सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग, ब्रिक्स में युद्ध के खिलाफ संयुक्त बयान पर जोर
दुनिया में कई जगहों पर जारी युद्ध और अमेरिका के साथ बढ़ते विभिन्न देशों के तनाव के बीच नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मलेन का आयोजन महत्तवपूर्ण माना जा रहा है

दुनिया में कई जगहों पर जारी युद्ध और अमेरिका के साथ बढ़ते विभिन्न देशों के तनाव के बीच नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मलेन का आयोजन महत्तवपूर्ण माना जा रहा है.
शनिवार 12 सितंबर को, नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत हुई. 11 देशों के नेता और बड़े अधिकारी इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अलग अलग बैठकों के दौरान विभिन्न नेताओं से मिल रहे हैं.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शनिवार को नई दिल्ली पहुंचे. वह भारत, रूस और ईरान के नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेंगे. चीन ब्रिक्स देशों में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. वह दुनिया के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार और निवेश वाले देशों में भी शामिल है. शी जिनपिंग की भारत यात्रा पर खास नजर इसलिए भी है क्योंकि वह 2019 के बाद पहली बार भारत आए हैं. तकरीबन सात साल पहले वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनौपचारिक बैठक के लिए चेन्नई गए थे.
शी जिनपिंग की यह यात्रा भारत और चीन के रिश्तों के लिए भी महत्तवपूर्ण मानी जा रही है. एक दिन पहले चीन ने कहा था कि वह भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है और दोनों देश आपस में बातचीत बढ़ाएंगे, सहयोग मजबूत करेंगे व अपने मतभेदों को सही तरीके से सुलझाने की कोशिश करेंगे. भारत और चीन के बीच सीमा विवाद अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुआ है. दोनों देशों ने तिब्बत के पास करीब 3,500 किलोमीटर लंबी ऊंची पहाड़ी सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिक तैनात कर रखे हैं.
युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच हो रहा है सम्मलेन
इस बार मध्य पूर्व और यूक्रेन युद्ध, दुनिया में बढ़ता व्यापार तनाव और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे इस दो दिवसीय बैठक में केंद्रीय होंगे. इसके पहले शुक्रवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेष से अहम मुलाकातें कीं.
भारत ने शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नई दिल्ली में स्वागत किया और सम्मेलन से पहले द्विपक्षीय बैठक की. इससे पहले पुतिन दिसंबर 2025 में भारत आए थे. रूस भारत के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक है. अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हुआ है. इस संकट के बीच भारत ने रूस से तेल और ऊर्जा खरीद जारी रखी है. हालांकि, यूक्रेन-रूस युद्ध और अमेरिका तथा दूसरे पश्चिमी देशों के दबाव के कारण भारत के लिए यह स्थिति आसान नहीं है.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे. उन्होंने कहा कि अमेरिका और इस्राएल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान पर दबाव अब बहुत गंभीर और खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है. भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और ईरान के नेताओं ने समुद्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और व्यापार की आजादी बनाए रखने पर चर्चा की. समुद्र में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया.
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युद्ध पर संयुक्त बयान जारी कर सकता है ब्रिक्स
ब्रिक्स देशों के बीच नई दिल्ली में चल रहे सम्मेलन में एक संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति बनने की संभावना है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इस बयान में बिना किसी का नाम लिए, किसी भी देश द्वारा अपनी ओर से शुरू किए गए युद्ध की निंदा की जा सकती है. हालांकि, अभी तक इस बयान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
इस बयान को लेकर ब्रिक्स देशों के बीच बातचीत चल रही है. खासकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद एक बड़ी चुनौती है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र के संघर्ष में दोनों अलग-अलग पक्षों के साथ हैं. ब्रिक्स के प्रतिनिधि इन मतभेदों को कम करने और सभी देशों की सहमति से एक साझा बयान तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं.
ब्रिक्स देशों के इस समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.
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अन्य देशों से मुलाकात का दौर जारी
उज्बेकिस्तान के उप प्रधानमंत्री जमशिद कुचकारोव और वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई ट्रुंग भी 18वें ब्रिक्स सम्मलेन में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे हैं. वियतनाम के प्रधानमंत्री ने भी नई दिल्ली में भारतीय नेताओं से द्विपक्षीय बातचीत की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन से अलग अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद से भी मुलाकात की. भारत ने इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमदऔर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें आयोजित कीं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में बेलारूस के विदेश मंत्री माक्सिम रिजेनकोव से आपसी संबंधों और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की.


