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पोलैंड पहुंचे केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, भारत के साथ रणनीतिक संबंधों को मिलेगी नई मजबूती

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और उनका प्रतिनिधिमंडल सोमवार को पोलैंड के वारसॉ पहुंचा। वारसॉ में स्थित भारतीय दूतावास ने उनका स्‍वागत किया। यह दौरा भारत और पोलैंड के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्‍वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पोलैंड पहुंचे केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, भारत के साथ रणनीतिक संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
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नई द‍िल्‍ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और उनका प्रतिनिधिमंडल सोमवार को पोलैंड के वारसॉ पहुंचा। वारसॉ में स्थित भारतीय दूतावास ने उनका स्‍वागत किया। यह दौरा भारत और पोलैंड के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्‍वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पोलैंड के वारसॉ में स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट पर ल‍िखा,''केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और उनके प्रतिनिधिमंडल का वारसॉ पहुंचने पर हार्दिक स्वागत किया गया। यह यात्रा प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नई दिल्ली में हाल ही में हुई मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद हो रही है। माना जा रहा है कि यह दौरा दोनों नेताओं की बैठक में हुए समझौतों और फैसलों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।''

दूतावास ने पोस्‍ट में आगे लि‍खा, ''इस यात्रा से भारत और पोलैंड के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच सहयोग को नई गति देने और आपसी साझेदारी को और गहरा बनाने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।''

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने अक्‍टूबर में भारत का दौरा किया था। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ डोनाल्ड टस्क ने 2030 तक भारत और पोलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोलैंड की कंपनियों को भारत में निवेश और कारोबार विस्तार के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल बाजार, कुशल कार्यबल, तेजी से बढ़ता विनिर्माण क्षेत्र और नवाचार-आधारित इकोसिस्टम विदेशी कंपनियों के लिए बड़े अवसर प्रदान करता है।

वहीं डोनाल्ड टस्क ने पोलैंड में भारतीय निवेश की सराहना करते हुए कहा कि पोलैंड, मध्य और पूर्वी यूरोप के साथ-साथ व्यापक यूरोपीय बाजार में विस्तार करने की इच्छुक भारतीय कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बन सकता है।

दोनों नेताओं ने कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इसके लिए द्विपक्षीय कार्य समूह की गतिविधियों को फिर से शुरू किया जाएगा, जिससे कृषि व्यापार और तकनीकी सहयोग को नई गति मिल सके।


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