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सम्यक महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष बनीं डॉ. कविता अरोरा

कवयित्री, लोकगायिका और समाजसेवी डॉ. कविता अरोरा को सम्यक पार्टी से संबद्ध सम्यक महिलासभा का प्रदेश अध्यक्ष/ संयोजक नामित किया गया है। यह जानकारी सम्यक पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष तपेन्द्रप्रसाद ने एक

सम्यक महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष बनीं डॉ. कविता अरोरा
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लखनऊ। कवयित्री, लोकगायिका और समाजसेवी डॉ. कविता अरोरा को सम्यक पार्टी से संबद्ध सम्यक महिलासभा का प्रदेश अध्यक्ष/ संयोजक नामित किया गया है। यह जानकारी सम्यक पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष तपेन्द्रप्रसाद ने एक विज्ञप्ति में दी।

डॉ. कविता अरोरा कवयित्री हैं, महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली समाजसेविका हैं और लोकगायिका हैं। समाजशास्त्र से परास्नातक और पीएचडी डॉ. कविता अरोरा शिक्षा प्राप्ति के समय से ही छात्र राजनीति से जुड़ी रही हैं। वे बदायूँ में ऑल इण्डिया स्टूडेन्ट्स फेडरेशन की छात्रा इकाई की अध्यक्षा रही हैं और कई छात्र आंदोलनों का उन्होंने नेतृत्व किया है। डॉ. कविता अरोरा सांस्कृतिक व सामाजिक गतिविधियों से संबद्ध संस्था सुरकला संगम की भी अध्यक्ष रही हैं।

बता दें सम्यकपार्टीभारत निर्वाचन आयोग से पंजीकृत नया राजनीतिक दल है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व आईएएस तपेन्द्रप्रसादशाक्य हैं। श्री शाक्य समाजवादी पार्टी की सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री थे।

तपेन्द्रप्रसादशाक्य ने बताया कि वर्तमान राजनीतिकपरिस्थितियों को देखते हुए एक ऐसे दल की आवश्यकता थी, जिसमें परिवारवाद, वंशवाद और जातिवाद न हो, जो सभी सामाजिक और राजनैतिक तौर पर वंचित समाज को एक मानकर उनको राजनैतिक न्याय दिला सके, वंचित समाज के लोगों को स्वयं अपना दल चलाने एवम् नेतृत्व करने और अपने कल्याण का एजेंडा स्वयं तय करने का अवसर प्रदान करे। वे किसी सामंती दल से भागीदारी नही मांगे बल्कि स्वयं सबको भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति तय करें, अपने विकास और कल्याण का खुद मार्ग तय करें। इसी को ध्यान में रखते हुए सम्यकपार्टी का गठन हुआ।

उन्होंने बताया कि यह पार्टी उस समाज को अधिक से अधिक भागीदारी देगी जो अब तक राजनीति के हाशिए पर हैं। बहुजन महापुरुषों के विचार इस पार्टी के प्रेरणास्रोत होंगें।

एक विज्ञप्ति मेंबताया गया है कि सम्यक पार्टी में सभी को सभी पदों एवं सर्वोच्च पद पर भागीदारी के लिए पार्टी के संविधान में नियम निम्न प्रकार बनाया गए हैं कि :-

(1)कोई भी व्यक्ति किसी एक पद पर अपने पूरे जीवनकाल में दो कार्यकाल से अधिक नहीं रहेगा। एक कार्यकाल मात्र 3 साल का होगा। इस प्रकार कोई भी इस दल में राष्ट्रीय अध्यक्ष या कोई भी पदाधिकारी 6 साल से अधिक एकपद पर नहीं रहेगा।

(2) किसी व्यक्ति के पद को हटने पर उसका परिवारीजन उसी पद पर अगले कार्यकाल में इस हेतु अर्ह नही होगा।

(3)किसी भी कार्यकारिणी में एक परिवार का एक ही सदस्य पदाधिकारी होगा यानी परिवारवाद का खात्मा।


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