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लापरवाही के हादसे, बेपरवाह सरकार

बुधवार को दिल्ली के हौजरानी इलाके में एक पांच मंजिला इमारत में आग लगने से कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई, जिसमें 11 विदेशी नागरिक थे।

लापरवाही के हादसे, बेपरवाह सरकार
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बुधवार को दिल्ली के हौजरानी इलाके में एक पांच मंजिला इमारत में आग लगने से कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई, जिसमें 11 विदेशी नागरिक थे। इस भयावह घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब तैर रहे हैं, जिसमें कहीं ऊपरी मंजिलों से लोग कूद कर जान बचा रहे हैं, तो कहीं छत पर खड़े होकर मदद की गुहार लगा रहे हैं। आग और धुएं के गुबार के बीच फिर से भ्रष्टाचार की चर्चाएं शुरु हो चुकी हैं कि इस पूरे इलाके में नियमों को ताक पर रखकर ऐसी कई इमारतें बनी हुई हैं। जहां पांच-छह कमरे बने होने चाहिए थे, वहां 25 कमरे बना दिए गए और आग से बचाव का कोई इंतजाम नहीं है। इस खबर को बीते कुछ घंटे नहीं हुए थे कि बिहार के मुजफ्फरपुर से ऐसी ही खबर आई। वहां एक अस्पताल के आईसीयू में आग लग गई, जिसमें कम से कम पांच लोगों के मरने की खबर है और 20 घायल हैं। हालांकि मौत के सही आंकड़े पता चलेंगे या नहीं, कहा नहीं जा सकता। क्योंकि अभी से खबर पर लीपापोती की शुरुआत हो चुकी है।

सम्राट चौधरी सरकार में पहली बार राजनीति में आकर सीधे स्वास्थ्य मंत्री का पद संभालने वाले निशांत कुमार से इस बारे में जब पत्रकारों ने सवाल किए तो वे बिना कुछ बोले निकल गए। उन पर अब सवाल उठ रहे हैं तो उन के पक्ष में जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि सुबह 3:00 बजे की यह घटना है और सुबह की फ्लाइट से मंत्री जा रहे थे। ऐसा नहीं है कि घटना की जानकारी मंत्री को नहीं थी। तभी तो स्वास्थ्य विभाग एक्शन में है। मेरा मानना है कि एक्शन पर लोगों को फोकस करना चाहिए ना कि बयान पर। ऐसे बयान जाहिर करते हैं कि आम लोगों की जान की कीमत सरकार की नजर में कितनी सस्ती है। इतने मासूम अकाल मौत मारे गए और बजाए जिम्मेदारी लेने के स्वास्थ्य मंत्री को बचाने की कोशिशें हो रही हैं। पाठक ध्यान दें कि बुधवार को भाजपा के आधिकारिक एक्स हैंडल से एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें पटना की साफ-सुथरी चिकनी सड़क और चमचमाता पुल दिखाया गया। इसे बिहार का विकास कहा जा रहा है। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने भी इसे रिपोस्ट किया। लेकिन कांग्रेस ने बताया कि ये एआई जनरेटेड वीडियो है। सच्चाई खुलने के बाद भाजपा के सोशल मीडिया प्लेटफार्म से तो इसे शायद हटा लिया गया है, लेकिन भाजपा बिहार के प्लेटफार्म पर यह आभासी वीडियो अब भी चल रहा है। भाजपा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देश का विकास दिखाने वाले कई संदेश एआई जनरेटेड वीडियो के साथ ही दिए जाते हैं। इसका यही मतलब है कि असली विकास दिखाने को नहीं है तो कम्प्यूटर की मदद से बनाई गई तस्वीरों में विकास दिखाया जाए। मान लें कि जनता के सामने अपनी छवि चमकाने के लिए ऐसा करना जरूरी है, तो क्या यह बात भी उतनी ही जरूरी नहीं है कि जनता को सच की तस्वीर भी दिखाई जाए या जनता का वास्ता जिन कड़वे सत्यों से रोज होता है, कम से कम उन पर भाजपा दो शब्द तो संवेदना के कह दे। चमकते-दमकते पुल की नकली तस्वीर दिखाने वाली भाजपा क्या अवैध निर्माण या बिना सुरक्षा मानकों के खड़ी की गई इमारतों की तस्वीर भी कभी दिखाएगी। क्यों भाजपा के बुलडोजर गरीबों और मुसलमानों के ठिकानों तक आसानी से पहुंच जाते हैं, लेकिन अवैध निर्माण कर करोड़ों की उगाही करने वाले लोगों तक नहीं पहुंचते।

