नस्लीय नफरत का शिकार समाज
भारत जैसे उदार समझे जाने वाले देश में नफरत को इस कदर बढ़ावा दिया जा चुका है कि आम जनता के बीच से ही कुछ लोग हत्या जैसे जघन्य अपराध को करने में नहीं झिझक रहे हैं।

भारत जैसे उदार समझे जाने वाले देश में नफरत को इस कदर बढ़ावा दिया जा चुका है कि आम जनता के बीच से ही कुछ लोग हत्या जैसे जघन्य अपराध को करने में नहीं झिझक रहे हैं। राजधानी दिल्ली में बीते दिन मणिपुर के चर्चित गिटारिस्ट और संगीत शिक्षक चोंगथाम विक्रम सिंह की पीट-पीटकर हत्या करने का मामला इसका ताजा उदाहरण है। चोंगथाम विक्रम सिंह का कसूर केवल इतना था कि उन्होंने अपने घर के पास शोर मचा रहे कुछ लोगों को टोका। हो सकता है टोकने का यह मामला हत्या तक नहीं पहुंचता, लेकिन चोंगथाम विक्रम सिंह का पूर्वोत्तर से होना क्या इस हत्या का एक अहम कारक बना है, इस सवाल पर गंभीरता से सोचना होगा। राज्य और केंद्र की सत्ता पर बैठी भाजपा सरकार ने तो इसमें नस्लीय नफरत के नजरिए तो फौरन खारिज कर दिया है। संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू, जो खुद पूर्वोत्तर से आते हैं, का कहना है कि इस मामले में राजनीति नहीं करनी चाहिए, चोंगथाम विक्रम सिंह पूर्वोत्तर से हैं, ऐसा न देखकर ये देखना चाहिए कि वे भारतीय थे।
ऐसी बात सुनने में तो बहुत आदर्शवादी लगती है और कायदे से होना भी यही चाहिए, लेकिन किरण रिजिजू को ईमानदारी से बताना चाहिए कि क्या मोदी सरकार में ऐसा ही होता है। क्योंकि दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में पूर्वोत्तर के लोगों को लगातार नस्लीय हिंसा या उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। उत्तराखंड में ही पिछले साल 9 दिसंबर को त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा को चाइनीज़ और मोमो जैसे अपमानजनक शब्द कहते हुए पीट-पीट कर मार दिया गया था। इसलिए विक्रम सिंह मामले में यह पड़ताल भी करनी ही चाहिए कि इसके पीछे नस्लीय हिंसा थी या नहीं।
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने कहा कि दिल्ली में मणिपुर के संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की दुखद मौत के लिए जिम्मेदार हमले की घटना से हम लोग बहुत परेशान हैं। इस घटना ने राजधानी में उत्तर-पूर्वी लोगों द्वारा झेली गई क्रूरता के दर्दनाक घावों को एक बार फिर से हरा कर दिया है। इसी तरह मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस मामले में दिल्ली पुलिस से गहन जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी समेत सामने आ रहे सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ तेजी से उचित कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित को जल्द न्याय मिलना चाहिए। क्या भाजपा इन लोगों के बयानों को भी राजनीति बताएगी, क्योंकि ये तो एनडीए नेताओं के ही बयान हैं।
वैसे ऐसी हरेक घटना पर राहुल गांधी की बात ही याद आती है कि नफरत का केरोसिन छिड़का जा चुका है और चिंगारी लगाने की देर है। कुछ वक्त पहले तक शायद इस चिंगारी को सुलगाने वाले लोगों को कानून का कुछ डर तो रहता ही होगा, लेकिन अब ये बेखौफ आग लगा रहे हैं, क्योंकि ऐसे आपराधिक तत्व कहीं न कहीं आश्वस्त हैं कि सत्ता में बैठे लोग उन्हें बचा ही लेंगे। दिल्ली में एक दलित को पीटने वाले स्वतंत्र भारद्वाज ने यही कहा था कि उसे पुलिस नहीं पकड़ेगी, क्योंकि मोदीजी उसके बड़े भाई हैं। देश में अब हर गली-कूचे में स्वतंत्र भारद्वाज जैसे लोगों का बढ़ जाना समाज के लिए काफी चिंताजनक है। क्योंकि अब बात केवल हिंदू-मुसलमान, दलित-स्वर्ण तक सीमित नहीं रही, समूचे समाज को यह नफरत लील रही है।
गौरतलब है कि 54 वर्षीय चोंगथाम विक्रम सिंह पिछले 17 वर्षों से दिल्ली में संगीत सिखाने का काम कर रहे थे। उन्हें मणिपुर के संगीत जगत में एक चर्चित गिटारिस्ट और पश्चिमी संगीत के प्रमुख कलाकारों में गिना जाता था। रविवार रात करीब 11:30 बजे उन के घर के पास कुछ लोग शोर-शराबा कर रहे थे। इनमें आसपास के ढाबों में काम करने वाले डिलीवरी और पैकेजिंग कर्मचारी भी शामिल थे। चोंगथाम विक्रम सिंह ने उन लोगों से शोर मचाने से मना किया। इसके बाद विवाद बढ़ गया। आरोप है कि सिंह अपने घर की ओर भागे, लेकिन हमलावरों ने उनका पीछा किया और इमारत की तीसरी मंजिल तक पहुंचकर उनके साथ उनको बेरहमी से पीटा। उनकी पत्नी और बेटे ने उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया, लेकिन सोमवार सुबह उनकी मौत हो गई। परिवार की शिकायत पर पुलिस ने सात लोगों को हिरासत में तो लिया है, लेकिन इसके बावजूद उनके परिवार समेत पूर्वोत्तर के लोगों को नाइंसाफी की आशंका है। यही सवाल उठ रहे हैं कि क्या गिरफ्तारी के साथ-साथ पूर्वोत्तर के नागरिकों की सुरक्षा और नस्ली भेदभाव से जुड़ी व्यापक समस्या पर भी सरकार ठोस कार्रवाई करेगी? क्योंकि अब तक ऐसी कोई मिसाल मोदी सरकार ने नहीं दी है।
नरेन्द्र मोदी को अपने प्रचार कार्यक्रमों में व्यस्त हैं, लेकिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि एक पिता की अपने ही घर के बाहर, देश की राजधानी में हत्या कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी कई घटनाओं के बाद दिल्ली में रहने वाला पूर्वोत्तर का हर परिवार आज खुद से पूछ रहा है- 'क्या हम यहां सुरक्षित हैं?' राहुल गांधी ने कहा कि अमित शाह का गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस इस बढ़ती अराजकता को रोकने के लिए क्या कर रहे हैं, खासकर पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ? तत्काल जांच होनी चाहिए और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।
राहुल गांधी तो अपनी जवाबदेही निभा रहे हैं, सरकार कब काम करना शुरु करेगी इसका इंतजार है।


