां के साथ दिखाई देते हैं, लेकिन मंच पर उपस्थिति दर्ज नहीं कराते। उनके मामा राहुल गांधी ने दो साल पहले 2024 में दीपावली पर उनके साथ एक वीडियो शेयर कर जनता को दीपावली की बधाई दी थी। इसमें रेहान अपने मामा के साथ दीवारों पर रंग-रोगन करने वाले कामगारों के साथ नजर आए थे। रेहान वाड्रा जब भी ऐसे किसी वीडियो में या सार्वजनिक स्थानों पर नजर आते हैं, तो उनके राजनीति में आने की चर्चाएं तेज हो जाती हैं। हालांकि वे बतौर छायाकार अपनी राह पर आगे बढ़ रहे हैं और अपनी तस्वीरों से बता रहे हैं कि उनकी पॉलिटिक्स क्या है।
बहरहाल, अब रेहान वाड्रा पर सेंसरशिप का हमला कर भाजपा ने खुद ही उनके लिए राजनैतिक मंच पर जगह बना दी है। गुरुवार को मीडिया में इस बात की काफी चर्चा रही कि रेहान वाड्रा की खींची तस्वीरों से भाजपा डर गई है। इस बारे में खुद रेहान ने बताया कि 'नो आइडिया इज़ फाइनलÓ इस शीर्षक के अंतर्गत बुधवार शाम सात बजे बीकानेर हाउस में उनकी तस्वीरों की प्रदर्शनी शुरु होने वाली थी, लेकिन इसके दो घंटे पहले वहां के प्रबंधन ने उन्हें कहा कि कुछ तस्वीरें उनकी पॉलिसी के खिलाफ हैं। और उन तस्वीरों को हटाने का आदेश दिया। रेहान के मुताबिक ये तस्वीरें दिल्ली में पिछले एक साल के दौरान हुए युवा आंदोलनों के दौरान खींची गई थी। उन्होंने कहा कि 'मैंने एक हफ्ते पहले ही सारी तस्वीरों का लेआउट शेयर कर दिया था, लेकिन तब कोई आपत्ति नहीं जताई गई, लेकिन अब कहा गया कि इन तस्वीरों में राजनैतिक संदेश है। इसके बाद रेहान ने राजनीतिक दलों और नेताओं से जुड़ी कई तस्वीरें हटा दी। लेकिन प्रबंधन ने दबाव डाला कि इन 70 तस्वीरों में से कोई भी नहीं लगाई जाएगी। इसके बाद बीकानेर हाउस प्रबंधन ने उन्हें 3:30 बजे एक नोटिस भेजा जिसमें लिखा था, 'अगर आप शाम 5 बजे तक इन्हें नहीं हटाते हैं, तो बिल्डिंग को सील कर दिया जाएगा और प्रदर्शनी रद्द कर दी जाएगी।' रेहान ने कहा कि मैंने तिरंगे की दो तस्वीरें लगाई थीं, और उन्होंने कहा, 'इसे हटा दो।' मैंने कहा, 'यह आपकी पॉलिसी के खिलाफ कैसे हो सकता है?
तो तिरंगे का सवाल अब मोदी सरकार पर भारी पड़ता जा रहा है। पिछले हफ्ते ही कनॉट प्लेस में लहरा दो तिरंगा अभियान को पुलिस ने किस तरह रोका यह पूरे देश ने देखा है। इससे पहले जंतर-मंतर पर तिरंगा लेकर जाने के लिए सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया गया था और आठ दिन बाद उन्हें बुधवार को सशर्त रिहा किया गया। हालांकि दोनों ने फिर से तिरंगा लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर दी है। यानी किसी न किसी तरह, किसी न किसी मंच से मोदी सरकार और वोट चोरी के खिलाफ आवाज उठ ही रही है। सरकार का डर इसी वजह से बढ़ रहा है। रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी में तस्वीरों को हटाना इसी डर का सबूत है। चूंकि बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार के अंतर्गत आता है और राजस्थान में भाजपा की सरकार है। इसलिए इस सेंसरशिप के पीछे भाजपा का हाथ है, यह साबित हो रहा है।
लेकिन इस घबराहट में भाजपा सरकार यह भूल रही है कि रेहान वाड्रा की तस्वीरों पर पाबंदी लगाने लोग जंतर-मंतर पर बनी सरकार विरोधी छवियों को भूलेंगे नहीं। एक हॉल के भीतर लगी चंद तस्वीरें तो यूं भी व्यापक जनता की नजरों से दूर ही थीं। दिल्ली के बीकानेर हाउस में इन तस्वीरों को देखने कुछ सौ लोग ही जाते, लेकिन जंतर-मंतर या दिल्ली या देश के दूसरे शहरों में जो हजारों-लाखों लोग लगातार सरकार के खिलाफ उतर चुके हैं, उनकी तस्वीरें तो देश-दुनिया में पहुंची हुई हैं। चाहे बिहार का छात्र आंदोलन हो, या मुंबई के आजाद मैदान की रैली या जंतर-मंतर पर जेन ज़ी आंदोलन विदेशी-देशी मीडिया में इसे पर्याप्त कवरेज मिली है। सोशल मीडिया पर लगातार इसकी चर्चाएं हुई हैं। इन तस्वीरों पर मीम्स बने, रील्स बनीं, जिन्हें कई बार शेयर या रिपोस्ट किया गया। यानी करोड़ों लोगों के मोबाइल में आंदोलनों की तस्वीरें कैद हैं, यह तय है। अब भाजपा को सोचना होगा कि वह कहां तक इन तस्वीरों को मिटा सकेगी। मान लें कि वह करोड़ों मोबाइलों पहुंच चुकी तस्वीरों और वीडियो को भी मिटाने में सक्षम है, तब भी क्या लोगों के जेहन में कैद तस्वीरों को वह मिटा सकेगी। असल में आंदोलन से डरी सरकार ने रेहान वाड्रा की छायाचित्र प्रदर्शनी पर रोक लगाने की कोशिश कर एक और मूर्खतापूर्ण कदम उठा लिया है।
इससे पहले कभी किसी कैरिकेचर पर सरकार को आपत्ति हुई, कभी किसी स्टैंडअप कॉमेडियन के खिलाफ कार्रवाई हुई, लेकिन इसके बावजूद सरकार विरोधी आवाजें उठना बंद नहीं हो रही हैं, बल्कि अब डर कायम करने के माहौल की धज्जियां जेन ज़ी उड़ा रही है। भाजपा ध्यान दे कि सौरव दास और आशुतोष रांका पर तो जेन ज़ी न होने का तंज किया गया, लेकिन रेहान वाड्रा पर तो यह तंज भी काम नहीं आएगा। क्योंकि वे जेन ज़ी के ही नुमाइंदे हैं।


