तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज, ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी को आयोग से झटका, 18 सितंबर तक मांगा विकल्प
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीएमसी) पर दावे को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम फैसला सुनाते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह दोनों को फ्रीज कर दिया है

नई दिल्ली। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीएमसी) पर दावे को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम फैसला सुनाते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह दोनों को फ्रीज कर दिया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि न तो ममता बनर्जी गुट और न ही अरूप रॉय गुट फिलहाल 'एआईटीएमसी' नाम का अकेले इस्तेमाल कर सकेगा।
चुनाव आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि दोनों गुटों को पार्टी के मूल नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिन्ह 'फूल-घास' के उपयोग की अनुमति नहीं होगी।
आयोग ने स्पष्ट किया कि दोनों गुट अपने-अपने लिए अलग नाम चुन सकते हैं। यदि वे चाहें तो अपने नाम के साथ मूल पार्टी 'एआईटीएमसी' से संबंध का उल्लेख भी कर सकते हैं। साथ ही दोनों गुटों को चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचित मुक्त चुनाव चिन्हों (फ्री सिंबल्स) की सूची में से अलग-अलग चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे।
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि दोनों गुट 18 सितंबर की सुबह 11 बजे तक अपने नए नाम और पसंदीदा चुनाव चिन्हों के विकल्प आयोग को उपलब्ध कराएं।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने गुरुवार को नई दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात कर अंतिम दौर की सुनवाई की।
पार्टी से बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट के प्रतिनिधियों को दोपहर 3 बजे बुलाया गया था, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की सुनवाई शाम 4 बजे हुई।
इससे पहले 12 सितंबर को भी आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी थीं। हालांकि उस समय कोई फैसला नहीं लिया गया था और अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए थे। उन्हीं दस्तावेजों और अंतिम दलीलों के आधार पर आयोग ने अब यह अंतरिम निर्णय लिया है।
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार को लेकर दोनों गुटों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। दोनों पक्ष खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बता रहे हैं और पार्टी के संगठन तथा चुनाव चिन्ह पर दावा कर रहे हैं।
चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद अब आगामी उपचुनावों में दोनों गुट अलग-अलग नाम और अलग-अलग चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे।
फिलहाल आयोग के फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों गुट नए नाम और चुनाव चिन्ह के रूप में क्या विकल्प चुनते हैं?


