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किसान नेताओं की मांग : हरियाणा के मंत्री दलाल और विज को बर्खास्त करें

हरियाणा के किसान नेताओं ने प्रदेश सरकार में मंत्री जेपी दलाल और अनिल विज को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है

किसान नेताओं की मांग : हरियाणा के मंत्री दलाल और विज को बर्खास्त करें
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नई दिल्ली। हरियाणा के किसान नेताओं ने प्रदेश सरकार में मंत्री जेपी दलाल और अनिल विज को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाले यूनियनों के नेता मंगलवार को रोहतक के गढ़ी सांपला स्थित दीनबंधु सर चौधरी छोटूराम के स्मारक स्थल पर सर्व खाप पंचायत द्वारा अयोजित छोटूराम जयंती समारोह में पहुंचे थे। संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि जेपी दलाल और अनिल विज द्वारा दिए गए किसान विरोधी बयान को लेकर उन्हें बर्खास्त करने की मांग की गई है।

देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर पिछले साल 26 नवंबर से चल रहे किसानों के प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले किसान यूनियनों का संघ संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से किसान नेता डॉ. दर्शनपाल ने एक बयान के जरिए बताया कि हरियाणा में किसानों ने महापंचायतों द्वारा जेपी दलाल को बर्खास्त करने के प्रस्ताव पारित किए हैं और प्रदेश के मुख्यमंत्री (मनोहर लाल खट्टर) व राज्यपाल (सत्यदेव नारायण आर्य) के नाम ज्ञापन भी दिए हैं।

केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर (एमएसपी) पर फसलों की खरीद की मांग को लेकर आंदोलन की राह पकड़े किसानों ने दिवंगत किसान नेता सर छोटू राम की जयंती पर उन्हें याद किया। छोटूराम जयंती वसंत पंचमी को मनाई जाती है।

संयुक्त किसान मोर्चा के नेता ने बताया कि किसानों के मसीहा सर छोटू राम ने ब्रिटिश सरकार में किसान हितों के लिए 22 महत्वपूर्ण कानून पारित करवाए और किसानों को शोषणकारी साहूकारों के चंगुल से मुक्त करवाया। मोर्चा के नेता डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि देशभर में किसान अभी भी संघर्ष की राह पर हैं, जिनके लिए छोटू राम प्रेरणास्रोत हैं।

उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश के किसानों ने बताया कि महंगाई बढ़ने के बावजूद गन्ने की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। यहां तक कि अकेले उत्तर प्रदेश में किसानों का गन्ने का बकाया लगभग 12000 करोड़ रुपये है। इसलिए आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश से और किसान इस आंदोलन में शामिल हो सकते हैं।"

मोर्चा ने बताया कि किसान आंदोलन के समर्थन में हो रहीं किसान महापंचायतों/ जनसभाओं के क्रम में तेलंगाना में एक दिन पहले आयोजित एक महासभा में हजारों किसानों ने हिस्सा लिया।


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