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कृषि मंत्रालय ने तमिलनाडु में एफपीओ को मजबूत करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया

तमिलनाडु में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को मजबूत करने, उनकी कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और उनके विस्तार एवं पहुंच को बेहतर बनाने के उपायों की सिफारिश करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है

कृषि मंत्रालय ने तमिलनाडु में एफपीओ को मजबूत करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया
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नई दिल्ली। तमिलनाडु में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को मजबूत करने, उनकी कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और उनके विस्तार एवं पहुंच को बेहतर बनाने के उपायों की सिफारिश करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय की ओर से बुधवार को दी गई।

मंत्रालय ने बताया कि यह निर्णय शिवराज सिंह चौहान की हालिया एरोड यात्रा के बाद लिया गया है, जिस दौरान किसानों एवं हितधारकों के साथ एफपीओ द्वारा सामना की जा रही परिचालन, तकनीकी एवं बाजार संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की गई। इन सुझावों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए, मंत्रालय ने राज्य में एफपीओके प्रदर्शन का अध्ययन करने एवं सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए समिति के गठन को मंजूरी प्रदान की है।

मंत्रालय द्वारा जारी किए गए बयान के मुताबिक, इस समिति में नाबार्ड, नाफेड, एसएफएसी-तमिलनाडु, आईसीएआर-राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (एनआरसीबी), एफएपीओ के प्रतिनिधि, गैर सरकारी संगठन एवं कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी शामिल हैं, जो एक व्यापक और जमीनी स्तर पर मूल्यांकन सुनिश्चित करेंगे। यह समिति एफएपीओ को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों की जांच करेगी, जिनमें संस्थागत शासन एवं प्रबंधन पद्धतियां, व्यावसायिक परिचालन एवं स्थिरता, तकनीकी सहायता एवं विस्तार संपर्क, एकत्रीकरण, मूल्यवर्धन एवं विपणन चुनौतियां, साथ ही क्षमता निर्माण एवं मार्गदर्शन संबंधी आवश्यकताएं शामिल हैं।

इसके अलावा, समिति बेहतर व्यापार एवं परिचालन मॉडल, उन्नत तकनीकी सहायता एवं सलाहकार समर्थन, संस्थागत एकीकरण एवं समन्वय तथा मजबूत बाजार संपर्क एवं प्रचार गतिविधियों के माध्यम से एफपीओ परिचालन को सुदृढ़ बनाने के उपायों की सिफारिश करेगी। इसमें तमिलनाडु के महत्वपूर्ण फसलों एवं प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिनमें केला, हल्दी, नारियल, टैपिओका तथा प्राकृतिक एवं जैविक कृषि प्रणालियां शामिल हैं।

मंत्रालय ने बताया कि समिति दो महीने के भीतर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। आईसीएआर-राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (एनआरसीबी), तिरुचिरापल्ली, केवीके के साथ मिलकर आईसीएआर-एटीएआरआई, हैदराबाद के माध्यम से मेजबान संस्था के रूप में कार्य करेगा और बैठकों, क्षेत्र भ्रमण और रिपोर्ट संकलन के लिए आवश्यक रसद एवं सचिवीय सहयोग प्रदान करेगा।


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