अभी पिछले साल दिसंबर में गोवा के नाइटक्लब में ऐसी ही भीषण आग लगी थी, जिसमें 25 लोगों की मौत हो गई थी। इसके संचालक पहले तो आसानी से देश से भाग गए, लेकिन फिर सरकार पर दबाव पड़ा तो इन्हें थाईलैंड से गिरफ्तार कर लाया गया। मगर अब क्या कार्रवाई हो रही है, उन्हें कितनी सजा मिलेगी, इसकी कोई खबर नहीं है।

दरअसल भाजपा बहुत अच्छे से ये बात जानती है कि समाज को हिंदू-मुसलमान के अनावश्यक मुद्दे में उलझाकर रखना आसान है। लोग इसी बात पर खुश हो जाएंगे कि अहमदनगर का नाम 'अहिल्यानगरÓ, फैजाबाद का नाम अयोध्या या बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम 'वागदेवी भोजपाल विश्वविद्यालयÓ कर दिया गया है। नाम बदलने से शहर, स्टेशन, शिक्षण संस्थान किसी के भी हालात नहीं बदलेंगे, ये लोग भी अच्छे से जानते हैं। मगर एक सुकून उन्हें मिलता है कि मुसलमानों के नाम की जगह हिंदू नामों को भाजपा प्राथमिकता दे रही है। भाजपा ने उन्हें यही भरोसा भी दिलाया है कि कुछ बचे न बचे हिंदू धर्म तो वो बचा ही लेगी। बस इसी तरह धर्म की रक्षा सरकार कर रही है, बाकी अपनी रक्षा लोग अपने आप कर लें। वैसे दिल्ली हादसे में तो यही दिखा है कि फायर बिग्रेड और बचाव दल के आने से पहले मुसलमानों ने ही कई जानें बचाई हैं। जब लोग पांच मंजिला इमारत में लगी आग से बचने के लिए ऊपर से कूदने लगे तो मोहम्मद अफजल, वसीम राजा, रियाजुद्दीन मंसूरी और अरमान मंसूरी जैसे लोगों ने ही प्रत्युत्पन्नमति दिखाते हुए पास की दुकान से गद्दे और चादरें लाकर नीचे बिछाईं, ताकि उन्हें गिरने से चोटें न आएं। जिस दुकान से गद्दे निकाले गए, उसके मालिक अरमान ने अपने नुकसान की रत्ती भर भी परवाह नहीं की और लाखों के गद्दे लोगों की जान बचाने के लिए निकाल दिए। कई लोगों का दम धुएं के कारण घुट रहा था तो अस्पताल से प्रशिक्षित वसीम राजा और उनके साथियों ने मुंह से सांस देकर उन्हें बचाया। याद पड़ता है कि गुजरात में जब मोरबी पुल का हादसा हुआ था, तब भी कई स्थानीय मुसलमानों ने तैरकर डूबते हुए लोगों की जान बचाई थी।

ऐसा नहीं है कि हिंदू या अन्य धर्मों के लोग इस तरह की जांबाजी या दरियादिली नहीं दिखाते हैं। यह तो हरेक इंसान की अपनी प्रवृत्ति होती है और हर धर्म में परोपकारी व्यक्ति रहते हैं। कोटद्वार के दीपक इसका ताजा उदाहरण हैं, जो बूढ़े दुकानदार को गुंडों से बचाने के लिए आगे आए। लेकिन जब देश में मुसलमानों को लेकर अकारण नफरत का भाव बनाया जा चुका है। उन्हें कभी देशभक्ति साबित करने कहा जाता है, कभी जबरन वंदेमातरम या जय श्रीराम कहलवाया जाता है, तब इन नामों का जिक्र कर उनकी तारीफ करना जरूरी हो जाता है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तो शायद ही कभी इन लोगों से मिलें या उनकी प्रशंसा करें, नरेन्द्र मोदी से भी कोई उम्मीद नहीं है। लेकिन कांग्रेस नेताओं को इन लोगों से मिलकर इनका धन्यवाद करना चाहिए।

बाकी देश में जो आपराधिक लापरवाही से दुर्घटनाएं हो रही हैं, उन पर सख्ती से लगाम लगे और मासूमों की अकाल मौत के दोषियों को सजा मिले, यही अपेक्षा सरकार से है।


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