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अनुसूचित वर्ग से संबंधित विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए: बाजवा

पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा ने अधिकारियों को अनुसूचित वर्ग से संबंधित विकास कार्यों को प्राथमिकता देने के आदेश जारी किये हैं

अनुसूचित वर्ग से संबंधित विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए: बाजवा
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चंडीगढ़। पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा ने अधिकारियों को अनुसूचित वर्ग से संबंधित विकास कार्यों को प्राथमिकता देने के आदेश जारी किये हैं।

आज यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार बाजवा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राज्य सरकार की तरफ से गांवों में अनुसूचित जातियों से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाये। उन्होंने कहा कि गांवों में जब भी विकास कार्यों के लिए आया अनुदान व्यय किया जाए तो अनुसूचित वर्ग से संबंधित क्षेत्र, धर्मशाला, शमशान घाट, जलअापूर्ति और सीवरेज आदि कार्यों को प्राथमिकता दी जाए।

ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री के अनुसार उनके ध्यान में आया है कि गांवों के विकास कार्यों के लिए अनुदान खर्च किए जाते समय अनुसूचित जातियों से संबंधित कार्यों/क्षेत्रों को अक्सर ही अनेदखा किया जाता रहा है, जिस कारण समाज का यह सबसे कमजोर वर्ग जीवन की बुनियादी जरूरतों से वंचित रह रहा है।

बाजवा ने कहा कि गांवों में धर्मशालाओं का निर्माण समय पर सुनिश्चित किया जाये और इनको खुला-डुला और आधुनिक सहूलियतों से लैस करने के लिए विशेष ध्यान दिया जाये जिससे गरीब और जरूरतमंद लोग अपने सभी सामाजिक समागम यहां कर सकें और अनावश्यक खर्चे से बच सकें। उन्होंने कहा कि यदि धर्मशाला तंग जगह में बनी हुई हो तो पंचायत अपनी या अपनी जमीन का किसी से अदला-बदली करके धर्मशाला का निर्माण किसी खुली जगह में करवाने का फैसला भी कर सकती है।

पंचायत मंत्री ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जातियों से संबंधित विकास कार्यों के मुकम्मल होने के बाद ही गांव के अन्य विकास कार्य शुरू किये जाएं। बाजवा ने कहा कि पंचायती जमीनों को ठेके /चकोते पर देते समय अनुसूचित जातियों को दी जाने वाली तीसरे हिस्से जमीन की बोली अलग करवाने के लिए बाकायदा तौर पर गांव में मुनादी करवाई जाये और संबंधित गांव के गुरूद्वारे /मंदिरों के लाउड स्पीकर के द्वारा सुबह शाम सूचना दी जाये।

इस जमीन की बोली में सिर्फ संबंधित गांव के निवासी अनुसूचित जाति वर्ग के लोग ही हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों के कोटे में से बोली के द्वारा ठेके पर दी गई जमीन लेने वाले लोगों को इस ज़मीन पर खुद ही खेती करने की अपील भी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ठेके पर ली गई जमीन को आगे किसी अन्य व्यक्ति को खेती करने के लिए दिया गया तो यह बोली रद्द कर दी जायेगी।


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