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आखिर दिक्कत क्या है, मार्को रुबियो से मुंबई में मुलाकात पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि विपक्षी दल अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुंबई यात्रा और वहां हुई बैठक की आलोचना क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अतीत में भी भारतीय नेता विदेशी नेताओं से दिल्ली के बाहर मुलाकात करते रहे हैं।

आखिर दिक्कत क्या है, मार्को रुबियो से मुंबई में मुलाकात पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर
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नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि विपक्षी दल अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुंबई यात्रा और वहां हुई बैठक की आलोचना क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अतीत में भी भारतीय नेता विदेशी नेताओं से दिल्ली के बाहर मुलाकात करते रहे हैं।

एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में बोलते हुए एस. जयशंकर ने कहा, "मुझे यह समझ नहीं आया। क्या उन्हें मुंबई पसंद नहीं है? क्या उन्हें मुंबई से कोई समस्या है? मेरा मानना है कि यह एक शानदार शहर है। यह देश की वित्तीय राजधानी है, बॉलीवुड की राजधानी है और यहां बहुत कुछ है। शायद मुंबई उन्हें पसंद नहीं करती, मुझे नहीं पता कि उन्हें इससे क्या आपत्ति है।"

पिछले सप्ताह कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुंबई में जयशंकर और मार्को रुबियो की मुलाकात को लेकर केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए इसे "तलब किया जाना" बताया था।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एस. जयशंकर ने कई पुराने उदाहरणों का जिक्र किया, जब भारतीय नेताओं ने दिल्ली से बाहर जाकर विदेशी नेताओं से मुलाकात की थी।

उन्होंने कहा, "अगर दिल्ली से बाहर जाकर किसी विदेशी नेता या समकक्ष से मिलना तलब किया जाना है, तो मैं आपको कई उदाहरण दे सकता हूं। इंदिरा गांधी, भुट्टो से मिलने शिमला गई थीं। क्या उन्हें तलब किया गया था? सलमान खुर्शीद जयपुर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मिलने गए थे। क्या उन्हें तलब किया गया था?"

विदेश मंत्री एस. जयशंक ने कहा, "हम सभी समझदार लोग हैं, इसलिए इस विषय पर परिपक्व तरीके से चर्चा करनी चाहिए।"

विदेश मंत्री ने 19 और 20 अक्टूबर को मुंबई में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अमेरिका के अपने समकक्षों की मेजबानी की थी। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भी हिस्सा लिया था।

इससे पहले पिछले सप्ताह विदेश मंत्रालय ने भी जयशंकर की द्विपक्षीय बैठकों के लिए मुंबई को चुने जाने को लेकर की गई आलोचनाओं को खारिज कर दिया था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा था कि पिछले लगभग एक दशक से विदेशी नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों की मेजबानी दिल्ली के बाहर भी की जाती रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेन के प्रधानमंत्री की मेजबानी वडोदरा में की थी। जर्मनी के चांसलर की मेजबानी अहमदाबाद में की गई थी। मॉरीशस के प्रधानमंत्री की मेजबानी वाराणसी में की गई थी।

उन्होंने यह भी बताया कि विदेश मंत्री ने एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक गोवा में आयोजित की थी, जबकि बोत्सवाना के विदेश मंत्री की मेजबानी गुजरात के केवड़िया में की गई थी। इसके अलावा हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन का आयोजन अमृतसर में किया गया था।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दिल्ली के बाहर विदेशी नेताओं की मेजबानी करना कोई नई बात नहीं है और यह लंबे समय से अपनाई जा रही कूटनीतिक परंपरा का हिस्सा है।


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