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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन आज मुंबई दौरे पर, लालबागचा राजा के करेंगे दर्शन

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शुक्रवार को महाराष्ट्र में मुंबई, लोनावला और पुणे का दौरा करेंगे और धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस दौरान उपराष्ट्रपति शुक्रवार सुबह मुंबई में लालबागचा राजा के दर्शन करेंगे।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन आज मुंबई दौरे पर, लालबागचा राजा के करेंगे दर्शन
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लोनावला में योग कॉलेज के प्लेटिनम जुबली समारोह में शामिल

  • पुणे फेस्टिवल के 38वें संस्करण में होंगे उपस्थित
  • हैदराबाद मुक्ति दिवस पर दिया ऐतिहासिक संदेश

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शुक्रवार को महाराष्ट्र में मुंबई, लोनावला और पुणे का दौरा करेंगे और धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस दौरान उपराष्ट्रपति शुक्रवार सुबह मुंबई में लालबागचा राजा के दर्शन करेंगे।

शुक्रवार दोपहर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन लोनावला जाएंगे और कैवल्यधाम के गोर्धनदास सेकसरिया कॉलेज ऑफ योग एंड कल्चरल सिंथेसिस के प्लेटिनम जुबली समारोह में शामिल होंगे।

शुक्रवार शाम को उपराष्ट्रपति पुणे के नेहरू स्टेडियम स्थित श्री गणेश कला क्रीड़ा रंगमंच पर पुणे फेस्टिवल के 38वें संस्करण में शामिल होंगे।

इससे पहले गुरुवार को उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने हैदराबाद मुक्ति दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया।

उन्होंने कहा कि 17 सितंबर, 1948 का दिन स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक निर्णायक अध्याय के समापन का प्रतीक है, जब सितंबर 1948 की घटनाओं और 'ऑपरेशन पोलो' के बाद तत्कालीन हैदराबाद राज्य का भारतीय संघ में विलय हुआ।

उन्होंने कहा कि हैदराबाद मुक्ति दिवस केवल एक ऐतिहासिक तारीख को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की यात्रा और उन मूल्यों की याद दिलाता है जो भारत को एकजुट रखते हैं। वे सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में आयोजित 79वें हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हैदराबाद की कहानी उन भारी चुनौतियों को दर्शाती है जिनका सामना एक नए राष्ट्र ने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों से निकले लोगों को एक साथ लाने में किया था। यह राज-कौशल, साहस और बलिदान की कहानी थी, जिसके बाद एक संवैधानिक लोकतंत्र बनाने का बड़ा और निरंतर चलने वाला काम आया, जिसमें हर नागरिक का समान स्थान हो।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय एकता में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि पहले गृह मंत्री और राज्य मामलों के मंत्री के तौर पर, सरदार पटेल पर एक असाधारण जिम्मेदारी थी, क्योंकि उस समय भारत बंटवारे से उबर रहा था और साथ ही सैकड़ों रियासतों को एक संघ में एकीकृत कर रहा था। उपराष्ट्रपति ने कहा कि जहां महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत की आजादी में अहम भूमिका निभाई, वहीं सरदार पटेल ने रियासतों को आधुनिक भारत में मिलाने में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब 2047 तक विकसित भारत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

हैदराबाद संघर्ष के पीछे के जन-आंदोलन को श्रद्धांजलि देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों, बुद्धिजीवियों, लेखकों, समाज सेवकों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, किसानों और आम नागरिकों ने इस संघर्ष में हिस्सा लिया और जेल, हिंसा और भारी निजी कठिनाइयों का सामना किया।

उन्होंने रामजी गोंड, तुर्रेबाज खान और कोमाराम भीम समेत कई देशभक्तों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनका साहस हमें याद दिलाता है कि इतिहास सिर्फ सरकारी दफ्तरों में या मशहूर राजनेताओं द्वारा नहीं बनता, बल्कि उन आम नागरिकों द्वारा भी बनता है जो अन्याय को अपनी किस्मत मानने से इनकार कर देते हैं।

