Top
Begin typing your search above and press return to search.

लड़कियों के लिए खतरनाक बनता देश

भारत में लड़कियां कितनी असुरक्षित हैं, इसके रोजाना उदाहरण सामने आते हैं।

लड़कियों के लिए खतरनाक बनता देश
X

भारत में लड़कियां कितनी असुरक्षित हैं, इसके रोजाना उदाहरण सामने आते हैं। अभी देश की राजधानी दिल्ली में एक के बाद एक बलात्कार की भयावह घटनाएं घटीं, जिस पर भाजपा सरकार से सवाल किए गए, तो जवाब में भाजपा ने पलट कर पिछली सरकारों के वक्त घटे प्रकरण याद दिला दिए। मतलब भाजपा की नजरों में महिला सम्मान, सशक्तीकरण, सुरक्षा ये सारी बातें दलगत राजनीति के तहत ही आती हैं। चुनावों का वक्त आए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह तक दावे करते हैं कि भाजपा ने महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाया है।

उत्तरप्रदेश में अमित शाह ने आधी रात को स्कूटी में गहने पहन कर निकलने वाला बयान दिया था। इसी तरह बिहार में भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर ने एनडीए सरकार की कानून व्यवस्था की प्रशंसा में विधानसभा में बयान दिया था कि पहले हमसे कहा जाता था कि शाम को पांच-छह बजे भी गाड़ी से मत निकलो, लेकिन अब ऐसा नहीं है। हम रात-रात भर घूम सकते हैं। मैं खुद रात तीन बजे दरभंगा से पटना बहुत सुरक्षित आई। लेकिन अब उसी बिहार के जमुई में शाम सात बजे दो नाबालिगों को सरेराह रोक कर लड़की से बलात्कार की कोशिश की गई, लेकिन मैथिली ठाकुर बता नहीं पा रही हैं कि जो सुरक्षा उन्हें मिली वो एक साधारण परिवार की लड़की को क्यों नहीं मिली। मैथिली ठाकुर तो खैर भाजपा की परंपरा के मुताबिक निर्लज्ज बयान दे सकती हैं कि ये मामला उनके क्षेत्र का नहीं है, इसलिए वो कुछ नहीं कह रहीं। लेकिन इसी जमुई क्षेत्र से भाजपा विधायक और बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने इससे भी बढ़कर ये बयान दिया कि अगर किसी को मॉरल पुलिसिंग यानी नैतिकता की स्वघोषित ठेकेदारी करनी है, तो थोड़ा सभ्य तरीके से की जा सकती है। जमुई मामले में भाजपा विधायक का ऐसा बयान अब आश्चर्यचकित भी नहीं करता है, क्योंकि एक नहीं सैकड़ों बार भाजपा नेताओं ने ऐसे ही महिला और संविधान विरोधी बयान दिए हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि 19 सितंबर को बिहार के जमुई में शाम सात बजे एक नाबालिग लड़का और लड़की स्कूटी पर जा रहे थे, तभी कई लोगों ने उन्हें बीच रास्ते में रोक लिया। इसके बाद उनसे तरह-तरह के सवाल उनके रिश्तों को लेकर किए और इस बीच एक व्यक्ति ने लड़की को उठाकर उसके अंदरूनी अंगों पर जबरन हाथ लगाया, उसे खींचा और इसका बाकायदा वीडियो बनाकर इंटरनेट पर वायरल भी किया। दोनों बच्चे गुंडों के सामने गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन उनकी घिनौनी हरकत नहीं रुकी। ज्यादा दुख की बात यह है कि इस वीडियो को बहुत से लोगों ने बाकायदा अश्लील गीतों के साथ और ज्यादा प्रसारित किया। यानी लड़की से प्रत्यक्ष बलात्कार जैसी कोशिश करने वाले तो अपराधी हैं ही, समाज में नकाबपोश ऐसे हजारों-लाखों भरे पड़े हैं, जिन्होंने इस वीडियो के जरिए फिर उस बच्ची की अस्मिता को तार-तार करने की कोशिश की।

बिहार में पहले जहानाबाद में भी ऐसा ही मामला घट चुका है। भाजपा शासित मणिपुर में कुकी और मैतेई जनजातीय संघर्ष में जिस तरह दो महिलाओं की नग्न परेड कराई गई, उनके साथ बलात्कार हुआ, उससे आज भी दिल कांप उठता है, अब बिहार में फिर ऐसी ही कोशिश की गई। इस मामले पर जब विपक्ष ने आवाज उठाई, राहुल गांधी जैसे नेताओं ने अपराधियों पर पॉक्सो समेत अन्य कठिन धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की, तब बिहार सरकार हरकत में आई।

पुलिस ने तीन लोगों की गिरफ्तारी की बात कही है, उनमें से एक का एनकाउंटर भी हुआ है, उसके पैर में गोली मारी गई है। लेकिन इससे उस बच्ची को इंसाफ नहीं मिल सकता। बिहार जदयू के अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि ऐसी छिटपुट घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन सरकार संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई कर रही है। बलात्कार की कोशिश को छिटपुट घटना कहना यह दिखाने के लिए काफी है कि सरकार में बैठे लोग केवल खुद को बचाने में लगे हैं, उन्हें असल में आधी आबादी के लिए सुरक्षित माहौल बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। अभी इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में हास्य कलाकार पुलकित मणि ने राहुल गांधी के साथ मां को कुर्सी दो वाला अभिनय किया तो सारे देश के भाजपा नेता, मंत्री, पत्रकार राहुल गांधी पर आरोप लगाने लगे कि उन्होंने महिला का अपमान किया। लेकिन भाजपा शासित राज्यों में बलात्कार या बलात्कार की कोशिशों पर सबका मुंह बंद हो जाता है। अगर बयान देते भी हैं तो इस तरह कि अपराधियों का बचाव हो जाए।

श्रेयसी सिंह के मॉरल पुलिसिंग वाले बयान का जो जिक्र ऊपर किया गया वह उन्होंने इंडिया टुडे की एंकर से चर्चा के दौरान दिया। अच्छी बात यह है कि एंकर ने पलट कर श्रेयसी सिंह से सवाल किया कि मॉरल पुलिसिंग से आपका क्या मतलब है। तब श्रेयसी सिंह ने जवाब भी दिया कि किसी अन्य के रहने, खाने, पहनने आदि पर अगर किसी को आपत्ति है, तो उसे दर्ज किया जा सकता है, लेकिन उन्होंने साथ में यह भी जोड़ा कि यह बेहतर और सभ्य तरीके से हो सकता है। लेकिन मूल सवाल यही है कि भाजपा विधायक किस तरह किसी के भी निजी जीवन में दखलंदाजी को सही ठहरा सकती हैं। इंडिया टुडे की पत्रकार अपने इसी मूल सवाल पर टिकी रहीं और उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस मॉरल पुलिसिंग को किसी भी सूरत में न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।

काश देश के तमाम पत्रकार इसी स्पष्टवादिता के साथ सत्ता पर बैठे लोगों से सवाल करें तो भाजपा के संवेदनहीन शासन पर अंकुश लग सकेगा। बाकी जहां तक सवाल महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा का है तो उसके लिए समूचे समाज की मानसिकता को सुधारने की जरूरत है। यह काम पितृसत्ता को खत्म करने और मनुवादी सोच को मूल से उखाड़ने से ही संभव है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it