दिव्यांग को नहीं मिला सरकारी योजनाओं का लाभ
पेण्ड्रा ! कहने को तो वह दिव्यांग है परंतु उसका हौसला किसी पहलवान से कम नहीं है। ट्रक चलाते हुए एक सडक़ दुर्घटना में पैर काट दिये जाने के बाद वह दिव्यांग हो गया

चाय-नाश्ते की दुकान लगाकर कर रहा परिवार का भरण-पोषण
पेण्ड्रा ! कहने को तो वह दिव्यांग है परंतु उसका हौसला किसी पहलवान से कम नहीं है। ट्रक चलाते हुए एक सडक़ दुर्घटना में पैर काट दिये जाने के बाद वह दिव्यांग हो गया परंतु दिव्यांगता को उसने दीनता में बदलने नहीं दिया। पहाड़ के नीचे आधा किलोमीटर मोटर सायकल से पानी लाकर वह चाय-नाश्ते की दुकान चलाकर न सिर्फ अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा है बल्कि नर्मदे हर के उत्साहपूर्ण घोष के साथ वह नर्मदा परिक्रमावासियों की भी सेवा में पीछे नहीं रहता। दिव्यांगों को दी जानी वाली सामाजिक सुरक्षा की राशि भी उसे नहीं मिल रही है।
हम बात कर रहे है गौरेला से पकरिया दुर्गाधारा होकर अमरकंटक जाने वाले मार्ग में आमानाला तिराहे में चाय नाश्ते की दुकान चलाने वाले काशी यादव की। हाथ में बैसाखी के बावजूद 32 वर्षीय गोरे हसमुख चेहरे वाले काशी यादव को देखकर बरबस कोई यही समझेगा कि यह दिव्यांग नहीं है। ट्रक चलाते हुए एक सडक़ दुर्घटना में पैर काट दिये जाने के बावजूद उसका हौसला कम नहीं हुआ है। सडक़ दुर्घटना एवं दिव्यांगता को ईश्वर की मर्जी मानकर वह जिंदगी की उबड़ खाबड़ राहों पर संघर्ष के लिये निकल पड़ा है। अमरकंटक की तराई में बसे गांव ठाडपथरा में रहने वाले काशी यादव ने पढ़ाई के बाद अपना घर चलाने के लिये रायपुर की ट्रांसपोर्ट कम्पनी में ट्रक चलाने का काम करता था। 15 दिसंबर 2012 को उसके ट्रक का सिमगा के पास दुर्घटना हो गया था और उसका एक पैर काटना पड़ गया। एक्सीडेंट के बाद ट्रक मालिक ने अस्पताल में काशी को झाकना भी मुनासिब नही समझा था। उसके इलाज में घर की जमा पंूजी भी चली गई। दो साल तक घर में विकलांग होकर पड़े रहने के बाद काशी को अचानक मॉ नर्मदा से प्रेरणा मिली और वह पहाड़ के नीचे बसे गांव ठाडपथरा से आधा किलोमीटर मुख्य मार्ग पर आमानाला तिराहे में चाय नाश्ते की दुकान खोल ली। एक पैर से असक्त होने के बावजूद काशी यादव खुद मोटर सायकल चलाकर आमानाला से ठाडपथरा पानी लेने जाता है तथा खुद अपने होटल में चाय एवं अन्य खाद्य सामग्री बनाकर बेचता है। काशी यादव शादीशुदा है तथा उसकी दो बेटियां है। बड़ी बेटी 6 साल की तथा छोटी 7 महीने की। दिव्यांग काशी यादव न सिर्फ दुकानदारी करता है बल्कि मार्ग से गुजरने वाले परिक्रमावासियों की भी सेवा में जुटा रहता है। सबसे खास बात यह है कि चार साल पूर्व विकलांग होने के बावजूद काशी यादव को दिव्यांगता पेंशन भी नहीं मिल रही है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब काशी यादव जैसे कर्मठ दिव्यांग शासन की योजनाओं से क्यों वंचित है जबकि शासन के पास दिव्यांगो के लिये योजनाओं की कमी नही है।
ट्रायसिकल का इंतजार
छत्तीसगढ़ शासन का समाज कल्याण विभाग दिव्यांगों के लिये अनेक योजनाएं चला रहा है परंतु यथार्थ के धरातल में दिव्यांगो के लिये बनी योजनाओं का बुरा हाल है। आदिवासी विकासखण्ड पेण्ड्रा, गौरेला, मरवाही के डेढ़ दर्जन से ज्यादा दिव्यांग षासन द्वारा दी जाने वाली मोटराइज बैटरी ट्रायसायकल का इंतजार कर रहे है वहीं पहले जिन दिव्यांगों को मोटराइज बैटरी ट्रायसायकल दी गई थी उनकी ट्रायसायकल की बैटरी बिगड़ जाने के कारण अनुपयोगी पड़ी है। छत्तीसगढ़ शासन ने अस्सी प्रतिशत से ज्यादा दिव्यांगों को मोटराइज बैटरी ट्रायसायकल देने की योजना बनाई है परंतु उन्हे इस योजना का लाभ ठीक से नही मिल रहा है। पेण्ड्रा विकासखण्ड के ग्राम पतगवां में रहने वाले अशोक कुमार, बंधी के हरछठ, बसंतपुर के जगदीश, पेण्ड्रा के स्वरूप सिंह, नवागांव के भगवानदास ऐसे दिव्यांग है जिन्होंने मोटराइज बैटरी ट्रायसायकल के लिये विकासखण्ड पुनर्वास केंद्र के माध्यम से आवेदन दिया था परंतु उन्हे अभी तक मोटराइज बैटरी ट्रायसायकल प्रदान नहीं किया गया जबकि उन्हे इसकी सख्त जरूरत है। ये दिव्यांग अपनी मोटराइज बैटरी ट्रायसायकल के लिये बार-बार जनपद कार्यालय का चक्कर लगा रहे है परंतु उन्हें यह जवाब दिया जाता है कि उन्होंने प्रस्ताव भेजा है वहां से स्वीकृत होकर आने पर मोटराइज बैटरी ट्रायसायकल प्रदान की जायेगी। वहीं इस संबंध में जिला पुनर्वास अधिकारी बिलासपुर श्रीमती पी. चंद्राकर ने बताया कि पूर्व में पेण्ड्रा में 2, गौरेला में 8 तथा मरवाही में 9 दिव्यांगो को मोटराइज बैटरी ट्रायसायकल दी गई थी तथा आगे रायपुर से मोटराइज बैटरी ट्रायसायकल आने पर प्रदान की जायेगी। एक जानकारी में उन्होंने बताया कि पेण्ड्रा विकासखण्ड में 1696 दिव्यांग है जिनमें से 1599 को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी की गई है वहीं गौरेला में 1452 दिव्यांगो में से 1411 प्रमाण पत्रधारी दिव्यांग है। इसी तरह मरवाही में 2438 दिव्यांगों में से 1638 दिव्यांग प्रमाण पत्रधारी है जिन्हे शासन की योजना के अनुसार सहायक उपकरण प्रदान की गई है।