उन्होंने कहा, "राजनीतिक एकीकरण इलाकों को एक साथ ला सकता है। संवैधानिक लोकतंत्र नागरिकों को एक साथ लाता है।" उन्होंने जोर दिया कि राष्ट्रीय एकता को सिर्फ भूगोल के आधार पर बनाए नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे समान अधिकारों, समान सम्मान और समान अवसरों के जरिए मजबूत किया जाना चाहिए।

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शुक्रवार को महाराष्ट्र में मुंबई, लोनावला और पुणे का दौरा करेंगे और धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस दौरान उपराष्ट्रपति शुक्रवार सुबह मुंबई में लालबागचा राजा के दर्शन करेंगे।

शुक्रवार दोपहर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन लोनावला जाएंगे और कैवल्यधाम के गोर्धनदास सेकसरिया कॉलेज ऑफ योग एंड कल्चरल सिंथेसिस के प्लेटिनम जुबली समारोह में शामिल होंगे।

शुक्रवार शाम को उपराष्ट्रपति पुणे के नेहरू स्टेडियम स्थित श्री गणेश कला क्रीड़ा रंगमंच पर पुणे फेस्टिवल के 38वें संस्करण में शामिल होंगे।

इससे पहले गुरुवार को उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने हैदराबाद मुक्ति दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया।

उन्होंने कहा कि 17 सितंबर, 1948 का दिन स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक निर्णायक अध्याय के समापन का प्रतीक है, जब सितंबर 1948 की घटनाओं और 'ऑपरेशन पोलो' के बाद तत्कालीन हैदराबाद राज्य का भारतीय संघ में विलय हुआ।

उन्होंने कहा कि हैदराबाद मुक्ति दिवस केवल एक ऐतिहासिक तारीख को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की यात्रा और उन मूल्यों की याद दिलाता है जो भारत को एकजुट रखते हैं। वे सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में आयोजित 79वें हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हैदराबाद की कहानी उन भारी चुनौतियों को दर्शाती है जिनका सामना एक नए राष्ट्र ने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों से निकले लोगों को एक साथ लाने में किया था। यह राज-कौशल, साहस और बलिदान की कहानी थी, जिसके बाद एक संवैधानिक लोकतंत्र बनाने का बड़ा और निरंतर चलने वाला काम आया, जिसमें हर नागरिक का समान स्थान हो।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय एकता में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि पहले गृह मंत्री और राज्य मामलों के मंत्री के तौर पर, सरदार पटेल पर एक असाधारण जिम्मेदारी थी, क्योंकि उस समय भारत बंटवारे से उबर रहा था और साथ ही सैकड़ों रियासतों को एक संघ में एकीकृत कर रहा था। उपराष्ट्रपति ने कहा कि जहां महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत की आजादी में अहम भूमिका निभाई, वहीं सरदार पटेल ने रियासतों को आधुनिक भारत में मिलाने में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब 2047 तक विकसित भारत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

हैदराबाद संघर्ष के पीछे के जन-आंदोलन को श्रद्धांजलि देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों, बुद्धिजीवियों, लेखकों, समाज सेवकों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, किसानों और आम नागरिकों ने इस संघर्ष में हिस्सा लिया और जेल, हिंसा और भारी निजी कठिनाइयों का सामना किया।

उन्होंने रामजी गोंड, तुर्रेबाज खान और कोमाराम भीम समेत कई देशभक्तों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनका साहस हमें याद दिलाता है कि इतिहास सिर्फ सरकारी दफ्तरों में या मशहूर राजनेताओं द्वारा नहीं बनता, बल्कि उन आम नागरिकों द्वारा भी बनता है जो अन्याय को अपनी किस्मत मानने से इनकार कर देते हैं।

उन्होंने कहा, "राजनीतिक एकीकरण इलाकों को एक साथ ला सकता है। संवैधानिक लोकतंत्र नागरिकों को एक साथ लाता है।" उन्होंने जोर दिया कि राष्ट्रीय एकता को सिर्फ भूगोल के आधार पर बनाए नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे समान अधिकारों, समान सम्मान और समान अवसरों के जरिए मजबूत किया जाना चाहिए।


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