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बिहार में भाजपा का सीएम, अब जनता के लिए काम करे सरकार: सीमा मलिक

एनसीपी (एसपी) नेता सीमा मलिक ने बिहार में मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे पर कहा कि मुझे वहां की जनता के लिए बहुत दुख हो रहा है

बिहार में भाजपा का सीएम, अब जनता के लिए काम करे सरकार: सीमा मलिक
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नई दिल्ली। एनसीपी (एसपी) नेता सीमा मलिक ने बिहार में मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे पर कहा कि मुझे वहां की जनता के लिए बहुत दुख हो रहा है। क्योंकि, उन्होंने बहुत उम्मीदों से नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट किया था।

नई दिल्ली में सीमा मलिक ने कहा कि अब बिहार में सम्राट चौधरी नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि बिहार जो गरीब राज्य है, वहां पर लोगों को रोजगार देने का काम किया जाएगा।

सीमा मलिक ने जदयू कार्यकर्ताओं का जिक्र करते हुए कहा कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री रहेंगे; यह बात उनके कार्यकर्ता और प्रवक्ता टीवी पर लगातार कहते रहे, लेकिन हम पहले से जानते थे कि भाजपा कुछ और ही करने वाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाजपा का पुराना खेल है।

उन्होंने कहा कि हम तो पहले से कहते रहें कि महाराष्ट्र में जो एकनाथ शिंदे के साथ किया, वही बिहार में नीतीश कुमार के साथ दोहराया गया है। भाजपा को बिहार की मुख्यमंत्री पद की कुर्सी मिल गई है।

सीमा मलिक ने कहा कि बिहार में अभी भी जंगल राज है। 20 सालों तक नीतीश कुमार की सरकार रही, लेकिन औद्योगिक विकास नहीं हुआ, और नौकरियां नहीं मिलीं।

उन्होंने राजद नेता तेजस्वी यादव के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि बिहार देश का सबसे गरीब राज्य बना हुआ है। प्रति व्यक्ति आय बेहद कम है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति खराब है। लोग काम की तलाश में बाहर पलायन करते हैं।

महिला आरक्षण बिल पर सीमा मलिक ने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही इस बिल के समर्थन में रही है।

उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 2023 में बिल लाकर हाइप क्रिएट किया गया, लेकिन उसमें जनगणना और डेलिमिटेशन की शर्त लगा दी गई। चुनाव के समय महिलाओं को प्रभावित करने के लिए यह बिल लाया गया है। यह राजनीतिक गिमिक लगता है।

नोएडा में श्रमिकों की हड़ताल और हिंसा पर सीमा मलिक ने कहा कि हिंसा नहीं होनी चाहिए। प्रदर्शन करने का सभी को अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए।

उन्होंने मजदूरों की समस्याओं पर चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें मात्र 11,000 रुपए वेतन मिलता है, जबकि न्यूनतम मजदूरी 20,000 रुपए बताई जा रही है। 12 घंटे काम, कोई छुट्टी नहीं, बीमारी की छुट्टी नहीं-यह मानवाधिकार का मुद्दा है।


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