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शिवराज सरकार में नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना के घोटालेबाजों पर कार्रवाई कि मांग: मिश्रा

मध्य प्रदेश कांग्रेस इकाई के पूर्व मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने शिवराज राज में नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना में हुए घोटाले में शमिल लोगों पर कार्रवाई की मांग की

शिवराज सरकार में नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना के घोटालेबाजों पर कार्रवाई कि मांग: मिश्रा
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भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस इकाई के पूर्व मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने शिवराज में नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना में हुए घोटाले में शमिल लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। मिश्रा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर यह मांग की है।

मुख्यमंत्री को आज लिखे पत्र में मिश्रा ने कहा है कि गत दिनों शनिश्चरी अमावस्या पर श्रद्धालुओं को उज्जैन में कीचड़ युक्त पानी में स्नान करना पड़ा। यह नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना में हुए घोटाले का सबसे बड़ा प्रमाण है।

शिवराज सिह चौहान ने इस योजना की आड़ में शर्म के नाम पर राजनीतिक व्यापार कर लोगों को ठगा है। इसमें करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ है।

मिश्रा का आरोप है कि शिवराज ने अपनी व्यक्तिगत ब्रांडिंग के लिए नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना पर केंद्रित लाखों रुपये के विज्ञापनों को प्रकाशित कराया और इसके माध्यम से भी भ्रम फैलाया।

दूसरी ओर, सरकार बदलने के बाद महज सात दिन में मकर संक्रांति के मौके पर क्षिप्रा में नर्मदा नदी का पानी पहुंचाया गया और नई सरकार ने श्रद्धालुओं को साफ पानी में स्नान करने का मौका दिया। इससे नई सरकार की मंशा और कार्यशैली का पता लोगों को चल गया है।

मिश्रा ने कमलनाथ को लिखे पत्र में इस परियोजना में हुए घोटाले को लेकर शिवराज सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा कितनी बार आवाज उठाई गई, इसका भी ब्यौरा दिया गया है।

उन्होंने लिखा है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष अरुण यादव ने गत वर्ष उज्जैन में हुए सिहस्थ महाकुंभ में हुए 5000 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए पूर्व प्रभारी, नेता प्रतिपक्ष और मौजूदा गृहमंत्री बाला बच्चन के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित की थी, जिसमें वरिष्ठ नेता रामनिवास रावत, जीतू पटवारी और जयवर्धन सिह सदस्य थे।

कमेटी ने कई बार मौके पर जाकर सिहस्थ व इस लिक योजना में हुए भ्रष्टाचार के विभिन्न प्रमाणों के साथ पार्टी व संगठन को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

क्षिप्रा में ड्रेनेज का पानी मिलने के वीडियो भी साक्ष्य के रूप में उपलब्ध कराए हैं, जिन्हें आधार बनाकर दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।


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